जम्मू-कश्मीर में 5 साल में 4,386 सरकारी स्कूल घटे, 188 में एक भी बच्चा नहीं; मर्जर से छात्राओं की पढ़ाई पर भी चिंता
जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच वर्षों में 4386 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जो कुल संख्या का 18.9% है। केंद्रीय शिक्षा ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की संख्या में बड़ी गिरावट। (फाइल फोटो)
HighLights
जम्मू-कश्मीर में 5 साल में 4386 सरकारी स्कूल घटे।
दूरदराज के इलाकों में बच्चों की शिक्षा पर गंभीर असर।
188 स्कूलों में एक भी छात्र नहीं, 1544 में एक शिक्षक।
सुरेंद्र सिंह, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच वर्षों के दौरान सरकारी स्कूलों का नेटवर्क तेजी से सिमटा है। वर्ष 2021-22 की तुलना में 2025-26 तक प्रदेश में 4386 सरकारी स्कूल कम हो गए हैं। यह सरकारी स्कूलों की संख्या में करीब 18.9 प्रतिशत की कमी है। इसके मुकाबले इसी अवधि में देशभर में सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी करीब 1.7 प्रतिशत रही। सरकारी स्कूलों की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट अब शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों की पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट से यह तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में जम्मू-कश्मीर में कुल 24,228 सरकारी स्कूल चल रहे हैं।इनमें करीब 26.58 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और 1.66 लाख शिक्षक कार्यरत हैं।
वहीं बंद हुए अधिकतर स्कूल प्रदेश के उन दूर दराज इलाकों में हैं, जहां पहले ही साक्षरता दर कम है और ऐसे में इन स्कूलों के बंद होने से वहां रहने वाले बच्चों की पढ़ाई भी छूट रही है।
मर्जर से लड़कियों की शिक्षा पर असर की आशंका
हालांकि सरकार का दावा है कि स्कूल बंद नहीं बल्कि दूसरे स्कूलों के साथ मर्ज किए गए हैं लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिन स्कूलों के साथ इन्हें मर्ज किया गया है, वे बंद किए गए स्कूलों से दूर हैं जहां बंद किए गए स्कूलों के बच्चों का पहुंचना आसान नहीं रहता। विशेषकर छात्राओं को अभिभावक दूर नहीं भेजना चाहते, जिस कारण लड़कियों के शिक्षा अनुपात पर असर पड़ेगा।
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ सकता है। यदि किसी स्कूल को बंद या दूसरे स्कूल में मर्ज किया गया है तो वहां पढ़ने वाले बच्चों को नए स्कूल तक पहुंचने के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है।
188 स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़े सरकारी स्कूलों की स्थिति का दूसरा पहलू भी सामने रखते हैं। जम्मू-कश्मीर में 188 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं है। वहीं 1544 स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम है और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए सरकार को स्कूलों का पुनर्गठन करना पड़ रहा है। लेकिन पुनर्गठन के साथ यह भी जरूरी है कि संबंधित क्षेत्र के बच्चों के लिए वैकल्पिक स्कूल, शिक्षक और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हों।
'सरकार जिला स्तर पर आंकड़े सार्वजनिक करे'
जम्मू कश्मीर पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रधान अमित कपूर का कहना है कि 4386 सरकारी स्कूलों की कमी का आंकड़ा सामने आने के बाद अब सरकार को जिला, ब्लाक और पंचायत स्तर पर इसकी पूरी तस्वीर सार्वजनिक करनी चाहिए। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने स्कूल बंद हुए, कितने मर्ज किए गए और कितने का दर्जा बदला गया।
साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किन स्कूलों में स्थानांतरित किया गया और उनकी आवाजाही के लिए क्या व्यवस्था की गई। इससे यह पता चल सकेगा कि स्कूलों के पुनर्गठन का असर वास्तव में विद्यार्थियों पर कितना पड़ा है।
