'कश्मीरी हिंदुओं के हत्यारों को सामने लाए सरकार', 30 साल बाद भी न्याय की तलाश कर रहा अनंतनाग का यह परिवार
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में एक कश्मीरी परिवार का तीन दशक पुराना मुआवजा मामला केंद्रीय सूचना आयोग पहुंच गया है। ...और पढ़ें
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अनंतनाग परिवार का 30 साल पुराना मुआवजा मामला CIC पहुंचा
HighLights
अनंतनाग परिवार का 30 साल पुराना मुआवजा मामला CIC पहुंचा
1992 में आतंकवाद से नष्ट संपत्ति का मुआवजा नहीं मिला
दूसरी पीढ़ी स्वीकृत राहत राशि के वितरण की जांच कर रही
राज्य ब्यूरो, जम्मू। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के वेरीनाग क्षेत्र के एक कश्मीरी परिवार का तीन दशक से अधिक समय से लंबित मुआवजा मामला अब केंद्रीय सूचना आयोग तक पहुंच गया है। परिवार की दूसरी पीढ़ी अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि 1992 में आतंकवाद से हुए संपत्ति के नुकसान के लिए मंजूर राहत राशि आखिर किसे मिली।
अपीलकर्ता प्राणनाथ के अनुसार, 7-8 दिसंबर 1992 की रात आतंकवाद से संबंधित एक घटना में उनकी संपत्ति जलकर नष्ट हो गई थी। इसमें लगभग 10 मरला भूमि पर बना तीन मंजिला मकान, बहुमंजिला गौशाला और लकड़ी का अनाज भंडार शामिल था।
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दायर आवेदन में प्राणनाथ ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार अब तक इस नुकसान के लिए कोई अनुग्रह राहत राशि प्रदान नहीं की गई है। यदि कोई भुगतान किया गया है तो उसके प्राप्तकर्ता का नाम, दी गई राशि और संबंधित स्वीकृति आदेश की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
बता दें कि 1989-90 में आतंकवाद पनपते ही लाखों कश्मीरी हिंदुओं ने कश्मीर से पलायन किया था। दस्तावेजों के अनुसार, उस समय लागू नियमों के तहत 44,500 रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी और इसे वितरण के लिए जम्मू स्थित राहत आयुक्त (माइग्रेंट्स) को भेजा गया था।
हालांकि, राहत एवं पुनर्वास आयुक्त कार्यालय के एक संचार में कहा गया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वेरीनाग निवासी शिव जी शर्मा, महाराज कृष्ण और पुष्कर नाथ के पक्ष में इस मामले में कोई राशि वितरित नहीं की गई है। प्राणनाथ का कहना है कि न तो उन्हें और न ही अन्य कानूनी वारिसों को अब तक कोई भुगतान मिला है।
उन्होंने यह भी जानकारी मांगी है कि यदि भुगतान किया गया है तो उसे किस व्यक्ति ने निकाला। यह मामला एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चले आ रहे संघर्ष को दर्शाता है। इस दावे की शुरुआत प्राण नाथ के दिवंगत पिता शिव जी शर्मा, जो संपत्ति के सह-स्वामी थे, ने की थी।
परिवार ने पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था। समय बीतने और मूल दावेदारों के निधन के बाद अब इस मामले को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दूसरी पीढ़ी पर आ गई है, जो यह स्पष्ट करना चाहती है कि स्वीकृत राहत राशि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंची या नहीं।
मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने कहा कि संबंधित अधिकारी की अनुपस्थिति में भुगतान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अनंतनाग के उपायुक्त के जन सूचना अधिकारी को सुनना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित अधिकारी न तो सुनवाई में उपस्थित हुए और न ही उन्होंने कोई लिखित पक्ष या स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, जबकि उन्हें पहले से नोटिस दिया गया था।
