किश्तवाड़, बलवीर सिंह जम्वाल। किश्तवाड़ में फिर से आतंकवाद के फन को कुचलने के लिए पुलिस ने पूरा दम लगा दिया है। वीरवार को तीन और आतंकी मददगारों (ओजीडब्ल्यू) के आतंकी वारदातों में शामिल होने के सुबूत मिलने पर उनपर आतंकवाद फैलाने और समर्थन करने के मामले दर्ज किए हैं। कुल मिलाकर अब तक पुलिस ने 22 आतंकी मददगारों पर मामले दर्ज किए हैं। इनमें सात पर भाजपा-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेताओं की हत्या करने, पुलिस कर्मियों की राइफल छीनने और 15 पर आतंकवाद फैलाने व समर्थन करने के मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक सभी 22 आतंकी मददगार अब आतंकी श्रेणी में आते हैं।

गौरतलब है कि 13 सितंबर को पीडीपी के जिला प्रधान एडवोकेट शेख नासिर हुसैन के अंगरक्षक से राइफल छीनने के बाद ही सुरक्षा एजेंसियां सकते में आई थी कि आखिर आतंकी वारदात के बाद कहां ओझल हो जाते हैं। इसके बाद पुलिस तथा सेना ने हरकत में आते ही किश्तवाड़ शहर में तलाशी अभियान छेड़ा था। सौ से अधिक संदिग्धों को पूछताछ के आधार पर हिरासत में लिया गया। इनसे मिले सुराग के आधार पर ही चार आतंकियों को जिंदा पकड़ा। जबकि हाल ही में तीन आतंकियों को बटोत मुठभेड़ में मार गिराया था।

सूत्रों के अनुसार अभी भी तीन दर्जन संदिग्ध पुलिस हिरासत में है जिनसे पूछताछ की जा रही है। कई दिनों से हिरासत में मंजूर हुसैन कारी, फारूख अहमद और नूर हुसैन पर आतंकवाद फैलाने, समर्थन करने के अलावा सियासी नेताओं की हत्या करने के मामले दर्ज किए हैं। तीनों ने पूछताछ में भी कुबूल किया है कि उनका इन हत्याओं के अलावा किश्तवाड़ में आतंकवाद फैलाने में भी हाथ है। सूत्रों के अनुसार किश्तवाड़ में आतंकी संगठन फिर से आतंकवाद बड़े पैमाने पर फैलाने के लिए जुटे हैं।

शफी सरूरी की नहीं हुई गिरफ्तारी : किश्तवाड़ में भाजपा और आरएसएस नेताओं की हत्या के मामले में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री जीएम सरूरी के भाई मुहम्मद शफी सरूरी का नाम सामने आया है। इन पर आतंकियों को शरण देने और आतंकी गतिविधियों के लिए मदद करने का आरोप है। फिलहाल शफी सरूरी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 

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