जम्मू, जेएनएन: जम्मू-कश्मीर सरकार ने साल 2018 के म्यूनिसिपल और पंचायत चुनावों में ड्यूटी देने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों को दिए गए एक महीने के अतिरिक्त वेतन का कुछ हिस्सा गलत तरीके से देने को गंभीरता से लिया है। सरकार ने अब करोड़ों रुपये का हुआ यह अतिरिक्त भुगतान इन कर्मचारियों व अधिकारियों से वापस लेने का फैसला किया है। सभी लाभ मिलाकर यह कुल राशि 43.29 करोड़ रूपये बनती है।

सरकार ने 20 दिसंबर 2018 को एक आदेश जारी किया था जिसमें म्यूनिसिपल और पंचायत चुनावों या फिर दोनों ही चुनावों में ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों को एक महीने का अतिरिक्त वेतन या मानदेय देने का फैसला किया था। इस आदेश के बाद विभिन्न विभागों के डीडीओ ने सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को चुनाव की ड्यूटी के बाद एक हीने का अतिरिक्त वेतन जारी कर दिया। मगर जम्मू-कश्मीर के प्रिंसिपल एकाउंटेंट जनरल ने जब इस बारे में विभिन्न विभागों से जानकारी मांगी तो पाया कि उस समय डीडीओ ने वेतन के साथ एचआरए सीसीए भी कर्मचारियों को दिया था।

जब इस मामले की समीक्षा की गई तो पाया गया कि जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसिस नियमों के तहत वेतन में स्थानीय भत्ते एचआरए, डेपोटेशन एलाउंस और परिवहन भत्ता शामिल नहीं होता। इन सभी कर्मचारियों को गलत तरीके से वेतन के साथ ये भत्ते जारी कर दिए गए। सभी भत्ते मिला दिए जाएं तो कुल राशि 43.29 करोड़ रूपये बनती है।

यह तय किया गया कि ये राशि इन कर्मचारियों व अधिकारियों से वापस ली जाएगी। इन सभी पहलुओं को देखने के बाद अब सामान्य प्रशासनिक विभाग की ओर से यह आदेश जारी किया गया है कि म्यूनिसिपल और पंचायत चुनावों में जिन कर्मचारियों व अधिकारियों ने ड्यूटी दी है, अगर वे सेवानिवृत्त भी हो गए हैं तो उनसे तत्काल अतिरिक्त वेतन वापस लिया जाए। सामान्य प्रशासनिक विभाग का कहना है कि संबंधित सभी अधिकारियों व कर्मचारी अपने-अपने विभागों से इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

Edited By: Rahul Sharma