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जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न्स की बल्ले-बल्ले, स्टाइपेंड 12,300 से बढ़कर 25,000 रुपये; उमर सरकार का बड़ा फैसला

Published: Tue, 20 Oct 2026 04:01 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में इंटर्नशिप कर रहे मेडिकल और डेंटल स्नातकों का मासिक स्टाइपेंड 12,300 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया ...और पढ़ें

12,300 से सीधे 25 हजार रुपये हुआ मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड। (फाइल फोटो)

12,300 से सीधे 25 हजार रुपये हुआ मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड 12,300 से 25,000 रुपये हुआ।

  2. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्टाइपेंड वृद्धि को मंजूरी दी।

  3. यह फैसला इंटर्न के विरोध प्रदर्शनों के बाद आया।

डिजिटल डेस्क, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में इंटर्नशिप कर रहे मेडिकल और डेंटल ग्रेजुएट्स के लिए एक बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनके मासिक स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मंजूरी दे दी है। साथ ही, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग को तुरंत जरूरी आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।

जानकारी के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस संशोधन से जुड़ी फाइल को मंजूरी दे दी है। इससे MBBS और BDS इंटर्न को मिलने वाले मासिक मानदेय में काफी बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है।

21 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी होगी

सूत्रों के अनुसार, औपचारिक आदेश मंगलवार को ही जारी होने की उम्मीद थी, लेकिन छुट्टी होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। अब विभाग 21 अक्टूबर को जरूरी नोटिफिकेशन जारी करेगा।

स्टाइपेंड में लगभग 103.25% की वृद्धि 

इस फैसले से मासिक स्टाइपेंड में 12,700 रुपये की बढ़ोतरी होगी, जो मौजूदा राशि के मुकाबले लगभग 103.25% की वृद्धि है। बता दें कि संशोधित स्टाइपेंड पाने वाले एक इंटर्न को अब 3 लाख रुपये मिलेंगे, जबकि पहले उन्हें 1,47,600 रुपये मिलते थे। इसका साफ मतलब है कि 1,52,400 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

महंगाई का हवाला देकर इंटर्न्स ने किया प्रदर्शन

पूरे जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS इंटर्न स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। वे अपने मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे थे।

जानकारी के अनुसार, इंटर्न ने अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। उनका तर्क था कि बढ़ती महंगाई के बावजूद पिछले सात साल से उनके स्टाइपेंड में कोई बदलाव नहीं किया गया था, जबकि वे अस्पतालों में दिन-रात अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं।