जम्मू, जागरण संवाददाता। अप्रैल में जम्मू कश्मीर में होने जा रहे निवेशक शिखर सम्मेलन के प्रचार-प्रसार और निवेशकों को आकर्षित करने के आज सोमवार से देश के कई हिस्सों में रोड-शो शुरू हो गए। कोलकाता और बेंगलुरु से इसकी शुरुआत हुर्इ। राज्य के 54 वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) व कश्मीर प्रशासनिक सेवा (केएएस) अधिकारियों को जम्मू-कश्मीर में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं के बारे में निवेशकों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गर्इ है।

नौ मार्च तक मुंबई, अहमदाबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद में रोड-शो होंगे। जम्मू कश्मीर के समग्र आर्थिक-सामाजिक विकास को सुनिश्चित बनाने के लिए वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन से पूर्व मार्च के दौरान जम्मू और श्रीनगर में दो लघु सम्मेलन होंगे। रोड शो और मुख्य सम्मेलन के दौरान इच्छुक निवेशकों के साथ सहमति पत्र एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। 21 फरवरी मुंबई, दो मार्च हैदराबाद, पांच मार्च चेन्नई, नौ मार्च अहमदाबाद में रोड शो होंगे। निवेशक सम्मेलन से उम्मीद है कि देश विदेश के कारोबारी जम्मू में निवेश करेंगे। इससे राज्य में मौजूदा उद्योग को राहत मिलेगी। बाहरी राज्यों से भी भारी निवेश आएगा। इससे रोजगार भी बढ़ेगा।

निवेशक शिखर सम्मेलनः वैश्विक निवेशक सम्मेलन को सफल बनाने के लिए मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में गठित सर्वोच्च समिति की गत दिनों हुई बैठक में रोड शो के लिए अधिकारियों को नामांकित किया था। नामांकित अधिकारियों में उपराज्यपाल के प्रधान सचिव बिपुल पाठक के अलावा रोहित कंसल, मंजूर लोन, सिमरनदीप सिंह, शाहिद इकबाल चौधरी, सुषमा चौहान, अनु, राज कटोच, मुसर्रत उल इस्लाम, अतुल, हृदयेश कुमार, जेएस दुआ, जुबैर अहमद, र¨वद्र कुमार, डॉ. पीयूष सिंगला, डॉ. गुलाम नबी इट्टु, बबिता रकवाल, अतुल डुल्लु, मनोज कुमार द्विवेदी, रोहित खजूरिया, निसार अहमद, महमूद अहमद शाह, तारिक हुसैन गनई और धीरज गुप्ता, राघव लंगर, चौधरी मोहम्मद यासीन, शहबाज अहमद मिर्जा, इंदु कंवल और जावेद शामिल हैं।

ये प्रमुख अधिकारी करेंगे रोड शोः जम्मू की बड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान ललित महाजन के अनुसार देश के विभिन्न हिस्सों से एसोसिएशन को निवेशकों के फोन आ रहे हैं। निवेशक जम्मू-कश्मीर में निवेश की संभावनाओं बारे पूछ रहे हैं लेकिन हम जम्मू-कश्मीर व केंद्र सरकार की रियायतों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के लिए नई उद्योग नीति लगभग तैयार है, लिहाजा हम सिर्फ इसकी घोषणा का इंतजार कर रहे हैं ताकि रियायतों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाए। अगर केंद्र सरकार वास्तविकता में जम्मू-कश्मीर में उद्योग को बढ़ावा देना चाहती है तो वर्ष 2002 के औद्योगिक पैकेज को एक लंबी अवधि के लिए लागू किया जाना चाहिए।

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