श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। श्रीनगर को पत्थरबाजी से मुक्त करने और युवकों को अलगाववादियों के मंसूबों से बचाने के लिए को श्रीनगर पुलिस ने 30 नामी नाबालिग पत्थरबाजों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें पत्थरबाजों की न सिर्फ काउंसिलिंग की गई, बल्कि पत्थरबाजी रोकने और छात्रों को हिंसक प्रदर्शनों से बचाने को लेकर उनसे सुझाव भी लिए गए।

कार्यशाला में करीब 30 पत्थरबाजों ने हिस्सा लिया। इनमें से अधिकांश छात्र हैं, जो हाल ही में श्रीनगर में हुई हिंसक घटनाओं और पत्थरबाजी में लिप्त रहे हैं। पुलिस प्रवक्ता ने पत्थरबाजों के लिए आयोजित कार्यशाला और काउंसिलिंग सत्र की पुष्टि करते हुए बताया कि बटमालू और शहीदगंज पुलिस स्टेशन में कार्यशाला का आयोजन हुआ है। इनमें सिर्फ श्रीनगर शहर में पत्थरबाजी की घटनाओं के दौरान पकड़े गए लड़कों को शामिल किया गया था।

मनोचिकित्सकों, समाज विज्ञानियों और पुलिस अधिकारियों ने इन पत्थरवाजों से बातचीत करते हुए हिंसा में लिप्त होने की भावनाओं को समझने का प्रयास करते हुए उन्हें इससे बचने के उपाय बताए। उन्होंने पुलिस व प्रशासन के प्रति अपनी मानसिकता के बारे में भी खुलकर बताया। कई पत्थरबाजों ने कहा कि वह सिर्फरोमांच के लिए पथराव करते हैं। उनसे पत्थरबाजी करने के लिए कहा जाता है और वे बिना सोचे-समङो इस काम में शामिल हो जाते हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि काउंसिलिंग सत्र में शामिल लड़कों ने भविष्य में पत्थरबाजी व हिंसा से दूर रहने का यकीन दिलाते हुए अन्य लोगों को भी इस स्थिति से बचाने के लिए अपनी तरफ से कई सुझाव दिए। कार्यशाला में कई पत्थरबाजों के अभिभावक भी स्वेच्छा से शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भी अपने अनुभव साझा किए।मनोचिकित्सक व पुलिस अधिकारियों ने पत्थरबाजों की भावनाओं को समझने का किया प्रयास, कुछ युवाओं ने कहा कि वे केवल रोमांच के लिए करते हैं पत्थरबाजी। उन्हें नहीं पता कि क्या सही है और क्या गलत। 

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