जम्मू, राहुल शर्मा। एनआइए ने आज मंगलवार को जम्मू-कश्मीर एनआइए की विशेष अदालत में यह खुलासा किया कि पुलवामा हमला पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नेतृत्व में रची गई एक सुनियोजित साजिश का परिणाम था। इस हमले का मास्टर माइंड जैश सरगना मसूद अजहर और उसका छोटे भाई थे। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि JeM इस तरह विस्फोटकों के साथ हमले करने की रणनीति सिखाने के लिए अपने कैडरों को अफगानिस्तान में अल-कायदा-तालिबान-JeM और हक्कानी-JeM के आतंकी शिविरों में प्रशिक्षण के लिए भेजते रहे हैं।

सीआरपीएफ के काफिले पर गत फरवरी 2019 में हुए फिदायीन हमले में एनआइए ने 19 अभियुक्तों के शामिल होने की बात कहते हुए 13800 पृष्ठों की चार्जशीट दायर की। एनआइए ने अपनी चार्जशीट में जिन 19 अभियुक्तों को पुलवामा हमले का जिम्मेदार ठहराया है, उनमें जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर सबसे पहले है। उसके अलावा रॉउफ असगर (47) पाकिस्तानी नागरिक (फरार), अम्मार अल्वी (46) पाकिस्तानी नागरिक (फरार), शाकिर बशीर (24) काकापोरा, पुलवामा (गिरफ्तार), इंशा जान (22) काकापोरा, पुलवामा (गिरफ्तार), पीर तारिक अहमद शाह (53) काकापोरा, पुलवामा (गिरफ्तार), वाज-उल-इस्लाम (20) श्रीनगर (गिरफ्तार), मोहम्मद अब्बास राथर (31) काकापुरा, पुलवामा (गिरफ्तार), बिलाल अहमद कुचे (28) हाजीबल, लालहर, पुलवामा (गिरफ्तार), मोहम्मद इकबाल राथर (25) चारार-ए-शरीफ, बडगाम (गिरफ्तार), मोहम्मद इस्माइल (25) पाकिस्तानी नागरिक (फरार), समीर अहमद डार (22) काकापोरा, पुलवामा (मारा गया), आशाक अहमद नेंग्रू (33) राजपुरा, पुलवामा (फरार), आदिल अहमद डार (21) काकापोरा, पुलवामा (मारा गया), मोहम्मद उमर फारूक (24) पाकिस्तानी नागरिक (मारा गया), मोहम्मद कामरान अली (25) पाकिस्तानी नागरिक (मारा गया), सज्जाद अहमद भट (19) बिजबेहेरा, अनंतनाग (मारा गया), मुदसिर अहमद खान (24) अवंतीपुरा, पुलवामा (मारा गया), कारी यासिर, पाकिस्तानी नागरिक (मारा गया) शामिल थे।

एनआइए सूत्रों से यह बात भी सामने आई है कि पुलवामा के बाद भी जैश ने इस तरह के और कई हमले करने की रणनीति बनाई हुई थी। परंतु उसे इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि एक हमले के बाद भारत सरकार इस तरह कड़ा रूख अपनाएगी और जवाब में बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक होगी। भारत की जवाबी कार्रवाई ने जैश-ए-मोहम्मद के मंसूबों पर पानी फेर दिया। सर्जिकल स्ट्राइक के कारण जहां पाकिस्तान सीमा के भीतर चल रहे उनके शिविरों को ध्वस्त कर दिया गया वहीं भारत सहित अन्य देशों के पाकिस्तान सरकार पर बढ़ते दबाव की वजह से संगठन के प्रमुख सरगना मौलाना मसूद अजहर को भूमिगत होना पड़ा।

इन आतंकवादी संगठनों को बाहर से मदद पहुंचा रही पाकिस्तान सरकार व उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने भी अजहर पर यह दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह कुछ दिन शांत रहे। वहीं भारत सरकार ने बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया। उसकी का नतीजा है कि आज कश्मीर में आतंकवादी संगठनों की कमर टूट चुकी है। डीजीपी पुलिस दिलबाग सिंह ने भी गत दिनों यह बयान दिया था कि कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों लगभग सभी कमांडर ढेर हो चुके हैं। इसी साल घाटी में 150 से अधिक आतंकवादी मारे गए जिनमें 26 के करीब टॉप कमांडर शामिल थे।

यही नहीं जो आतंकवादी रह गए हैं, उनके पास भी हथियारों की कमी हो गई है। इन आतंकवादियों तक हथियार पहुंचाने के लिए पाकिस्तान अब ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। भारतीय जवानों के साथ-साथ सीमा प्रहरियों की सतर्कता ने घुसपैठ में भी कमी लाई है।

कैसे हुआ था पुलवामा आत्मघाती हमला: आपको जानकारी हो कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। यह हमला श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोर के पास लीथपोरा में हुआ। इस आत्मघाती हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। आतंकी संगठन ने एक स्थानीय नागरिक आदिल अहमद उर्फ वकास को आत्मघाती हमलावर के रूप में प्रयोग किया। आदिल ने कार बम से सीआरपीएफ के एक काफिले में शामिल बस को उड़ा दिया। घाटी में पिछले कुछ दिनों से सेना का ऑपरेशन ऑलआउट अभियान चल रहा था जिसके चलते आतंकी घटनाएं थम सी गई थी लेकिन इस आत्मघाती हमले ने यह दिखा दिया कि घाटी में अभी भी जैश-ए-मोहम्मद जिंदा है।

आतंकी संगठन आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मकसद: जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान का एक (जिहादी) आतंकी संगठन है। इसका प्रमुख उद्देश्य भारत से कश्मीर को अलग करना है। इसके अलावा यह संगठन पश्चिमी देशों में भी आतंक फैलाने का काम करता है। इस संगठन की स्थापना पाकिस्तान के पंजाब के मौलाना मसूद अजहर ने साल 2000 के मार्च महीने में की थी। आपको बता दें कि साल 1999 में कंधार विमान अपहरण में भी इसी संगठन के नेता मौलाना मसूद अज़हर को छुड़ाने के लिए किया गया था। जिसके बाद अजहर ने इस आतंकी संगठन की नींव रखी। इस आतंकी संगठन में हरकत-उल-अंसार और हरकत-उल-मुजाहिदीन के कई आतंकी शामिल हैं। इस संगठन का मुखिया मौलाना मसूद अज़हर खुद भी हरकत-उल-अंसार का महासचिव रह चुका था।

भारत में कई हमले करवा चुका है यह आतंकी संगठन: इस संगठन को भारत में हुए कई आतंकी हमलों का जिम्मेदार माना जाता है। साल 2002 जनवरी में पाकिस्तान ने भी इसे आतंकी संगठन बताकर बैन कर दिया था जिसके बाद इस संगठन ने अपना नाम बदलकर 'ख़ुद्दाम उल-इस्लाम' कर लिया था। यह संगठन भारत, अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा जारी आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल है। इस अपहरण कांड में भारत ने अजहर के साथ दो और आतंकी संगठन के मुखिया को छोड़ा था।

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियां

  • आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के लिए आत्मघाती हमले करना सबसे पसंदीदा तरीका है। संगठन के मुखिया मौलाना मसूद अज़हर कट्टरपंथी विचारों वाले संदेश सोशल मीडिया और सीडी, डीवीड के द्वारा कश्मीर की घाटी में भेजकर युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
  • जैश-ए-मोहम्मद का मतलब होता है 'मुहम्मद की सेना'। इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद को धरती पर अल्लाह का आखिरी पैगंबर माना जाता है। लेकिन यह एक आतंकी संगठन है जिसे भारत समेत कुछ पश्चिमी देशों में आतंक फैलाने के लिए किया जा रहा है।
  • यह खतरनाक आतंकी संगठन कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए बनाया गया है। घाटी में इस संगठन ने कई बार हमले किए यह संगठन पीओके से ऑपरेट होता है। जैश-ए-मोहम्मद कश्मीर के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से है।
  • पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने साल 2002 से इस आतंकी संगठन को प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा इस संगठन को ऑस्ट्रेलिया, यूएई, कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र भी इसे आतंकी संगठन मानते हैं।
  • पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मौलाना मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन का तैयार किया आपको बता दें कि अजहर वही आतंकी है जिसे अटल सरकार में कंधार विमान अपहरण के बाद भारत से छुड़ाया गया था।
  • सूत्रों की मानें तो इस आतंकी संगठन के निर्माण में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ढ्ढस्ढ्ढ अफगानिस्तान का तालिबान, ओसामा बिन लादेन और पाकिस्तान के कई सुन्नी संगठनों ने मदद की।
  • दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले में भी इसी आतंकी संगठन (जैश-ए-मोहम्मद) का हाथ था। इस मामले में प्रोफेसर अफजल गुरु समेत चार आतंकियों को गिरफ्तार किया गया। और अफजल को फांसी की सजा दी गई।
  • इस संगठन (जैश-ए-मोहम्मद) की हाफिज सईद के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से भी अच्छी दोस्ती रही है 2001 में भारतीय संसद हमले को दोनों संगठनों ने मिलकर अंजाम दिया था।
  • इसी संगठन ने साल 2002 फरवरी में पाकिस्तान की राजधानी कराची में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल का अपहरण करके हत्या कर दी थी।
  • साल 2009 में पुलिस ने इस आतंकी संगठन (जैश-ए-मोहम्मद) के 4 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया था। ये आतंकी न्यूयॉर्क में बम धमाके और अमेरिकी वायुसेना पर हमले की साजिश रच रहे थे।

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