जम्मू, विवेक सिंह: जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी विभागों द्वारा, पदोन्नति, सेवा नियमों को नजरअंदाज करने से सुलग रहे सीनियर वेटरेनरी डाक्टरों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को पत्र लिख कर इंसाफ करने की मांग की है।

गत दिन पशुपालन विभाग ने आदेश जारी कर वरियता सूची में नीचे आने वाले कई वेटेनरी डाक्टरों को संयुक्त निदेशकों व उप निदेशकों के पदों की जिम्मेवारियां दे दी थी। यह कार्रवाई वरियता सूची में उपर आने वाले कई सीनियर वेटरेनरी डाक्टरों को नजरअंदाज कर की गई है। ऐसे में ट्रांसफरों के बाद उनका परेशान होना स्वाभाविक है। ऐसे में अस्थायी पदोन्नतियाें में भेदभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

सामान्य प्रशासनिक विभाग के अनुसार उच्च पदों की जिम्मेवारी उन अधिकारियों को दी जानी है जो वरिष्ठता सूची में उपर हैं। पशुपालन विभाग के 43 वेटरेनरी डाक्टरों को वरिष्ठ पदों की जिम्मेवारियां देने का सरकारी आदेश 29 अप्रैल को पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव नवीन कुमार चौधरी की ओर से जारी किया गया है। यह जिम्मेवारियां कई वरिष्ठ डाक्टरों के सेवानिवृत होने से उपजे हालात में दी गई थीं।

इन पदोन्नतियों से उपजे हालात में उपराज्यपाल को लिखे पत्र में नियमों को ताक पर रखकर जूनियर अधिकारियों को अपने वेतनमान में पदोन्नत करने के आदेश को रद करने की मांग की गई है। पत्र में लिखा है कि इस समय सबसे अधिक सीनियर व वरियता सूची में 29 नंबर पर आने वाले उप निदेशक डा कुलभूषण अबरोल को नजरअंदाज कर संयुक्त निदेशक की जिम्मेवारी नही दी गई है।

वहीं वरियता सूची में 114वें व 115वें स्थान पर आने वाले वेटरेनरी डाक्टरों को संयुक्त निदेशक की जिम्मेवारी दे दी गई। इसी तरह से वरियता सूची में 49वें स्थान पर आने वाले डा विनय कुमार व 65वें नंवबर पर आने वाले डा रमण कुमार गुप्ता को छोड़ कर वरियता सूची में 132, 134, 138, 144, 183, 186, 187, 249वें स्थान पर आने वाले डाक्टरों को उप निदेशक पदों की जिम्मेवारियां दी गईं हैं।

पत्र में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि पिछले 20 सालों से विभाग में पदोन्नति समिति की बैठक ही नही हुई है। ऐसे में पदोन्नतियां करते समय नियमों को ताक पर रखना एक आम बात हो गई है। ऐसे में अकसर ऐसी पदोन्नतियों को न्यायालय में चुनौती दे दी जाती है। इससे योग्य अधिकारी हताश हो गए हैं। खासे अधिकारी पदोन्नति का इंतजार करते हुए सेवानिवृत हो चुके हैं।

एक सीनियर वेटरेनरी डाक्टर ने जागरण को बताया कि कुछ साल पहले सामान्य प्रशासनिक विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि स्टाप गैप अरेजमेंट के तहत ऐसी पदोन्नतियां नही की जाएं जिन्हें बाद में न्यायालय में चुनौती मिलती है। उनका कहना है कि पदोन्नतियां करने वाले वरिष्ठ अधिकारी न तो सरकार के नियमों और न ही न्यायालय के निर्देशों का ही पालन कर रहे हैं। 

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