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जम्मू-कश्मीर में 1.53 लाख आवारा कुत्तों का क्या होगा? सरकार ने तैयार किया पूरा प्लान, अब हर जिले तक पहुंचेगा अभियान

Published: Fri, 02 Oct 2026 07:15 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। अब ...और पढ़ें

जम्मू -कश्मीर में आवारा कुत्तों पर 'ऑपरेशन कंट्रोल' का विस्तार। (फाइल फोटो)

जम्मू -कश्मीर में आवारा कुत्तों पर 'ऑपरेशन कंट्रोल' का विस्तार। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 68 हजार कुत्तों की नसबंदी, 80 हजार का टीकाकरण पूरा।

  2. पूरे जम्मू-कश्मीर में 20 नए एबीसी केंद्र बनेंगे।

  3. अभियान अब जिला और ग्रामीण स्तर तक पहुंचेगा।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने का अभियान अब केवल जम्मू और श्रीनगर तक सीमित नहीं रहने वाला। प्रशासन ने इसे पूरे केंद्र शासित प्रदेश में फैलाने की तैयारी शुरू कर दी है। एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम के तहत अब तक 68346 कुत्तों की नसबंदी और 80725 का टीकाकरण किया जा चुका है। प्रदेश में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या करीब 1.53 लाख है।

अगले चरण में 20 नए एबीसी केंद्र स्थापित करने की योजना है। 13 जिलों में इसके लिए जमीन चिन्हित की जा चुकी है। फिलहाल पांच केंद्र भगवती नगर, रूपनगर, एसपीसीए चौआदी, तेंगपोरा और सुहामा में संचालित हैं, जबकि चट्टरहामा में एक अन्य केंद्र निर्माणाधीन है। इससे साफ है कि प्रशासन अब आवारा कुत्तों के प्रबंधन को शहर-केंद्रित व्यवस्था से निकालकर जिला और ग्रामीण स्तर तक ले जाने की तैयारी में है।

यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में तैयार की गई रिपोर्ट का हिस्सा है, जिसकी 22 सितंबर को मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने समीक्षा की थी। हाल के छह महीनों में भी नसबंदी और टीकाकरण अभियान में तेजी दर्ज की गई है।

जम्मू ने दिखाई राह, श्रीनगर में भी रफ्तार

जम्मू इस कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां दिसंबर 2014 से एबीसी अभियान चल रहा है और अप्रैल 2021 से मौजूदा गैर सरकारी संगठन द्वारा 34646 सर्जरी की जा चुकी हैं। विभाग के अनुसार जम्मू में नसबंदी का स्तर करीब 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

अब अगली चुनौती ग्रामीण इलाकों की है। इसके लिए एसपीसीए चौआदी को ग्रामीण जम्मू के हब के तौर पर मजबूत करने और मोबाइल टीमों के जरिए ब्लॉक व गांवों तक पहुंचने की योजना बनाई गई है।

श्रीनगर में भी क्षमता बढ़ाई जा रही है। तेंगपोरा एबीसी केंद्र ने पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में सर्जरी की हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद यहां एक समर्पित नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है। तेंगपोरा और हुमहामा स्थित बीएसएफ वेटेनरी अस्पताल में वार्डवार नसबंदी अभियान भी शुरू किया गया है।

अब अभियान सिर्फ नसबंदी तक सीमित नहीं

प्रशासन ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन को एक व्यापक व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की है। डिजिटल निगरानी के लिए मोबाइल एप और स्टैमिस पोर्टल का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, एबीसी कार्यक्रम के लिए पशु चिकित्सकों, पैरावेटरिनरी कर्मचारियों और प्रशिक्षित डॉग-कैचर की टीम तैयार की जा रही है। हालांकि, खासकर श्रीनगर में समर्पित मानव संसाधन की कमी अभी चुनौती बनी हुई है।

श्रीनगर में अब तक 15266 सर्जरी और 15725 टीकाकरण दर्ज किए गए हैं। टेंगपोरा केंद्र ने 2023 में 4432 और 2024 में 6995 सर्जरी कीं। शुहामा केंद्र भी कई वर्षों से अभियान में सक्रिय है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की 24 अगस्त की बैठक के बाद श्रीनगर में व्यवस्था को और व्यवस्थित किया गया है। एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है और वार्डवार नसबंदी शुरू की गई है। टेंगपोरा एबीसी शेल्टर तथा हुमहामा स्थित बीएसएफ वेटरनरी अस्पताल में अब तक 150 सर्जरी की जा चुकी हैं।

जहां केंद्र नहीं, वहां पहुंचेगा मोबाइल अस्पताल

आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए स्थायी केंद्रों की कमी दूर करने के साथ सरकार मोबाइल सुविधाओं पर भी काम कर रही है। प्रस्तावित प्रीफैब्रिकेटेड मोबाइल एबीसी यूनिट में ऑपरेशन थिएटर और केनेल होंगे। इसकी अनुमानित लागत 61.75 लाख रुपये है। करीब 1800 वर्ग फुट की इस इकाई में सर्जिकल उपकरण के साथ परिवहन, उसे खोलने और दूसरी जगह दोबारा स्थापित करने का खर्च भी शामिल है।

इसके अलावा डॉग-कैचिंग वाहनों और प्रशिक्षित कर्मचारियों के लिए करीब 10 लाख रुपये तथा छोटे शहरी निकायों और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए मोबाइल शेल्टर या प्रीफैब्रिकेटेड ढांचे के लिए 57 लाख रुपये का प्रस्ताव है।

फीडिंग स्पॉट से पशु पंजीकरण तक नई व्यवस्था

आवारा कुत्तों को नियंत्रित तरीके से भोजन उपलब्ध कराने के लिए पूरे प्रदेश में 502 निर्धारित फीडिंग स्पॉट बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य स्कूल, खेल मैदान, सीढ़ियों और सार्वजनिक प्रवेश द्वार जैसे संवेदनशील स्थानों से अलग नियंत्रित क्षेत्रों में भोजन की व्यवस्था करना है।

दूसरी ओर, पालतू कुत्तों के मालिकों को भी व्यवस्था के दायरे में लाया जा रहा है। जम्मू में 3015 पालतू जानवरों का पंजीकरण हो चुका है। अवैध पशु कारोबार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है और कई दुकानों को सील किया गया है।

45 हजार से ज्यादा संस्थानों पर निगरानी

अभियान का एक अहम हिस्सा सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा भी है। स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थानों को मिलाकर 45881 संस्थान चिन्हित किए गए हैं। इनमें अब तक 15901 निरीक्षण हो चुके हैं। संस्थानों में आवारा पशुओं की आवाजाही रोकने और जरूरत पड़ने पर स्थानीय प्रशासन से समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

यानी जम्मू-कश्मीर में आवारा कुत्तों से निपटने की कोशिश अब सिर्फ नसबंदी और टीकाकरण तक नहीं रह गई है। नए केंद्र, मोबाइल टीमें, डिजिटल निगरानी, निर्धारित फीडिंग स्पॉट, संस्थागत निरीक्षण और पालतू पशुओं का पंजीकरण, इन सबको जोड़कर प्रशासन एक ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश कर रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में शहरी ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी दिखाई देगा।