बीमार उद्योगों की संजीवनी और नए निवेश की उम्मीद... आखिर कहां अटका जम्मू-कश्मीर का नया 'इंडस्ट्रियल प्लान'?
जम्मू-कश्मीर की औद्योगिक नीति 2021-30 में संशोधन का इंतजार है, जिसका उद्देश्य बीमार उद्योगों को पुनर्जीवित करना और नए निवेश को बढ़ावा देना है।

जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो)
HighLights
जम्मू-कश्मीर औद्योगिक नीति संशोधन में दो साल की देरी
बीमार उद्योगों को पुनर्जीवित करने और निवेश बढ़ाने का लक्ष्य
न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम समाप्त होने से नया निवेश प्रभावित
ललित कुमार,जम्मू। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने सत्ता में आने के साथ ही जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उद्योगपतियों को सरकारी सहयोग उपलब्ध करवाने का वादा किया था और इसके लिए उद्योग नीति 2021-30 में आवश्यक संशोधन करने का विश्वास दिलाया। अब दो साल से स्थानीय उद्योगपति मौजूदा उद्योग नीति में संशोधन की उम्मीद लगाकर बैठे हैं। इसे लेकर जून 2026 में सरकार ने जम्मू के उद्योगपतियों से विस्तृत चर्चा कर आवश्यक संशोधन पर उनकी राय भी ली।
इसी तरह की बैठक कश्मीर में भी हुई। ऐसे में उम्मीद थी कि संधोशन को लेकर तैयार ड्राफ्ट को जल्द झंडी मिलेगी जिससे संशोधन का रास्ता साफ होगा। अभी तक कोई निर्णय न होने से उद्योग जगत में निराशा है।
उद्योग नीति में प्रस्तावित संशोधन जम्मू कश्मीर में औद्योगिक विकास को गति देने, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के हर संभव अवसर के दोहन और मझोले व लघु स्तर की बीमार औद्योगिक इकाइयों को फिर से जीवंत बनाने के उपायों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
इसमें निवेशकों के लिए प्रोत्साहण और रियायतों को भी सुनिश्चित बनाया जा रहा है। प्रस्तावित संशोधनों के मुताबिक बीमार औद्योगिक इकाइयों को पुन जीवंत बनाने के लिए नई औद्योगिक इकाइयों के बराबर ही प्रोत्साहण व रियायतें दी जाएंगी।
बीमार इकाईयों की पहचान, उनकी वैधता-व्यावहार्यता और रोजगार सृजन में उनकी भूमिका के आकलन को तय करने के लिए संस्थागत प्रक्रिया तय की जाएगी। स्थानीय उद्यमियों का मानना है कि जब तक सरकार की ओर से ऐसी रियायतें व सहयोग नहीं मिलता, तब तक पुराने लघु उद्योग पड़ोसी राज्यों के उद्योगों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित संशोधन में दिए गए सुझाव इस प्रकार हैं...
- प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार जोन-ए में आने वाली एमएसएमई इकाइयों को 30 प्रतिशत तक वित्तीय मदद जिसकी अधिकतम सीमा 50 लाख होगी, दी जाएगी। जोन-बी में आने वाली इकाइयों को 50 प्रतिशत वित्तीय मदद मिलेगी जिसकी अधिकतम सीम एक करोड़ तय की गई है।
- सभी जोन में महिलाओं के नेतृत्व वाली एमएसएमई इकाईयों को अतिरिक्त लाभ के तौर पर 25 प्रतिशत अधिक वित्तीय मदद दी जएगी। यह लाभ उन एमएसएमई इकाइयों को भी मिलेगा जिनमें महिलाओं की साझेदारी 51 प्रतिशत या उससे ज्यादा होगी।
- प्रस्तावित पहल में पात्र इकाइयों को पांच वर्ष के लिए 100 प्रतिशत एसजीएसटी का पुनर्भुगतान भी शामिल है। माइक्रो इकाइयों के लिए यह फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट का 200 प्रतिशत, जोन-ए-की इकाइयों के लिए इसकी अधिकतम सीमा 150 प्रतिशत होगी।
- जोन बी में आने वाली मझोली और लघु इकाइयों के लिए 150 प्रतिशत तक पुनर्भुगतान होगा। सरकारी औद्योगिक संपदा क्षेत्रों में जमीन के लेन-देन जिसमें भूमि पट्टा अनुबंध व मार्गेज भी शामिल है, पर स्टाम्प डयूटी में 100 प्रतिशत की छूट रहेगी।
- प्रस्तावित संशोधन के अनुसार स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहण/इंसेंटिव दिया जाएगा। प्रारुप के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में रजिस्टर्ड किसी भी इंडस्ट्रियल यूनिट को, जो भारत के किसी मान्यता प्राप्त स्टाक एक्सचेंज, यानी नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) या बाम्बे स्टाक एक्सचेंज (बीएसई) पर अपनी इक्विटी को सफलतापूर्वक सूचीबद्ध कराती हैं, 50 लाख रुपये का प्रोत्साहण दिया जाएगा।
- पेटेंट फाइल करने के लिए प्रोत्साहण राशि का भी प्रस्ताव है, जिसमें दिए पेटेंट पर असल फाइलिंग लागत 100 प्रतिशत पुनर्भुगतान होगा। घरेलू पेटेंट के लिए दो लाख और अंतरराष्ट्रीय पेंटेंट के लिए पांच लाख की अधिकतम सीमा है।
- प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, हरित व पर्यावरण संरक्षण संबंधित प्रयासों, पर्यावरण अनुकूल इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रक उपकरण लगाने, रूफटाप सोलर, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, जीरो-डिस्चार्ज प्रोसेस, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट, या पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा प्रमाणित किसी भी अन्य हरित और पर्यावरण अनुकूल उपाय को अपनाने के लिए सब्सिडी दी जाएगी।
एनसीएसएस का विस्तार न होने से पड़ रहा असर
प्रदेश में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों के लिए न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम के तहत 28,400 करोड़ के पैकेज को विस्तार न दिए जाने का प्रदेश में निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2021 में घोषित न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम का लाभ समाप्त होने के बाद से प्रदेश में थमे औद्योगिक निवेश को फिर गति मिल सके, इसके लिए जरूरी था कि पैकेज को विस्तार मिले।
सितंबर 2024 में वित्तीय पैकेज का लाभ आवंटित होने के साथ ही इस स्कीम को बंद कर दिया गया जिसवे बाद से नया निवेश थम गया। इस निवेश को जारी रखने के लिए गत वर्ष उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28,400 करोड़ के पैकेज व बढ़ाकर 75 हजार करोड़ करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था लेकिन 28,400 करोड़ के पैकेज के तहत मिले निवेश प्रस्ताव व वास्तविकता में हुए निवेश के बाद शेष बचे 5630.75 करोड़ का लाभ आगे बढ़ाया।
