जम्मू-कश्मीर विवादित किताब का सच फाइल में कैद, चयन समिति की बैठक के मिनट्स खोलेगा पूरे खेल का राज
सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में विवादित पुस्तक मिलने के मामले में जांच अब पुस्तक चयन समिति की बैठक के मिनट्स पर केंद्रित हो गई है।

जम्मू-कश्मीर विवादित किताब, चयन समिति के मिनट्स से खुलेगा पूरा राज।
HighLights
विवादित पुस्तक मामले में जांच मिनट्स पर केंद्रित।
चयन समिति की बैठक के विवरण की पड़ताल।
पुस्तक चयन प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय होगी।
जागरण संवाददाता, जम्मू। सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंची विवादित पुस्तक के मामले में जांच अब एक ऐसे दस्तावेज पर आकर टिक गई है, जो पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ कर सकता है। यह दस्तावेज है पुस्तक चयन समिति की बैठक की मिनट्स (कार्यवाही विवरण)। काउंटर इंटेलिजेंस (सीआइ) की नजर अब इसी पर है कि आखिर पुस्तक को लाइब्रेरी योजना में शामिल करने का फैसला कैसे और किन आधारों पर लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, सीआइ के जांच के घेरे में चयन समिति की मिनट्स आ गई है, जो कई अहम सवालों के जवाब मिल स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।मिनट्स से पता चलेगा कि क्या समिति के सदस्यों के सामने पुस्तक का पूरा मसौदा रखा गया था या केवल प्रकाशक की सूची के आधार पर मंजूरी दे दी गई। क्या किताब के हर अध्याय की समीक्षा हुई थी या बिना विस्तृत जांच के उसे खरीद सूची में शामिल कर लिया गया।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही हैं कि बैठक के दौरान किसी सदस्य ने पुस्तक की सामग्री पर कोई आपत्ति जताई थी या नहीं। यदि किसी सदस्य ने असहमति दर्ज कराई थी तो क्या उसे कार्यवाही में दर्ज किया गया और अगर किसी ने सवाल नहीं उठाए, तो क्या समिति ने पुस्तक की सामग्री का पर्याप्त परीक्षण किया था।
बढ़ सकता है जांच का दायरा
इन सवालों के जवाब मिनट्स से मिल सकते हैं।वहीं जांच का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चयन समिति ने पुस्तक का मूल्यांकन खुद किया था या किसी विशेषज्ञ अथवा बाहरी समिति की सिफारिश पर फैसला लिया गया। यदि कार्यवाही में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता, तो यह भी जांच का विषय बनेगा कि सामग्री की जांच आखिर किस स्तर पर हुई।सूत्रों का कहना है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में बैठक की मिनट्स महज औपचारिक दस्तावेज नहीं होतीं।
इनमें दर्ज टिप्पणियां, संस्तुतियां और निर्णय यह तय करते हैं कि किस अधिकारी ने क्या भूमिका निभाई और जिम्मेदारी किसकी बनती है। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए यह दस्तावेज पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है।बताया जा रहा है कि मिनट्स का मिलान टेंडर फाइल, खरीद प्रस्ताव, स्वीकृति नोटशीट, सप्लाई आर्डर और भुगतान संबंधी रिकार्ड से भी किया जाएगा। यदि इन दस्तावेजों में कोई विरोधाभास सामने आता है, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
