जम्मू वासियों को मिलेगा अपना आशियाना: भलवाल में विकसित होंगी 2 नई आवासीय कॉलोनियां
जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड ने जम्मू के भलवाल में दो नई आवासीय कॉलोनियां विकसित करने की मंजूरी दी है, जिनमें एक फ्लैट्स परियोजना और दूसरी मास हाउसिंग कॉलोनी शामिल है।

भलवाल में दो नई हाउसिंग कॉलोनियों को मंजूरी।
HighLights
जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड ने भलवाल में दो नई आवासीय कॉलोनियां मंजूर कीं
पहली परियोजना फ्लैट्स के रूप में, दूसरी मास हाउसिंग कॉलोनी होगी
अवैध निर्माण पर सख्त निगरानी, नागरिकों को सुरक्षित आवास विकल्प
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू शहर के आसपास व्यवस्थित और किफायती आशियाना तलाश रहे लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड ने आम नागरिकों को नियोजित रिहायश उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शहर के नजदीकी क्षेत्र भलवाल में दो नई आवासीय कालोनियां विकसित करने की मंजूरी दी है।
विधानसभा में जम्मू पश्चिम के विधायक अरविंद गुप्ता द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित जवाब में आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रभारी मुख्यमंत्री की ओर से यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई है।
बताया गया कि पहली परियोजना भलवाल में 41 कनाल 5 मरला भूमि पर फ्लैट्स के रूप में तैयार की जाएगी, जिसके लिए रेरा पंजीकरण की प्रक्रिया अमल में लाई जा चुकी है और जल्द ही इस प्रोजेक्ट को लांच किया जाएगा।
वहीं दूसरी परियोजना के तहत चक भलवाल में 248 कनाल 13 मरला की भूमि पर मास हाउसिंग कालोनी विकसित की जाएगी। इसे सेल्फ-फाइनेंसिंग स्कीम के तहत तैयार किया जा रहा है और बोर्ड ने इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर जल्द लांच करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
अवैध निर्माण पर सख्त निगरानी
शहर के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करने और नागरिकों को अनधिकृत कालोनियों में निवेश के नुकसान से बचाने के लिए विभाग लगातार फील्ड निरीक्षण कर रहा है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कंट्रोल आफ बिल्डिंग आपरेशंस एक्ट के तहत नोटिस जारी करने के साथ-साथ सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा रही है। इसके अलावा किसी भी अवैध कालोनी के पनपने से रोकने के लिए राजस्व विभाग और जेके-रेरा के साथ मिलकर सख्त समन्वय स्थापित किया गया है।
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गोल गुजराल के आवंटियों की स्थिति
जवाब में गोल गुजराल हाउसिंग कालोनी का मुद्दा भी सामने आया। जहां जेडीए द्वारा विकसित 250 आवासीय प्लाटों में से 69 आवंटियों के मामले विवाद में फंसे हैं।
पूरा प्रीमियम जमा करने के बावजूद जेडीए और राजस्व विभाग के बीच जमीन की सीमा विवाद और आंशिक अनधिकृत कब्जों के कारण कानूनी अड़चनें बनी हुई हैं, जिनके चलते पजेशन में देरी हो रही है।
इसके साथ ही जम्मू नगर निगम की सीमा में अनधिकृत कालोनियों के नियमितीकरण पर उच्च न्यायालय की रोक लगी हुई है, जिससे आम लोगों के लिए सरकारी और अनुमोदित योजनाओं में ही निवेश करना सबसे सुरक्षित विकल्प साबित होता है।
