जम्मू, जागरण संवाददाता : जम्मू नगर निगम महानगरों की राह पर चलने के लिए कदमताल तो कर रहा है लेकिन अपने राजस्व स्रोत नहीं होने के कारण हमेशा ही सरकार के आगे हाथ फैलाने को मजबूर है। निगम प्रतिवर्ष करीब 25 करोड़ रुपये का राजस्व ही जुटा पाता है जबकि वार्षिक खर्च करीब 107 करोड़ रुपये है। ऐसे में निगम आत्मनिर्भर बनने से तो रहा।

हालत यह है कि वर्ष 2018 में कारपोरेटर चुने जाने के बाद निगम की स्थिति बदली तो जरूर लेकिन चार साल गुजर जाने के बाद भी निगम हर घर से कचरा उठाने में नाकाम है। फिलहाल जम्मू शहर के सभी 75 वार्डों में से सिर्फ करीब 60 प्रतिशत कचरा ही उठा जा रहा है। साफ है कि जब सुविधा ही नहीं मिलेगी तो निगम को लोग पैसे भी नहीं देंगे।

निगम प्रति घर 100 रुपये यूजर चार्ज वसूलता है जबकि छोटी दुकानों व प्रतिष्ठानों से 200 से लेकर 5000 रुपये तक वसूले जाते हैं। इस बार वर्ष 2022-23 के लिए सरकार से निगम को अभी तक 151 करोड़ रुपये मिले हैं। जम्मू नगर निगम में 75 वार्ड हैं और यह 170 किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। शहर में 120 छोटे-बड़े नाले हैं।

संस्था सिखाएगी राजस्व बढ़ाने के गुर : जम्मू नगर निगम ने आत्मनिर्भर बनने के लिए अब मुंबई की एक संस्था प्रजा फाउंडेशन के साथ एमओयू साइन किया है। इस समझौते के तहत अब संस्था निगम को राजस्व बढ़ाने के गुर सिखाएगी। संस्था विभिन्न नगर निगमों में अपनी सेवाएं देती है। पहली ही बैठक में संस्था ने निगम प्रशासन व कारपोरेटरों को सुझाव दिए हैं कि किस तरह राजस्व बढ़ाया जा सकता है। उसने जम्मू में विभिन्न फैक्टरियों में बनाई जाने वाली शराब, पीने की पानी की बोतलों पर एक से दो प्रतिशत टैक्स लगाने की सिफारिश की है। इतना ही नहीं तेल कंपनियों से भी टैक्स वसूलने के सुझाव दिए हैं।

दिल्ली अभी दूर है : बात अगर दिल्ली नगर निगम की करें तो वर्ष 2022-23 में 15276 करोड़ रुपये का बजट बनाया था जिसमें स्वच्छता के लिए 27.19 प्रतिशत यानि 4153.28 करोड़ रुपये रखे गए। वहीं जम्मू नगर निगम पहली बार अगले वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बजट बना रहा है। वो भी 331.20 करोड़ रुपये का। हालत यह है कि जम्मू नगर निगम के कर्मचारियों के वेतन का खर्च ही 12369 लाख रुपये सलाना है। यहीं बस नहीं निगम कार्यालय का खर्च ही 80 लाख रुपये सलाना है। साफ है कि निगम आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया की स्थिति में है और सरकार का मुंह ताकने को मजबूर है।

दावे तो हुए काम नहीं : निगम ने राजस्व बढ़ाने के लिए गांधीनगर के मैन स्टाप में स्थित बूचड़खाने को तोड़ यहां बहुमंजिला शापिंग कम्पलेक्स बनाने का निर्णय लिया था। यहां से बूचड़खाना तो हटा लेकिन बहुमंजिला इमारत की जगह एक फ्लैट तैयार कर पूर्व निगम अधिकारी को दे दिया गया। कोर्ट के आदेश पर इसे खाली करवाया जा चुका है। साथ ही यहां अब वार्ड आफिस बनाया गया है। ऐसे ही निगम ने नरवाल मार्ग पर स्थिति तालाब की जगह पर बहुमंजिला पार्किंग व शापिंग कम्पलेक्स बनाने का निर्णय लिया था। वर्षों गुजर जाने के बावजूद यहां कोई काम नहीं हो सका। शांपिंग कम्पलेक्स बनने से निगम का राजस्व बढ़ता लेकिन इमारत बनाने के लिए ही पैसे निगम नहीं जुटा पाया।

मौजूदा स्थिति

  • नगर निगम की कुल आमदनी : लगभग 25 करोड़
  • निगम का वार्षिक खर्च : लगभग 107 करोड़
  • कुल पद : 2643
  • स्थायी कर्मचारी : 1540
  • एनजीओ कर्मी : 1741
  • कैजुअल-कंट्रेक्चुअल : 724

राजस्व बढ़ाने के लिए कर रहे हैं काम : ‘वर्ष 2018 में जब निगम में कॉरपोरेटर चुनकर आए तो करीब दो करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया जाता था। काफी प्रयासों के बाद यूजर चार्ज, फीस, बिल्डिंग परमिशन आदि से निगम अब 25 करोड़ रुपये के करीब राजस्व जुटा रहा है। राजस्व बढ़ाने के तरीकों को अपनाने के साथ खर्चों को कम करने पर काम किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे से गमले, कूड़ेदान बनाने की तैयारी चल रही है। इतना ही नहीं घरों से कचरा उठाने से लेकर डंपिंग साइट तक पहुंचाने का काम भी निजी कंपनियों को दिया जा रहा है ताकि शत-प्रतिशत घरों से कचरा उठे और हर घर से 100 रुपये यूजर चार्ज भी आए। ऐसे ही दुकानों, प्रतिष्ठानों पर भी ध्यान केंद्रित करने के निर्देश हैं। शेष राजस्व स्रोत तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। मुंबई की संस्था भी मार्गदर्शन करेगी। किसी न किसी स्तर पर प्रापर्टी टैक्स भी शुरू करना ही पड़ेगा।’ -चंद्र मोहन गुप्ता, मेयर, जम्मू  

Edited By: Rahul Sharma