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जम्मू-कश्मीर में 600 करोड़ का निवेश क्यों अटका? एक कपंनी ने लौटाई जमीन, दूसरी ने खींचे हाथ; 1300 नौकरियां प्रभावित 

Published: Thu, 24 Sep 2026 01:21 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को बड़ा झटका लगा है, जहां हल्दीराम स्नैक्स ने आवंटित जमीन वापस कर दी और यिडा ...और पढ़ें

जम्मू कश्मीर में 600 करोड़ का निवेश अटका, हल्दीराम ने लौटाई जमीन। (फाइल फोटो)

जम्मू कश्मीर में 600 करोड़ का निवेश अटका, हल्दीराम ने लौटाई जमीन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर में 600 करोड़ के दो निवेश प्रस्ताव अटके।

  2. हल्दीराम ने जमीन लौटाई, यिडा केमिकल्स ने प्रस्ताव छोड़ा।

  3. औद्योगिक जमीन आवंटन और खाली प्लॉटों पर सवाल।

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच करीब 600 करोड़ रुपये के दो बड़े निवेश प्रस्ताव वास्तविकता नहीं बन पाए हैं। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के विधानसभा में दिए लिखित जवाब से सामने आया है कि हल्दीराम स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड ने आवंटित जमीन वापस कर दी जबकि यिडा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड अपने प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ा सकी।

दोनों परियोजनाओं से कुल 1300 लोगों को रोजगार मिलने का प्रस्ताव था। विभाग के अनुसार 27 दिसंबर 2021 को हल्दीराम स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 300 करोड़ रुपये के निवेश और एक हजार लोगों को रोजगार देने का एमओयू हुआ था। एमओयू के बाद कंपनी को जमीन भी आवंटित की गई लेकिन बाद में कंपनी ने यह जमीन सरेंडर कर दी।

इसी तरह 2024 के 10वें वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के दौरान यिडा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 300 करोड़ रुपये के निवेश और 300 रोजगार का प्रस्तावित एमओयू हुआ था। हालांकि कंपनी ने इस प्रस्ताव पर आगे काम नहीं किया।

11,800 कनाल की मांग

विधानसभा में दिए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान 17 स्थानों पर औद्योगिक एस्टेट स्थापित करने के लिए करीब 11,800 कनाल जमीन की मांग रखी गई थी जबकि अब तक लगभग 8205 कनाल जमीन ही ट्रांसफर की गई है। दूसरी ओर कई नए औद्योगिक एस्टेट में प्लाट खाली पड़े होने की बात भी सामने आई है।

कुछ एस्टेट में अभी तक एक भी प्लाट आवंटित नहीं हुआ है। इससे औद्योगिक जमीन की मांग, उपलब्धता और वास्तविक आवंटन के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जम्मू में 717 इकाइयों को जमीन का इंतजार

सरकार के मुताबिक 31 जनवरी 2026 तक जम्मू-कश्मीर सिंगल विंडो पर 6280 पूर्ण आवेदनों के मामले उपलब्ध थे। इनमें जम्मू संभाग से 1181 और कश्मीर संभाग से 5099 आवेदन शामिल हैं। जम्मू संभाग में 464 इकाइयों का भूमि आवंटन पूरा हो चुका है, जिसके लिए 2451 कनाल जमीन आवंटित की गई। वहीं 717 इकाइयों को उपलब्ध जमीन समाप्त होने के कारण भूमि आवंटित नहीं की जा सकी।

ऐसे में एक अहम सवाल यह है कि यदि बड़ी संख्या में उद्यमियों को जमीन की कमी के कारण प्लाट नहीं मिल पा रहे हैं, तो दूसरी ओर कई नए औद्योगिक एस्टेट में प्लाट खाली क्यों हैं। आंकड़े औद्योगिक जमीन की मांग, भूमि हस्तांतरण, विकसित प्लाटों की उपलब्धता और लंबित आवेदनों के बीच समन्वय की आवश्यकता को उजागर करते हैं।

निवेश के लिए कई प्रोत्साहन

सरकार ने बताया कि जेएंडके इंडस्ट्रियल पालिसी 2021-30 वर्तमान में लागू है और पात्र औद्योगिक इकाइयों को विभिन्न प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इनमें 10 किलोवाट से 2000 किलोवाट क्षमता वाले डीजी सेट की खरीद एवं स्थापना पर 100 प्रतिशत सब्सिडी, जोन-ए में अधिकतम 40 लाख और जोन-बी में 45 लाख रुपये तक की सीमा, आटोमेशन पर 30 प्रतिशत सब्सिडी अधिकतम दो लाख रुपये तक तथा प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी शामिल है।

इसके अलावा मौजूदा माइक्रो इकाइयों को पांच वर्षों तक तीन प्रतिशत टर्नओवर इंसेंटिव, अधिकतम दस लाख रुपये सालाना तथा मौजूदा छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों को पांच वर्षों तक दो प्रतिशत टर्नओवर इंसेंटिव, अधिकतम 50 लाख रुपये सालाना तक देने का प्रविधान है।

एनसीएसएस का विस्तार न होने से पड़ रहा असर

प्रदेश में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों के लिए न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम(एनसीएसएस) के तहत 28,400 करोड़ रुपये के पैकेज को विस्तार न दिए जाने का प्रदेश में निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2021 में घोषित न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम का लाभ समाप्त होने के बाद से प्रदेश में थमे औद्योगिक निवेश को फिर गति मिल सके, इसके लिए जरूरी था कि पैकेज को विस्तार मिले।

सितंबर 2024 में वित्तीय पैकेज का लाभ आवंटित होने के साथ ही इस स्कीम को बंद कर दिया गया जिसके बाद से नया निवेश थम गया। इस निवेश को जारी रखने के लिए पिछले साल जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28,400 करोड़ रुपये के पैकेज को बढ़ाकर 75 हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था लेकिन केंद्र सरकार ने 28,400 करोड़ के पैकेज के तहत मिले निवेश प्रस्ताव व वास्तविकता में हुए निवेश के बाद शेष बचे 5630.75 करोड़ का लाभ ही आगे बढ़ाया।

एनसीएसएस के तहत जम्मू-कश्मीर में उद्योग लगाने पर कैपिटल इन्वेस्टमेंट इंसेंटिव, कैपिटल इंटरेस्ट सबवेंशन, जीएसटी-लिंक्ड इंसेंटिव और वर्किंग कैपिटल इंटरेस्ट सबवेंशन का लाभ मिलता हैं। इस योजना को पहली अप्रैल 2021 को शुरू किया गया था और यह वर्ष 2037 तक लागू रहेगी।