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जम्मू-कश्मीर में फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, कितने फायर स्टेशन जरूरी और कितने चालू? प्रशासन से मांगा पूरा ब्योरा

Published: Fri, 30 Oct 2026 01:00 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने राज्य में आगजनी से निपटने की तैयारियों और फायर फाइटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी ...और पढ़ें

फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से मांगा ब्योरा। (फाइल फोटो)

फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से मांगा ब्योरा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने फायर सेफ्टी पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

  2. प्रशासन को फायर स्टेशनों का तुलनात्मक ब्योरा पेश करना होगा।

  3. जनहित याचिका पर 17 नवंबर को अगली सुनवाई।

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में आगजनी की घटनाओं से निपटने की तैयारियों और फायर फाइटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर हाईकोर्ट ने प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने प्रदेश में मौजूद फायर स्टेशनों की संख्या, निर्धारित मानकों के तहत आवश्यक स्टेशनों तथा विभिन्न क्षेत्रों की फायर रिस्क के आधार पर स्थिति का पूरा ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया है।

चीफ जस्टिस डा. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस यशपाल बौरनी की अध्यक्षता में गठित बेंच ने यह निर्देश फायर फाइटिंग नीति के कथित तौर पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं होने को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए।

याचिका एडवोकेट मोहम्मद राहूफ खान ने दायर की है और वह स्वयं मामले में पेश हुए। सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से पेश सीनियर अडीशनल एडवोकेट जनरल मोनिका कोहली ने गृह मंत्रालय के अधीन स्टैंडिंग फायर एडवाइजरी काउंसिल की ओर से निर्धारित दिशा-निर्देशों का हवाला दिया।

कहां कितनी देर में पहुंचनी चाहिए फायर ब्रिगेड?

इन मानकों के अनुसार, फायर स्टेशन स्थापित करने में आबादी, भौगोलिक परिस्थितियों, आग के खतरे और निकटतम फायर स्टेशन से घटनास्थल तक पहुंचने में लगने वाले समय को ध्यान में रखा जाता है। नीतिगत मानकों के तहत क्षेत्रों को हाई रिस्क, मीडियम रिस्क, लो रिस्क तथा ग्रामीण या अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्रों में बांटा गया है।

हाई रिस्क क्षेत्रों में तीन मिनट, शहरी मीडियम व लो रिस्क क्षेत्रों में पांच मिनट तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 मिनट के भीतर फायर सेवा पहुंचने का मानक बताया गया है।

दिशा-निर्देशों में शहरी क्षेत्रों में करीब प्रत्येक 10 वर्ग किलोमीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में 50 वर्ग किलोमीटर पर फायर स्टेशन की सिफारिश की गई है, हालांकि स्थानीय जोखिम के अनुसार इसमें बदलाव संभव है।

हाईकोर्ट ने मांगा फायर स्टेशनों का पूरा ब्योरा

बेंच ने प्रशासन को चारों श्रेणियों के तहत क्षेत्रों की संख्या, आवश्यक फायर स्टेशनों और वर्तमान में कार्यरत फायर स्टेशनों का तुलनात्मक ब्योरा चार्ट के रूप में पेश करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट को हलफनामे के साथ दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।