जम्मू, राज्य ब्यूरो। राज्य सरकार के अधीनस्थ सरकारी अधिकारियों व कर्मियों के लिए खुशखबरी है। राज्य प्रशासन ने परिवहन भत्ते की घोषणा की है। प्रत्येक कर्मी को उसके वेतनमान के अनुरूप 900 से 7200 रुपये प्रति माह परिवहन भत्ता मिलेगा, बशर्ते संबंधित सेवा नियमों व शर्तों को पूरा करता हो। पहले से सरकारी परिवहन सेवा का लाभ लेने वाले भत्ते से वंचित रहेंगे। उपराज्यपाल जीसी मुमरू के निर्देशानुसार वीरवार को वित्त विभाग के वित्तायुक्त अरुण कुमार मेहता ने 31 अक्टूबर से प्रभावी परिवहन व महंगाई भत्ते के संदर्भ में अधिसूचना जारी कर दी है।

राज्य से बाहर तैनाती पर भी भत्ता मिलेगा: हैदराबाद, पटना, दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, बेंगलुरु, कोच्चि, इंदौर, ग्रेटर मुंबई, नागपुर, पुणो, जयपुर, चेन्नई, कोयमबतूर, गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ और कोलकाता में तैनात वेतनमान स्तर दो तक के कर्मियों को प्रतिमाह 1350 प्लस महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते, वेतनमान स्तर से तीन से नौ के नीचे के दर्जे के कर्मियों को प्रतिमाह 3600 प्लस महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ता और वेतनमान स्तर नौ व ऊपर के अधिकारियों को प्रतिमाह 7200 प्लस महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ता की दर से परिवहन भत्ता मिलेगा। उपरोक्त शहरों से बाहर तैनात वेतनमान स्तर दो तक के कर्मियों को प्रतिमाह 900 प्लस महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ता, वेतनमान स्तर से तीन से वेतनमान नौ के नीचे के दर्जे के कर्मियों को प्रतिमाह 1800 प्लस महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ता और वेतनमान स्तर नौ व ऊपर के अधिकारियों को प्रतिमाह 3600 प्लस महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ता की दर से परिवहन भत्ता मिलेगा। अधिसूचना के मुताबिक वेतनमान स्तर एक, दो , तीन और वेतन मैट्रिक्स एक व दो के दायरे में आने वाले और 24200 रुपये अधिक का वेतन लेने वालों को हैदराबाद, पटना, दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, बेंगलुरु, इंदौर, ग्रेटर मुंबई, नागपुर, पुणो, जयपुर, चेन्नई, कोयमबतूर, गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ व कोलकाता में नियुक्ति के समय 3600 प्रति माह और इन शहरों के बाहर 1800 रुपये प्रति माह परिवहन भत्ता व अन्य भत्ते देय होंगे।

विशेष ड्यूटी के लिए मान्य होगा: शहर के भीतर ही मुख्यालय से आठ किलोमीटर की दूरी पर या फिर बाहर क्षेत्रीय ड्यूटी पर जाने वाले विशेष दलों के सदस्यों को घर से ड्यूटीस्थल तक आने जाने पर हुए खर्च की भरपाई के लिए परिवहन भत्ता दिया जाएगा। अगर किसी को रोजाना यात्र भत्ता मिलता है या फील्ड अथवा निगरानी के लिए या फिर माह सर्वे के लिए निशुल्क परिवहन सुविधा दी है तो उसे भत्ता नहीं मिलेगा। वेकेशन स्टाफ को तभी भत्ता मिलेगा जब किसी वाहन सुविधा न दी हो।

दिव्यांग कर्मियों को मिलेगा दोगुना भत्ता: दिव्यांग कर्मियों को सामन्य दरों से दोगुने दर पर परिवहन भत्ता देय होगा जो किसी सूरत में 22501 रुपये प्रतिमाह से कम नहीं होगा। उन्होंने महंगाई व अन्य भत्ते संबंधित नियमों के तहत देय होंगे। अनुच्छेद 328-ई के तहत ऊपरी वर्ग के अधिकारियों को वाहन भत्ते का लाभ नहीं मिलेगा।

