Weather Update: जम्मू-कश्मीर में पहाड़ों पर बर्फबारी, कुछ इलाकों में हल्की बारिश के आसार; जानें मौसम का ताजा अपडेट
Jammu-Kashmir Weather 29 Oct: मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 6 नवंबर तक मौसम शुष्क रहेगा, हालांकि कुछ दिनों ...और पढ़ें

जम्मू में दिन में गर्मी, रात में ठंड का एहसास। (फाइल फोटो)
HighLights
6 नवंबर तक जम्मू-कश्मीर में मौसम रहेगा आमतौर पर शुष्क।
कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना।
किसानों को धान कटाई और रबी फसलों की बुवाई की सलाह।
जागरण संवाददाता, जम्मू। मौसम में बदलाव दिखने लगा है। रात के समय तापमान में गिरावट आने लगी है। मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 6 नवंबर तक मौसम आमतौर पर शुष्क रहने की संभावना है। 29 अक्टूबर की देर दोपहर या शाम को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी हो सकती है।
30 अक्टूबर को मौसम आमतौर शुष्क और बादल छाए रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर दोपहर बाद हल्की बारिश हो सकती है। 31 अक्टूबर को मौसम शुष्क रहेगा, जबकि 1 से 3 नवंबर तक आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। वहीं, 4 से 6 नवंबर के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी की संभावना है।
1 नवंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान
कृषि मौसम अनुसंधान केंद्र, स्कास्ट-जम्मू और भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी कृषि मौसम सलाह के अनुसार जम्मू जिले में अगले पांच दिनों, 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक, मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
आसमान साफ से आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। इस दौरान अधिकतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 से 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
किसानों के लिए सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अनुकूल मौसम का लाभ उठाते हुए धान की पकी फसल की कटाई जल्द पूरी करने, मड़ाई करने तथा अनाज को अच्छी तरह सुखाकर सुरक्षित भंडारण करने की सलाह दी है। मक्के के दानों को भी 10 से 12 प्रतिशत नमी तक सुखाकर भंडारित करने को कहा गया है।
किसानों को चना, मटर और मसूर की समय पर बुवाई करने तथा बीजों को अनुशंसित फफूंदनाशक और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने की सलाह दी गई है। सरसों की बुवाई के लिए भी मौसम अनुकूल बताया गया है। वहीं, तोरिया की फसल में खरपतवार नियंत्रण और आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करने को कहा गया है।
