'पूर्ण राज्य का दर्जा' प्रस्ताव पर BJP का हंगामा, सुनील शर्मा ने आर्टिकल 370 पर जताई कड़ा ऐतराज
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर भाजपा ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य के दर्जे पर सियासी संग्राम।
HighLights
भाजपा ने जम्मू-कश्मीर राज्य के दर्जे के प्रस्ताव पर विरोध किया
सुनील शर्मा ने 1953 पूर्व स्थिति, अनुच्छेद 370 का संदर्भ अस्वीकारा
भाजपा रचनात्मक चर्चा को तैयार, पर कुछ संदर्भों पर आपत्ति
नवीन नवाज, जम्मू। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) बहाल करने से जुड़े प्रस्ताव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने प्रस्ताव की भाषा और संदर्भों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सदन के वेल में बैठकर विरोध प्रदर्शन किया।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) सुनील शर्मा ने स्पष्ट किया कि भाजपा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन इसमें 1953 से पहले की संवैधानिक स्थिति, वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और अनुच्छेद 370 के संदर्भों को शामिल किया जाना भारत के संवैधानिक ढांचे के तहत पार्टी को कतई स्वीकार्य नहीं है।
राज्य के दर्जे पर बहस सकारात्मक होनी चाहिए
नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सदन में अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए सकारात्मक संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा- राज्य के दर्जे पर बहस सकारात्मक होनी चाहिए, लेकिन 1953 से पहले की स्थिति का संदर्भ स्वीकार्य नहीं।
उन्होंने कहा राज्य के दर्जे पर रचनात्मक चर्चा के लिए भाजपा तैयार। शर्मा ने प्रस्ताव की भाषा और संदर्भों पर आपत्ति जताई। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने सोमवार को कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा की आवश्यकता है।
हर मुद्दे पर विरोध जरूरी नहीं
विधानसभा में बोलते हुए शर्मा ने कहा कि विपक्ष के लिए हर मुद्दे पर विरोध करना आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा भी विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर रचनात्मक चर्चा के पक्ष में है।
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शर्मा ने कहा, “कई बार किसी मुद्दे पर आम सहमति बनाना बहुत कठिन होता है। यह जरूरी नहीं है कि हम हमेशा विपक्ष की बात का समर्थन करें। हम यहां सकारात्मक चर्चा चाहते हैं, खासकर जब राज्य के दर्जे की बात आती है।”
2000 में पारित स्वायत्तता प्रस्ताव का किया उल्लेख
शर्मा ने वर्ष 2000 में पारित स्वायत्तता प्रस्ताव का भी उल्लेख किया और कहा कि जब यह प्रस्ताव विधानसभा के समक्ष लाया गया था, तब भाजपा ने इसे खारिज किया था। उन्होंने वर्तमान राज्य के दर्जे से संबंधित प्रस्ताव में उस प्रस्ताव के संदर्भ को शामिल किए जाने पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर आधारित है और प्रस्ताव में शामिल किए गए संदर्भ उनकी पार्टी को स्वीकार्य नहीं हैं। भाजपा का कहना है कि वह जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने पर चर्चा में भाग लेने के लिए तैयार है, लेकिन वह अनुच्छेद 370 और वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को इस बहस में शामिल किए जाने का विरोध करती है।
