जागरण संवाददाता, जम्मू। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल जीसी मुर्मू ने लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण को समय की जरूरत बताया है। उन्होंने कहा है कि राजनीतिक व सामाजिक सशक्तिकरण के साथ आर्थिक सशक्तिकरण भी अनिवार्य है। यह तभी हो सकता है जब ग्रामीण स्तर पर भी वित्तीय समावेश पूर्ण रूप से प्रभावी हो और लोग जागरूक हों। बीमा क्षेत्र को प्राथमिकता पर लेने का आह्वान करते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर के लोग सबसे निचले स्तर पर है, लिहाजा लोगों को विशेषकर निम्न व मध्य वर्ग को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत है।

उपराज्यपाल मंगलवार की शाम को वित्तीय समावेश पर अभियान को लांच करने के बाद कहा कि जम्मू-कश्मीर के जिन क्षेत्रों में बैं¨कग सुविधाएं नहीं हैं, वहां ये सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। वित्तीय समावेश का मतलब लोगों की पहुंच का दायरा बढ़ाना है ताकि वे वित्तीय क्षेत्र में मिल रही सुविधाओं का लाभ उठा सके।

मुर्मू ने कहा कि किसी भी प्रदेश का आर्थिक विकास वित्तीय समावेश पर भी निर्भर करता है। इससे अमीरों-गरीबों के बीच का अंतर कम करने का अवसर मिलता है और लोगों को एक सुरक्षित लेनदेन, सामाजिक सुरक्षा, सब्सिडी व सरकारी बीमा योजनाओं को लाभ मिल पाता है। मुर्मू ने कहा कि वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के कंधों पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

मुर्मू ने जम्मू-कश्मीर बैंक व जेएंडके ग्रामीण बैंक की ओर से प्रायोजित दो-दो सेल्फ हेल्थ ग्रुप को सम्मानित करने के अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं के दस लाभार्थियों में मंजूरी पत्र भी बांटे। कार्यक्रम में उपराज्यपाल के सलाहकार राजीव राय भटनागर, चीफ सेक्रेटरी बीवीआर सुब्रह्मण्यम, वित्तीय आयुक्त अरुण मेहता, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव पवन कोतवाल, जम्मू के डिवीजनल कमिश्नर संजीव वर्मा, जेके बैंक के चेयरमैन आरके छिब्बर तथा आरबीआइ के रीजनल डायरेक्टर थॉमस मैथ्यू मुख्य रूप से मौजूद रहे। 

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