जम्मू, अवधेश चौहान। जम्मू कश्मीर के निवासी एवं आइआइटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पूर्व छात्र अखिल चाढ़क ने एक ऐसा पोर्टेबल सोलर फ्रिज (रिक्शा) बनाया है जो सरहद पर तैनात जवानों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाएगा। सौर ऊर्जा से चलने वाला यह फ्रिज दुर्गम हालात में भी जवानों तक पहुंचने की काबिलीयत रखता है।

कल्पना कीजिए कि शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रेगिस्तान में सरहद पर किसी को सांप काट ले तो उस तक एंटीडोज कैसे पहुंचेगा। अगर पहुंच भी जाता है तो क्या उसकी कोल्ड चेन को बरकरार रखा जा सकता है। ऐसे ढेर सवाल हैं, जिनका जवाब जम्मू के अखिल का पोर्टेबल सोलर फ्रिज देता है। यह रिक्शा रेगिस्तान की तपती गर्मी में भी जवानों समेत ग्रामीणों को भी जीवन रक्षक दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराएगा जो गर्मी में खराब हो जाती हैं। अखिल भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं।

गर्मी के मौसम में जब गुजरात के रेगिस्तान कच्छ में तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाता है, तब भी यह पोर्टेबल सोलर फ्रिज -12 डिग्री तापमान के साथ करीब 240 लीटर खाने पीने का सामान, दवाइयां और वैक्सीन को प्रीजर्व कर सकता है। सौर ऊर्जा से चलने वाला यह फ्रिज बगैर धूप, बादलों और बारिश में भी चार दिन तक अपनी ऊर्जा को जमा रख सकता है।

शोध करने वाले आइआइटियंस लेफ्टिनेंट कर्नल अखिल चाढ़क का कहना है कि केंद्र शासित जम्मू कश्मीर के दूरदराज इलाकों की सीमाओं पर लाखों की संख्या में तैनात हैं। कई बार इन इलाकों में सर्पदंश के इलाज के लिए एंटी वैनम की जरूरत पड़ती है। इस एंटी वैनम को संरक्षित रखने के लिए रेफ्रीजरेटर की जरूरत पड़ती है। कई जवान डायबटीज से भी ग्रस्त होते हैं, जिन्हें इंसुलिन की जरूरत होती है।

इतना ही नहीं, यह फ्रिज उन भारतीय जवानों के काम आएगा होगा जो गोलीबारी में घायल हो जाते हैं और उन्हें जीवन रक्षक दवाइयां की जरूरत पड़ती है, जिन्हें प्रीजर्व रखना बेहद जरूरी होता है। देश के दूरदराज गांव जहां बिजली नहीं है, वहां यह फ्रिज खाद्य पदार्थों को संरक्षित रखने में काफी फायदेमंद होगा।

बेरोजगारों के लिए रोजगार का बन सकता है साधन

पहियों पर चलने वाला यह फ्रिज देश के हजारों बेरोजगार युवाओं को खाद्य पदार्थ बेच कर रोजी रोटी कमाने का साधन बन सकता है। इसे तैयार करने वाले एमटेक मैकेनिकल के छात्र ले. कर्नल अखिल चाढ़क मूलत: जम्मू संभाग के भद्रवाह क्षेत्र के रहने वाले हैं। चाढ़क का कहना है कि उनका मार्गदर्शन आइआइटी कानपुर के प्रोफेसर खांडेकर ने किया। उन्होंने सौर ऊर्जा से संचालित रेफ्रीजरेटर तैयार किया जो ई-रिक्शा से जुड़ा हुआ है।

पेटेंट के लिए भेजा है शोधपत्र

वर्तमान में पंजाब के बठिंडा में सेना में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल अखिल चाढ़क का कहना है कि सौर ऊर्जा से संचालित इस पोर्टेबल सोलर फ्रिज को तैयार करने का मकसद देश में लाखों टन खाद्य पदार्थ को संरक्षित करना है। चाढ़क का कहना है कि आइआइटी कानपुर ने शोध पेपर को मिनिस्ट्री ऑफ न्यू रिन्युएबल इनर्जी को भेजा है ताकि इसे पेंटेट किया जा सके। 

Posted By: Preeti jha

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