जम्मू-कश्मीर में नवंबर से मिलेंगी मुफ्त किताबे, बोर्ड ने शुरू की तैयारी; चार कक्षाओं का सिलेबस भी बदलेगा
जम्मू-कश्मीर शिक्षा बोर्ड नवंबर से सभी स्कूलों में मुफ्त पाठ्यपुस्तकों का वितरण शुरू करेगा, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में नए सत्र से पहले पहुंचेंगी किताबें। (फाइल फोटो)
HighLights
नवंबर से जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में मुफ्त किताबें मिलेंगी।
कक्षा 1, 2, 3 और 6 के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बोझ कम करने पर जोर।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की तैयारी तेज हो गई है। जम्मू-कश्मीर बोर्ड आफ स्कूल एजुकेशन नवंबर 2026 के पहले सप्ताह से सभी शिक्षा जोन में मुफ्त पाठ्यपुस्तकों का वितरण शुरू करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नया सत्र शुरू होते ही विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए किताबें मिल जाएं और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
बोर्ड के चेयरमैन गुलाम हसन शेख ने इस बताया कि सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों के लिए पाठ्य पुस्तकें छापी हैं। इसके लिए शिक्षा विभाग के यूडीआइएसइ पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों को आधार बनाया गया है। बोर्ड इन आंकड़ों के अनुसार किताबों की छपाई के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त पुस्तकों का भी इंतजाम करता है।
यूडीआइएसइ केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली है। इसके माध्यम से स्कूलों के बुनियादी ढांचे, सुविधाओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है। इसी डेटा के आधार पर किताबों की जरूरत का आकलन किया जाता है। छपी पुस्तकों का इस्तेमाल बाजार में आपूर्ति और सरकारी स्कूलों में मुफ्त वितरण, दोनों के लिए किया जाता है।
चार कक्षाओं की किताबों में बदलाव
बोर्ड ने प्राथमिक स्तर की कक्षा पहली, दूसरी और तीसरी के साथ कक्षा छठी की पाठ्यपुस्तकों का सिलेबस भी संशोधित किया है। चेयरमैन के अनुसार, यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप किया गया है। बोर्ड आने वाले समय में अन्य कक्षाओं का पाठ्यक्रम भी संशोधित करेगा।
इन बदलावों को शैक्षणिक सत्र 2027-28 में लागू किए जाने की उम्मीद है। नए पाठ्यक्रम के तहत पहली और दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए गणित, अंग्रेजी, उर्दू और कश्मीरी विषय निर्धारित किए हैं। वहीं, तीसरी कक्षा से पर्यावरण विज्ञान की किताब पढ़ाई जाएगी, जिसमें सामाजिक विज्ञान और विज्ञान के विषयों को मिलाकर शामिल किया है।
शेख ने कहा कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुसार, शुरुआती कक्षाओं में बच्चों पर अनावश्यक अकादमिक बोझ नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई में रुचि कम हो सकती है।
किताबें जोन तक पहुंचाना बोर्ड की जिम्मेदारी
सभी स्कूलों में छोटी कक्षाओं की योगात्मक परीक्षाएं चल रही हैं और नवंबर के पहले सप्ताह में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना प्रस्तावित है। ऐसे में समय पर किताबों की उपलब्धता अहम है। बोर्ड शिक्षा जोन तक यूडीआइएसइ के आंकड़ों के आधार पर किताबें पहुंचाएगा, जबकि जोन से संबंधित स्कूलों तक उनका वितरण जोनल शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।
बोर्ड ने निजी स्कूलों के लिए भी प्राथमिक से उच्च कक्षाओं तक अपनी निर्धारित पाठ्यपुस्तकें अपनाना अनिवार्य किया है। बोर्ड ने यह निर्देश जम्मू-कश्मीर बोर्ड आफ स्कूल एजुकेशन अधिनियम, 1975 के तहत मिले अधिकारों के आधार पर जारी किए हैं। इस अधिनियम के अनुसार, बोर्ड को विभिन्न शैक्षणिक स्तरों के पाठ्यक्रम, सिलेबस और पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करने का अधिकार है।
