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हर 10 मिनट में नया केस, जम्मू-कश्मीर में कुत्तों के काटने के मामले बढ़े; रैबीज से 18 मौतों ने चिंता बढ़ाई

Published: Mon, 28 Sep 2026 02:35 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, पिछले 4 वर्षों में 1.6 लाख से अधिक मामले ...और पढ़ें

बीते तीन वषों में रैबीज के कारण जम्मू-कश्मीर में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। (फाइल फोटो)

बीते तीन वषों में रैबीज के कारण जम्मू-कश्मीर में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर में चार वर्षों में 1.6 लाख से अधिक कुत्ते काटने के मामले।

  2. तीन वर्षों में रैबीज से 18 लोगों की मौत, झाड़-फूंक पर विश्वास मुख्य कारण।

  3. आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और एबीसी कार्यक्रम की विफलता बड़ी चिंता।

रोहित जंडियाल, जम्मू। सरकार के तमाम दावों के बावजूद जम्मू-कश्मीर में कुत्तों के काटने के मामले हर वर्ष बढ़ते जा रहे हैं।आलम यह है कि औसतन हर दस मिनट में अस्पतालों में कुत्तों के काटने का कोई न कोई मामला पहुंचा होता है। चिंताजनक बात यह है कि बीते तीन वषों में रैबीज के कारण जम्मू-कश्मीर में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। इसका बड़ा कारण समय पर इलाज करवाने के स्थान पर झाड़ फुंक पर विश्वास करना है।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते चार वर्ष में जम्मू-कश्मीर में कुत्तों के काटने के एक लाख साठ हजार से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। वर्ष 2022 में जहां 22,110 मामले दर्ज हुए, वहीं वर्ष 2023 में 34664, वर्ष 2024 में 51027 और वर्ष 2025 में 55312 मामले दर्ज हुए।

इस वर्ष भी अभी तक 35 हजार से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।जम्मू जिले में सबसे अधिक मामले दर्ज होते हैं। सिर्फ जीएमसी जम्मू में ही हर वर्ष चार से पांच हजार लोग जानवरों के काटने के बाद इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं।

जागरूकता तो बढ़ी पर अभी भी झाड़ फुंक पर विश्वास

डाक्टरों का कहना है कि कुत्तों के काटने के बाद इलाज करवाने को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है मगर कई लोग अभी भी झाड़ फूंक पर विश्वास करते हैं और इन्हीं लोगों की रैबीज के कारण मौत होती है। आंकड़ों के अनुसार बीते तीन वर्ष में रैबीज के कारण जम्मू और बडगाम जिलों में तीन-तीन लोगों की माैत हुई जबकि रामबन और रियासी में दो-दो,उधमपुर में एक,बारामुला में दो, डोडा में एक, कुपवाड़ा में एक, पुलवामा में एक और सांबा में दो लोगों की मौत हुई।

डॉ. हरजीत राय का कहना है अगर किसी को कुत्ता काटता है और वह 24 घंटे के भीतर वैक्सीन और सीरम न ले तो उसमें रैबीज की आशंका हो जाती है। रैबीज उन्हीं को होता है जो अपना इलाज नहीं करवाते। अगर रैबीज हो जाए तो मरीज के बचने की संभावना न बराबर रहती है।

जानवर के काटने के 10 दिन से लेकर छह महीने तक सबसे अधिक खतरा रहता है। अगर कुत्ता काटता है तो जख्म को उसी समय बहते हुए पानी में साबुन से दस मिनट तक साफ करें। इससे 80 प्रतिशत संक्रमण दूर हो जाए

कुत्ते के काटने पर तुरंत अस्पताल जाएं

डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि अगर किसी को कोई भी कुत्ता काटता है तो पीड़ित को तुरंत अस्पताल में जाकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगावाएं।पीड़ित समय पर पूरा इलाज करवाने से पूरी तरह से ठीक हो जाता है। बहुत से लोग कई बार खरोंच देखकर उपेक्षा कर देते हैं लेकिन ऐसे लोगों को भी इलाज करवाने की जरूरत है। अगर घर में रखे कुत्ते को वैक्सीन दी है तो भी अगर वे काटता है तो इलाज करवाना चाहिए।

कुत्तों से खाैफ

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के 2019 के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में प्रति 1000 लोगों पर 22.9 कुत्ते हैं जो कि ूदेश में दूसरे स्थान पर है। कुछ दिन पहले विधानसभा में पेश हुए आंकड़ों के अनुसार श्रीनगर नगर निगम क्षेत्र में 64416 आवारा कुत्ते होने का अनुमान है जबकि जम्मू नगर निगम के क्षेत्र में 52 हजार कुत्ते हैं। इन दो शहरों में ही सबसे अधिक मामले हैं।यहां पर सुबह और शाम के समय अधिक मामले आते हैं।

प्रभावी तरीके से लागू हो कार्यक्रम

पशुपालन विभाग से सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डा. भारत भूषण ने बताया कि एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम के प्रभावी तरीके से लागू न होने के कारण ही कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी जम्मू में रुपनगर में एक ही जगह पर इसकी सुविधा बनाई गई है।

सरकार को चाहिए कि वे इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए कई जगहों पर सुविधा तैयार करे। यही नहीं खुले कूड़े के ढेर आवारा कुत्तों की आबादी में वृद्धि का मुख्य कारण बन गए हैं। जहां भी भोजन आसानी से उपलब्ध होता है, कुत्ते वहां इकट्ठा होते हैं, तेजी से प्रजनन करते हैं और जीवित रहते हैं।इस पर भी काम होना चाहिए।