ये जम्मू है सरकार, यहां के आंसू क्यों नहीं दिखते? शिव मार्केट अग्निकांड पीड़ितों तक दो दिन बाद भी नहीं पहुंचे CM
जम्मू के शिव मार्केट अग्निकांड में करोड़ों का नुकसान झेल रहे दुकानदार सरकार से मुआवजे और मदद की उम्मीद कर ...और पढ़ें

जम्मू में 30 दुकानें स्वाहा, 2 दिन बीतने पर भी मिलने नहीं पहुंचे CM। (फाइल फोटो)
HighLights
शिव मार्केट अग्निकांड में दुकानदारों को करोड़ों का नुकसान।
मुख्यमंत्री दो दिन बाद भी पीड़ितों से मिलने नहीं पहुंचे।
दुकानदार मुआवजे और सरकारी मदद की मांग कर रहे हैं।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू के शिव मार्केट में आग ने दुकानदारों की वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी को राख कर दिया। किसी की दुकान छिन गई तो किसी के परिवार की रोजी-रोटी का सहारा खत्म हो गया। आंखों के सामने सब कुछ जलकर खाक होते देखने वाले व्यापारी अब सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
उनकी मांग है कि उनके नुकसान का आकलन हो, मुआवजा मिले और उजड़े कारोबार को फिर से खड़ा करने में मदद की जाए। लेकिन दुकानदारों का आरोप है कि हादसे के दो दिन बाद भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपमुख्यमंत्री या प्रदेश सरकार का कोई मंत्री उनका दुख-दर्द बांटने नहीं पहुंचा। ऐसे में पीड़ितों के बीच यह सवाल गूंज रहा है। ये जम्मू है सरकार! यहां के लोगों के आंसू क्यों नहीं दिखते?
30 से अधिक दुकानों के जलने से करोड़ों का नुकसान
जम्मू रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित शिव मार्केट में रविवार रात लगी भीषण आग ने कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। 30 से अधिक दुकानों के जलने से व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि, दुकानदारों के मुताबिक, उन्हें अब तक ऐसी पहल का इंतजार है।
बस पर पथराव हुआ तो मुख्यमंत्री ने तुरंत जताई थी प्रतिक्रिया
शिव मार्केट के दुकानदारों और स्थानीय लोगों के बीच सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि हरियाणा में पार्किंग विवाद के दौरान कश्मीर की एक बस पर पथराव की घटना सामने आई थी तो मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तुरंत घटना की निंदा की थी। उन्होंने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से हरियाणा सरकार से कार्रवाई करने की मांग भी की थी।
इसके बाद हरियाणा पुलिस ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया था। दुकानदारों का सवाल है कि जब एक बस पर पथराव की घटना पर मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रतिक्रिया दी, तो जम्मू में इतने बड़े अग्निकांड के बाद प्रभावित व्यापारियों को राहत देने के लिए वैसी तत्परता क्यों नहीं दिखाई गई?
उनका कहना है कि यह मामला केवल दुकानों के जलने का नहीं, बल्कि उन परिवारों के भविष्य का भी है, जिनकी आजीविका पूरी तरह कारोबार पर निर्भर थी।
श्रीनगर में ऐसा होता तो अब तक सरकार पहुंच चुकी होती
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना के करीब 24 घंटे बाद इंटरनेट मीडिया पर दुख व्यक्त किया, लेकिन प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि केवल शोक जताने से उनका नुकसान पूरा नहीं होगा। उन्हें इस समय आर्थिक सहायता, नुकसान का आकलन और कारोबार दोबारा शुरू करने के लिए सरकारी मदद की जरूरत है।
पीड़ित दुकानदार अशोक कुमार का कहना है कि यदि ऐसी घटना कश्मीर संभाग, विशेषकर श्रीनगर में हुई होती, तो सरकार का पूरा तंत्र सक्रिय हो जाता और प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए कदम उठाए जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू के व्यापारियों की पीड़ा को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
