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जम्मू-कश्मीर के कारीगरों-बुनकरों के लिए बड़ी खबर! वेतन ढांचे की समीक्षा करेगी हाईलेवल कमेटी, 3 महीने में रिपोर्ट

Published: Thu, 03 Sep 2026 07:00 AM (IST)

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में कारीगरों और बुनकरों की मौजूदा वेतन संरचना की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय ...और पढ़ें

हैंडीक्राफ्ट-हैंडलूम कारीगरों को मिल सकता बेहतर वेतन ढांचा। (फाइल फोटो)

हैंडीक्राफ्ट-हैंडलूम कारीगरों को मिल सकता बेहतर वेतन ढांचा (फाइल फोटो)

HighLights

  1. उपराज्यपाल ने कारीगरों, बुनकरों के वेतन समीक्षा को समिति बनाई।

  2. समिति तीन महीने में सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।

  3. नया वेतन ढांचा निष्पक्ष, समान और टिकाऊ होगा।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में मौजूदा वेतन संरचना की समीक्षा कर इसमें आवश्यक संशोधन की सिफारिश करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है।

कमेटी अधिसूचित हस्तशिल्प व हथकरघा शिल्पों के मौजूदा प्रावधानों में संशोधन कर कारीगरों व बुनकरों के लिए वेतन संरचना को अधिक उपयुक्त एवं व्यवस्थित बनाने का काम करेगी। कमेटी की अध्यक्षता उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव करेंगे।

श्रम आयुक्त, हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग के कश्मीर व जम्मू के निदेशक, जम्मू-कश्मीर हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम के प्रबंध निदेशक इसके सदस्य होंगे।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अपर सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे जबकि श्रम एवं रोजगार विभाग के अतिरिक्त सचिव स्तर के एक प्रतिनिधि को भी समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

चैंबर ऑफ कॉमर्स से भी दो प्रतिनिधि बनेंगे सदस्य

कमेटी में मान्यता प्राप्त कारीगर व बुनकर समुदायों के दो प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। इसेक साथ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री से एक-एक प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

कमेटी के अध्यक्ष अपने कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए जरूरत पड़ने पर किसी अन्य सदस्य या तकनीकी विशेषज्ञ को भी कमेटी में शामिल कर सकते हैं।

तीन महीने में सरकार को रिपोर्ट देगी कमेटी

कमेटी तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। जम्मू-कश्मीर के हैंडीक्राफ्ट व हैंडलूम सेक्टर की अनूठी कला, शिल्प कौशल, सांस्कृतिक विरासत व ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुएनया वेतन ढांचा निष्पक्ष, समान व टिकाऊ होना चाहिए।

कमेटी कारीगरों व बुनकरों के मौजूदा वेतन पैटर्न का व्यापक अध्ययन व वेतन में असमानताओं का विश्लेषण करेगी। इसके साथ कारीगरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन व बाजार के उतार-चढ़ाव, कच्चे माल की लागत, मांग में बदलाव का उनकी कमाई पर असर की जांच करेगी।