करवा चौथ 29 अक्टूबर को, पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं दूर करें ये भ्रम; जानें जम्मू में कब दिखेगा चांद
Karwa Chauth Date: इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा, जिसमें पहली बार व्रत रखने वाली ...और पढ़ें

29 अक्टूबर को मनेगा करवा चौथ, इस बार नहीं होगा उद्यापन। (फाइल फोटो)
HighLights
करवा चौथ 29 अक्टूबर को, पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं भी।
शुक्र के बाल्यत्व के कारण इस वर्ष उद्यापन नहीं होगा।
पूजन शुभ मुहूर्त शाम 5.38 से 7.05 बजे तक रहेगा।
जागरण संवाददाता, जम्मू। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, वीरवार को रखा जाएगा। जो महिलाएं पहली बार इस व्रत की शुरुआत करना चाहती हैं, वे भी विधि-विधान के साथ व्रत रख सकती हैं। केवल इस वर्ष शुक्र के बाल्यत्व के कारण व्रत का उद्यापन, मोख नहीं किया जाएगा।
महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि सनातन धर्म में व्रत-पर्वों का विशेष महत्व है। करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था, समर्पण और दांपत्य प्रेम का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के लिए निर्जल उपवास रखती हैं। चंद्र दर्शन और पूजन के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि करवा चौथ का पर्व जम्मू-कश्मीर सहित पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार कर भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती, स्वामी कार्तिकेय और चंद्रदेव की पूजा करती हैं तथा करवा चौथ की कथा सुनती हैं।
पूजन का शुभ मुहूर्त
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार, पंचांग के मुताबिक कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर की देर रात 1.07 बजे आरंभ होकर 29 अक्टूबर की रात 10.11 बजे समाप्त होगी। इसलिए करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। पूजन का शुभ समय शाम 5.38 बजे से 7.05 बजे तक रहेगा। जम्मू में चंद्र दर्शन का संभावित समय रात 8.25 बजे बताया गया है। अन्य स्थानों पर चंद्रोदय का समय अलग हो सकता है।
सरगी से लेकर चंद्र पूजन तक निभाई जाती है परंपरा
करवा चौथ के दिन महिलाएं प्रातः काल सरगी ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करती हैं। जम्मू क्षेत्र में सरगी में फैनी, कतलमे, नारियल, दूध, रबड़ी और मीठी कचौरी जैसी पारंपरिक खाद्य सामग्री शामिल की जाती है। इसके बाद महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजन करती हैं।
पूजन के दौरान करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाया जाता है और गेहूं, बूरा, मिठाई, फूल, दीपक तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन कर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है।
रात्रि में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं छलनी से चंद्रमा और फिर अपने पति के दर्शन करती हैं तथा पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं न हों भ्रमित
महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि कुछ स्थानों पर यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस वर्ष पहली बार करवा चौथ का व्रत शुरू नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि इच्छुक महिलाएं इस वर्ष भी व्रत रख सकती हैं। हालांकि, इस वर्ष उद्यापन नहीं होगा। उन्होंने बताया कि परंपरानुसार कुछ महिलाएं 12 या 16 वर्षों तक व्रत रखने के बाद उद्यापन करती हैं, जबकि कई महिलाएं इसे जीवनभर भी जारी रखती हैं।
