विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में नशा तस्करों का नया पैंतरा, अब हेरोइन नहीं ऐसे युवाओं तक पहुंच रहा नशा; 5,282 मामलों ने बढ़ाई टेंशन

Published: Mon, 05 Oct 2026 03:33 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में पुलिस की सख्ती के बाद नशा तस्करों ने हेरोइन की जगह दर्द निवारक दवाओं की तस्करी शुरू कर ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में हेरोइन के बाद फार्मा ड्रग्स का बढ़ा इस्तेमाल। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में हेरोइन के बाद फार्मा ड्रग्स का बढ़ा इस्तेमाल। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. तस्करों ने हेरोइन की जगह दर्द निवारक दवाओं की तस्करी शुरू की।

  2. युवाओं और बच्चों में ट्रामाडोल, टैपेंटाडोल जैसी दवाओं का नशा बढ़ा।

  3. कश्मीर के एटीएफ सेंटरों में 5282 नशे के मामले दर्ज हुए।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ पुलिस की चौतरफा घेराबंदी और ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच नशा तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए अपना पैंतरा बदल लिया है। सख्ती से घबराए तस्कर अब हेरोइन और चरस की जगह दर्द और अन्य गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवा की तस्करी कर रहे हैं, जिसे स्थानीय स्तर पर टापाल जैसे कोड नेम से युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार जांच में सामने आया है कि नशे के लिए 'ट्रामाडोल' और 'टैपेंटाडोल' जैसी दवा का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ये दवाएं सामान्य तौर पर तेज दर्द और कुछ गंभीर स्थितियों में डाक्टरों की सलाह पर दी जाती हैं, नशे के आदी लोग इन्हें बड़ी मात्रा में लेने लगे हैं। यही बदलाव अब पुलिस और डाक्टरों के लिए नई चिंता बन गया है।

कश्मीर के 5 एटीएफ सेंटरों में 5282 मामले

कश्मीर के पांच एडिक्शन ट्रीटमेंट फेसेलाइटिस (एटीएफ) सेंटरों में ही 5,282 नशे से जुड़े मामले सामने आए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो हेरोइन के बजाय फार्मा ड्रग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुलगाम के एटीएफ सेंटर में अकेले 1,951 मामले दर्ज किए गए हैं।

डाक्टरों के अनुसार, कई मरीज पहले हेरोइन लेते थे, लेकिन अब फार्मा ड्रग्स की तरफ चले गए हैं। नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत पुलिस अब तक 2,19,425 नशीले टैबलेट और कैप्सूल तथा 3.830 किलो कोडीन वाला सिरप बरामद कर चुकी है। वहीं, केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में करीब 5.4 लाख लोग ओपियाड की लत से जूझ रहे हैं।

बच्चों तक पहुंचा दूसरा नशा

इस पूरे बदलाव का सबसे डरावना पहलू यह है कि इसकी चपेट में बच्चे और किशोर भी आ रहे हैं। जांच के अनुसार एसएमएचएस के नशा मुक्ति केंद्र में 10 से 18 साल की उम्र के 1,900 से अधिक बच्चे ‘दूसरे नशे’ के लिए पहुंचे हैं।

डाक्टरों के अुनसार इनमें ट्रामाडोल, टैपेंटाडोल और प्रीगाबालिन जैसी दवा का इस्तेमाल सामने आया है। विशेषज्ञों के लिए चिंता की बात यह है कि कई बच्चे इन गोलियों को नशा मानते ही नहीं। यही गलतफहमी उन्हें धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में ले जा रही है।

हेरोइन महंगी, फार्मा ड्रग्स आसान

इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइन्सेस श्रीनगर के एचओडी डा. अरशद हुसैन ने बताया कि हेरोइन महंगी होने और पुलिस की कार्रवाई के कारण इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके मुकाबले फार्मा ड्रग्स सस्ती, छोटी और छिपाकर ले जाना आसान हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 37 प्रतिशत युवा इन्हें दोस्तों के जरिए और 35 प्रतिशत सीधे केमिस्ट से हासिल कर रहे हैं। सरकार जम्मू-कश्मीर में 21 एटीएफ और 12 एनजीओ केंद्रों के जरिए नशे के इलाज और पुनर्वास पर काम कर रही है।

वहीं डीजीपी अनिल प्रभात के अनुसार 11 अप्रैल 2026 को शुरू हुए नशा मुक्त अभियान के बाद 3,257 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए जबकि 4000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं हैं। 288 संपत्तियां जब्त की गईं हैं।