जेकेएमपीसीएल की सफलता की कहानी; 75,000 डेयरी किसानों का साथ, 400 करोड़ का कारोबार
जम्मू और कश्मीर मिल्क प्रोड्यूसर्स को-ऑपरेटिव लिमिटेड (जेकेएमपीसीएल) 75,000 डेयरी किसानों को जोड़कर 400 करोड़ रुपये का कारोबार कर रही है। यह सहकारी संस्था किसानों को उचित मूल्य और तकनीकी सहायता प्रदान करती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया है और रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।

जेकेएमपीसीएल भविष्य में विस्तार की योजना बना रहा है।
राज्य ब्यूरो, जागरण, जम्मू। जम्मू और कश्मीर दुग्ध उत्पादक सहकारी लिमिटेड (जेकेएमपीसीएल) एक दशक से भी कम समय में बीमार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई अब यह दूध उत्पादकों को बोनस देने वाली लाभ देने वाली इकाई बन गया है।
सालाना इसका कारोबार चार सौ करोड़ से अधिक का हो गया है। इसके साथ 75 हजार से अधिक डेयरी किसान जुड़ गए हैं जिनमें से 18 हजार महिला किसान हैं।यह जानकारी जेकेएमपीसीएल के अध्यक्ष अशोक अंगुराना ने केंद्रीय सरकार पेंशनर्स कल्याण संघ (सीजीपीडब्ल्यूए) जम्मू को दी।
1654 ग्राम डेयरी सहकारी समितियों का नेटवर्क
अंगुराना ने कहा कि जेकेएमपीसीएल का दुग्ध संयंत्र जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का सबसे बड़ा डेयरी सहकारी संगठन है जो प्रतिदिन लगभग 2 लाख लीटर दूध का प्रबंधन करता है। 1654 ग्राम डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से 75000 डेयरी किसान इसे संचालित करते हैं।
इनमें 18 हजार महिला डेयरी किसान भी शामिल हैं। पिछले वर्ष बिक्री आय में 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब 406 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार हो गया है। इसका मुख्य कारण आधुनिकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और ग्राहक संतुष्टि पर ध्यान केंद्रित करना है।
एक दशक में बीमार से लाभदायक इकाई तक
अंगुराना ने कहा कि सफलता की यात्रा भारत के मिल्कमैन के रूप में लोकप्रिय स्वर्गीय डॉ वर्गीस कुरियन की सलाह पर 2004 में गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ के साथ की गई विशेष व्यवस्था से शुरू हुई। इस व्यवस्था के तहत जेकेएमपीसीएल को उनके मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, विपणन विशेषज्ञता, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली और रणनीतिक दिशा से लाभ हुआ है।
उनके मार्गदर्शन में जेकेएमपीसीएल अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपग्रेड करने में सक्षम रहा है। जेकेएमपीसीएल अमूल और स्नो कैप के नाम से अपने उत्पाद बेच रही है।जेकेएमपीसीएल में 2018-19 में 15340 दूध उत्पादक थे और आज उनकी संख्या 75000 है।इसने 2024-25 के दौरान 675 लाख किलोग्राम दूध की खरीद की। इसका कारोबार भी 2018-19 में 47 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 407 करोड़ रुपये हो गया।
सरकार का लक्ष्य 100 प्रतिशत दूध संगठित क्षेत्र से आए
वर्तमान में यह छह दूध उत्पादों छाछ, घी, पनीर, खीर और आइसक्रीम का उत्पादन कर रहा है। यह कलरी बनाने की योजना बना रहा है और ट्रायल रन जारी है। हाल ही में एक नया आधुनिक टेट्रा पैक प्लांट चालू किया गया है। अंगुराना ने कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद 68 प्रतिशत कच्चा दूध अभी भी असंगठित क्षेत्र के माध्यम से ही आता है और सरकार चाहती है कि 100 प्रतिशत दूध संगठित क्षेत्र से ही आए जिससे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद सुनिश्चित होंगे।
बाद में जेकेएमपीसीएल के जमीनी स्तर पर कामकाज पर एक पेशेवर रूप से बनाई गई डाक्यूमेंट्री दिखाई गई। निदेशक मंडल के सीईओ और सदस्य सचिव चिराग ने इसकी विभिन्न विशेषताओं के बारे में बताया।
आपको बता दें कि केंद्रीय सरकार पेंशनर्स कल्याण संघ (सीजीपीडब्ल्यूए) जम्मू के चालीस सदस्यों ने आज जम्मू और कश्मीर दुग्ध उत्पादक सहकारी लिमिटेड द्वारा संचालित सतवारी स्थित दुग्ध संयंत्र का दौरा किया। अध्यक्ष कुलदीप खुड्डा के नेतृत्व में सीजीपीडब्ल्यूए के सदस्यों ने संयंत्र का दौरा किया।

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