निलंबित कर्मियों को लाभ नहीं : निलंबित कर्मियों को परिवहन भत्ता नहीं मिलेगा। अगर निलंबन अवधि को रद करते हुए ड्यूटी भी मान लिया जाए तो भी उसे भत्ता नहीं मिलेगा। अगर उसके निलंबन की अवधि एक कैलेंडर माह को आंशिक तौर पर पूरा करती है तो उसे दिया जाने वाला भत्ता संबंधित अवधि के अनुरूप घटाकर ही दिया जाएगा। ट्रेनिंग पर गए अधिकारी को ड्यूटी पर माना जाएगा : अगर कोई अधिकारी ट्रेनिंग पर है तो उसे ड्यूटी पर माना जाएगा। ऐसी परिस्थिति में परिवहन भत्ता तभी मिलेगा जब संबंधित संस्थान उसे ट्रेनिंग अवधि के दौरान किसी तरह की वाहन सुविधा या यात्र और दैनिक भत्ता प्रदान नहीं कर रहा होगा।

दिव्यांग महिलाओं को मिलेंगे तीन हजार: प्रशासन ने राज्य में दिव्यांग महिलाओं को हर महीने बच्चों की देखभाल के लिए तीन हजार रुपये भत्ता देने को मंजूरी दी है। यह भत्ता बच्चे के पैदा होने से लेकर उसके दो साल का होने तक दिया जाएगा। यह भत्ता दो बच्चों के लिए ही होगा।

दो बच्चों की 12वीं कक्षा तक पढ़ाई के लिए 4500 रुपये: सरकारी कर्मियों को अब बच्चों की पढ़ाई के लिए भी भत्ता मिलेगा। जम्मू कश्मीर सरकार के वित्त विभाग ने सरकारी कर्मियों के लिए चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस (बच्चे का शिक्षा भत्ता) और हॉस्टल सब्सिडी को मंजूरी दी है। केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के कर्मचारियों को 12वीं कक्षा तक के स्कूलों में दो बच्चों को पढ़ाने के लिए 2250 रुपये के हिसाब से हर माह 4500 रुपये का अलाउंस मिलेगा। साथ ही हॉस्टल में पढ़ाने के लिए 6750 रुपये की हॉस्टल सब्सिडी भी मिलेगी। वित्त विभाग के वित्त आयुक्त डॉ. अरुण कुमार मेहता के अनुसार पर दिव्यांग बच्चे के लिए सरकारी कर्मचारी को सामान्य से दोगुना 4500 रुपये का भत्ता मिलेगा। जबकि सामान्य बच्चों के लिए 12वीं तक भत्ता देने की अधिकतम आयु सीमा 20 तो दिव्यांग बच्चों के लिए यह 22 वर्ष है। सरकारी कर्मचारियों को भत्ता लेने के लिए साल में एक बार संबंधित शिक्षण संस्थान का प्रमाणपत्र लेकर जमा कराना होगा।

सरकारी नौकरी करने वाला दंपति भी एक बच्चे के लिए अलाउंस-सब्सिडी ले सकता है

पति व पत्नी, दोनों के सरकारी कर्मचारी होने की स्थिति में दोनों में से एक ही बच्चों के अलाउंस व सब्सिडी ले सकता है। सरकारी कर्मचारी के लीव पर होने या सस्पेंड होने की स्थिति में एजुकेशनल अलाउंस व हास्टल सब्सिडी लगातार मिलते रहेंगे। नौकरी के दौरान अगर सरकारी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो भी बच्चों की शिक्षा व हॉस्टल के लिए वित्तीय सहायता पहले की तरह मिलती रहेगी। शर्त यह है कि मृतक कर्मचारी की पत्नी सरकारी कर्मचारी नहीं होनी चाहिए। उपराज्यपाल का आदेश वीरवार को वित्त विभाग के वित्त आयुक्त डॉ. अरुण कुमार मेहता की ओर से जारी किया गया। गौरतलब है कि राज्य में विभिन्न विभागों में पांच लाख से अधिक सरकारी कर्मी हैं।

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