जम्मू, जेएनएन। नेशनल कांफ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां शुरू करने के लिए नेताओं की रिहाई की मांग दोहराई। पार्टी के सचिव रतन लाल गुप्ता ने नेताओं की नजरबंदी को गैर लोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि सरकार को नेशनल कांफ्रेंस सहित अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को रिहा करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद हैं जिसमें फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती शामिल हैं।

गुप्ता ने बयान जारी कर कहा कि राजनीतिक नेताओं की नजरबंदी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियों को पूरी तरह बहाल करने और हालात सामान्य बनाने के लिए मुख्यधाारा से संबधित सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई जरूरी है। जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त अधिकार और एकीकृत जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित राज्यों में विभाजित किए तीन माह से अधिक समय हो गया है। परंतु अभी तक राजनीतिक बंदियों को रिहा नहीं किया गया है।

कश्मीर में लोग इंटरनेट और मोबाइल फोन की निर्विघ्न सेवा को बहाल किए जाने की मांग कर रहे हैं। देश के अन्य भागों में लोग इन सुविधाओं का बिना किसी रुकावट लाभ ले रहे हैं। कश्मीर में लोगों को मोबाइल पर एसएमएस की सेवा से भी वंचित किया गया है।

Posted By: Rahul Sharma

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस