जागरण संवाददाता, जम्मू: कोरोना से बचाव के लिए लॉकडाउन से किसानों की माली हालत पर असर तो पड़ा है, लेकिन वे पीछे नहीं हटे हैं। वे इससे उबरने के लिए नकदी फसलों की खेती पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। कम समय में अच्छी कमाई के लिए किसानों का पहले की तुलना में फूलों की खेती की तरफ ज्यादा रुझान बढ़ा है। अभी मंदिर नहीं खुले हैं, लेकिन किसानों को उम्मीद है जल्द सरकार मंदिरों को भी पूजा-अर्चना के लिए खोल देगी, जिसके बाद वे वहां फूलों की आपूर्ति कर सकेंगे।

अन्य फूलों के अलावा वे गुलाब और ग्लैडियोलस की खेती पर खास जोर दे रहे हैं। गेंदे की खेती तो पहले से ही किसान करते रहे हैं। इस बार उनको इससे नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन मंदिरों के कपाट खुलते ही हालात बदलेंगे। उन्हें दीपावली पर अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है। तीन फूलों की खेती में समय भी कम लगता है। ऐसे में ज्यादातर किसान इन फूलों की खेती करने का मन बना रहे हैं। कट फ्लावर में ग्लैडियोलस की खेती सितंबरों शुरू होगी। एक कनाल भूमि में 2500 बल्ब की जरूरत रहेगी। तीन माह में किसान इतनी जमीन से 15 हजार से 17 हजार की कमाई कर सकता है। वहीं, चार माह में तैयार होने वाला गुलाब किसानों को प्रति कनाल 20-25 हजार रुपये की कमाई करा सकता है। अगर ग्रीन हाउस में गुलाब लगाया जाए, तो कमाई 35 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। जुलाई के आखिर में लगने वाला यह गेंदा दीपावली पर तैयार हो जाएगा और प्रति कनाल किसानों को 15 हजार की कमाई करा सकता है।

क्या क्या फसलें लग सकती हैं: बडुई के किसान शाम सिंह ने बताया कि वे इस बार ब्रोकली की पहले से ज्यादा करेंगे। यह बाजार में सौ-डेढ़ सौ रुपये में बिकती है। वहीं, मंडाल के पनोतरे चक के किसान कुलदीप राज शर्मा का कहना है कि अपने शेड नेट में वे स्ट्राबेरी के अलावा हाइब्रिड गेंदा लगाएंगे। शेड कट फ्लावर भी उगाएंगे। राजेंद्र प्रसाद उन्नत किसान हैं। वे इस बार चिप सोना आलू की खेती करने का मन बना रहे हैं। कोरोना ने किसानों को परेशान जरूर किया है, लेकिन किसान धरती पुत्र है। वह हार मानने वाला नहीं है। कोरोना को मात देकर किसान जिंदगी की नई इबारत लिखेगा। 

Posted By: Rahul Sharma

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस