जम्मू, राज्य ब्यूरो। जम्मू विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली कोई बाडी नहीं है। काफी जद्दोजहद के बाद साल 2017 में जम्मू विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार अप्रत्यक्ष रूप से स्टूडेंट यूनियन के चुनाव करवाए गए थे, लेकिन कुछ छात्रों के न्यायालय चले जाने के बाद नतीजों पर रोक लग गई। इससे छात्रों और स्कॉलरों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई बॉडी नहीं है।

स्टूडेंट यूनियन का चुनाव नहीं होने के कारण गुस्साए छात्रों और उनके संगठनों ने स्टूडेंट कल्चरल काउंसिल के चुनाव भी नहीं होने दिए। विद्यार्थी साफ तौर पर कह चुके हैं कि जम्मू विवि में जब तक स्टूडेंट यूनियन के चुनाव नहीं हो जाते, तब तक कल्चरल काउंसिल के चुनाव भी नहीं होने दिए जाएंगे। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन भी पसोपेश में है।

पहला सेमेस्टर बीत चुका है। दूसरा सेमेस्टर शुरु होने वाला है। ऐसे में स्टूडेंट कल्चरल काउंसिल का गठन न होना सांस्कृतिक गतिविधियों को धक्का पहुंचाने जैसा है। काउंसिल के एक सचिव और तीन संयुक्त सचिव चुने जाते हैं। विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन में काउंसिल की भूमिका अहम रहती है। जनवरी में दूसरा सेमेस्टर शुरु हो जाएगा, लेकिन इस बार काउंसिल नहीं बन सकी। स्टूडेंट यूनियन के चुनाव के लिए छात्र संगठन अब फिर से सक्रिय होने लगे हैं।

2014 के बाद नहीं हुए जुरसिया के चुनाव

जम्मू विवि में पहले स्कालरों का प्रतिनिधित्व करने वाली बाडी जम्मू यूनिवर्सिटी रिसर्च स्कालर एग्जिक्यूटिव एसोसिएशन (जुरसिया) हुआ करती थी। इसके लिए चुनाव होते थे, जिसमें सभी विभागों के पंजीकृत स्कालर प्रतिनिधित्व करते थे। साल 2014 में अंतिम बार जुरसिया के चुनाव हुए थे। उसके बाद विवि प्रबंधन ने जुरसिया के चुनाव भी नहीं करवाए। हालांकि विद्यार्थी बाद में मांग उठाते रहे कि सिर्फ स्टूडेंट यूनियन के चुनाव ही ओपन तरीके से करवाए जाएं, जिस तरह से दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों में करवाए जाते है। लेकिन विवि प्रबंधन ने जोखिम उठाने की हिम्मत नहीं की।

जल्द चुनाव न कराने पर आंदोलन की चेतावनी

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सचिव दीपक गुप्ता ने कहा कि स्टूडेंट यूनियन के चुनाव बिना देरी के करवाए जाने चाहिए। यूनियन के चुनाव न होने से विद्यार्थी अपनी समस्याओं को उचित मंच पर सही तरीके से उठा नहीं पा रहे हैं। इसलिए परिषद ने कल्चरल काउंसिल चुनावों का विरोध किया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि यूनियन के चुनाव जल्द नहीं करवाए गए तो आंदोलन चलाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। वहीं नेशनल स्टूडेंट यूनियन आफ इंडिया (एनएसयूआई) के प्रदेश प्रधान रकीक खान ने कहा कि अगर देश के अन्य भागों के विश्वविद्यालयों में ओपन चुनाव हो सकते हैं तो यहां क्या समस्या है? यह सत्र भी आधा बीत चुका है, लेकिन कुछ नहीं हुआ है।

  • मामला न्यायालय में होने के कारण स्टूडेंट यूनियन के चुनाव नहीं हो पाए। विश्वविद्यालय प्रबंधन कानूनी सलाह ले रहा है। कोशिश होगी कि स्टूडेंट यूनियन और कल्चरल काउंसिल के चुनाव जल्द करा दिए जाएं। - प्रो. जसबीर सिंह, डीन, जम्मू विवि 

Posted By: Rahul Sharma

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