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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाली प्रस्ताव पर गरमाई सियासत

Published: Mon, 28 Sep 2026 03:01 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर सोमवार को तीखी बहस और हंगामे की संभावना है। ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव को लेकर हंगामे के आसार हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शुक्रवार

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव को लेकर हंगामे के आसार हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शुक्रवार

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाली प्रस्ताव पर हंगामा।

  2. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पेश किया राज्य का दर्जा प्रस्ताव।

  3. भाजपा ने किया विरोध, 1953 पूर्व व्यवस्था बहाली का आरोप।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव को लेकर हंगामे के आसार हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शुक्रवार को पेश किए गए प्रस्ताव के विरोध में विपक्षी भाजपा के प्रदर्शन के बीच सदन में तीखी बहस होने की संभावना है।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था। प्रस्ताव पेश होते ही भाजपा विधायकों ने जोरदार विरोध किया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

भाजपा ने इस प्रस्ताव को लेकर नेशनल कान्फ्रेंस सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि प्रस्ताव के जरिए 1953 से पहले की संवैधानिक व्यवस्था और अधिक स्वायत्तता से जुड़े पुराने मुद्दों को फिर से उठाने का प्रयास किया जा रहा है।

पुराने प्रस्ताव पहले ही सदन की संपत्ति

वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव केवल जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर मतदान के लिए लाया गया है। उन्होंने भाजपा पर मतदान से बचने के लिए सदन में हंगामा करने का आरोप लगाया। अब्दुल्ला ने कहा कि विधानसभा से अनुच्छेद 370, विशेष दर्जे या अधिक स्वायत्तता के मुद्दे पर मतदान नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन विषयों से संबंधित पुराने प्रस्ताव पहले ही सदन की संपत्ति हैं।

उन्होंने भाजपा के इस आरोप को भी खारिज किया कि मौजूदा प्रस्ताव राष्ट्र विरोधी है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से प्रस्ताव में ऐसी किसी भी भाषा की ओर इशारा करने को कहा, जो संविधान के खिलाफ हो।

वर्ष 2000 में तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जम्मू-कश्मीर की 9 अगस्त 1953 से पहले की स्थिति के अनुरूप अधिक स्वायत्तता बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव विधानसभा में पारित कराया था। इसके अलावा, 6 नवंबर 2024 को विधानसभा ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था।

जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की प्रतिबद्धता जताई

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन किया है। पीपुल्स कान्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी नेशनल कान्फ्रेंस के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य का दर्जा कोई खैरात नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का अधिकार है। दूसरी ओर, भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा ने नेशनल कान्फ्रेंस-कांग्रेस सरकार पर संवैधानिक दायरे को पार करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन मौजूदा प्रस्ताव का उद्देश्य केवल राज्य का दर्जा बहाल करना नहीं है।सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर तीखी नोकझोंक और हंगामे के आसार हैं।