'गुलाम नबी आजाद और रविंद्र रैना को अब तक क्यों दे रखा है सरकारी आवास?', जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने गुलाम नबी आजाद और रविंद्र रैना को सरकारी आवास रखने की अनुमति पर कड़ी आपत्ति जताई है। ...और पढ़ें

हाईकोर्ट ने पूछा- समिति को किसने दिया अधिकार? (फाइल फोटो)
HighLights
हाईकोर्ट ने सरकारी आवास पर जताई कड़ी आपत्ति।
गुलाम नबी आजाद, रविंद्र रैना को मिली अनुमति।
कोर्ट ने आवास नीति पर मांगा स्पष्टीकरण।
जागरण संवाददाता, जम्मू। पूर्व मंत्रियों, विधायकों व राजनेताओं से सरकारी आवास खाली करवाए जाने की मांग को लेकर छह साल पूर्व दायर जनहित याचिका में सुनवाई हुई। इस दौरान जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद व भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र रैना को मार्च 2027 तक सरकारी आवास में रहने की अनुमति दिए जाने पर कड़ा एतराज व्यक्त किया है।
बेंच ने प्रशासन से संबंधित नीति पर स्पष्टीकरण मांगा है। बेंच ने पूछा है कि राजनीतिक नेताओं को सरकारी आवास अपने पास रखने की अनुमति देने वाली समिति को यह अधिकार किस नियम के तहत प्राप्त है।
मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने हाईकोर्ट काे बताया कि 14 अगस्त को हुई बैठक में निर्धारित समिति ने आजाद और रविंद्र रैना को सरकारी आवास आवंटित रखने की सिफारिश की थी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने दोनों नेताओं को मार्च 2027 तक या अगली समीक्षा होने तक, जो भी पहले हो, आवास अपने पास रखने की अनुमति दी।
हाईकोर्ट ने नीति और समिति के अधिकार पर मांगा जवाब
इस पर हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने पूछा कि जम्मू-कश्मीर में सरकारी आवास बनाए रखने के लिए राजनीतिक व्यक्तियों पर लागू नीति क्या है और संबंधित समिति को ऐसे मामलों पर विचार करने की शक्ति कहां से प्राप्त होती है?
इस पर सरकारी वकील ने उचित हल्फनामा दाखिल करने और एक समान नीति के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए समय मांगा। हाईकोर्ट ने इस अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को निर्धारित की।
2020 में दायर हुई थी जनहित याचिका
बता दें कि समाजसेवी प्रो. एसके भल्ला ने वर्ष 2020 में यह जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि 2018 में विधानसभा भंग होने के बावजूद नेताओं से सरकारी आवास खाली नहीं करवाए जा रहे।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर 180 से अधिक राजनेताओं से सरकारी आवास खाली करवाए गए लेकिन गुलाम नबी आजाद व रविंद्र रैना से आवास खाली नहीं करवाए गए।
