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जम्मू में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर डॉक्टर की सेवाएं समाप्त, छुट्टी के लिए नहीं ली थी अनुमति 

Published: Mon, 14 Sep 2026 09:37 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर सरकार ने राजपोरा सीएचसी के मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोहम्मद अजहर-उद-दीन की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वे 6 जनवरी 2024 से बिना अनुमति सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित थे।

ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर डॉक्टर की सेवाएं समाप्त। सांकेतिक फोटो

ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर डॉक्टर की सेवाएं समाप्त। सांकेतिक फोटो

HighLights

  1. डॉक्टर मोहम्मद अजहर-उद-दीन की सरकारी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

  2. बिना पूर्व अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई।

  3. 6 जनवरी 2024 से डीएम नियोनेटोलाजी कोर्स में शामिल थे।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर सरकार ने लंबे समय तक बिना अनुमति सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर राजपोरा स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोहम्मद अजहर-उद-दीन की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने यह कार्रवाई सरकारी आदेश संख्या 687-जेके (एचएमई) 2026 के तहत की है। आदेश 11 सितंबर 2026 को जारी किया गया।

सरकारी आदेश के अनुसार, डा अजहर-उद-दीन ने छह जनवरी 2024 को मुंबई के एलटीएमसी मेडिकल कॉलेज एवं सायन अस्पताल में डीएम (नियोनेटोलाजी) पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। इसके लिए उन्होंने सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति या अवकाश स्वीकृत नहीं कराया था।

विभाग ने कहा कि सरकारी सेवा में कार्यरत डाक्टरों को उच्च शिक्षा के लिए जाने से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य है। डाक्टर ने उचित माध्यम से अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन निर्णय आने से पहले ही पाठ्यक्रम ज्वाइन कर लिया। मार्च 2024 में प्रशासनिक विभाग ने निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने के आधार पर उनका आवेदन खारिज कर दिया।

सरकार ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस

इसके बावजूद डाक्टर ने पाठ्यक्रम जारी रखा और सीएचसी राजपोरा में अपनी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे। सरकार ने 24 मार्च 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे अनुपस्थिति का स्पष्टीकरण मांगा और ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया। इसके बाद पांच मार्च 2026 को अंतिम नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई कि अनुपालन नहीं करने पर सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अपने जवाब में डाक्टर ने कहा कि उन्होंने अनुमति के लिए उचित माध्यम से आवेदन किया था और निर्धारित पांच वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने में केवल कुछ दिनों की कमी थी। उन्हें उम्मीद थी कि बाद में अनुमति मिल जाएगी।

उन्होंने कहा कि डीएम नियोनेटोलाजी की योग्यता जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए उपयोगी होगी। उन्होंने अनुपस्थिति की अवधि को स्टडी लीव, एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव या अन्य स्वीकार्य अवकाश के रूप में नियमित करने का अनुरोध किया और पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद सरकारी सेवा में लौटने की इच्छा जताई।

नाती स्थल से अनुपस्थित रहना नियमों का उल्लंघन

विभाग ने उनका पक्ष खारिज करते हुए कहा कि अनुमति के लिए आवेदन करना, अनुमति मिल जाने के समान नहीं है। औपचारिक स्वीकृति के बिना तैनाती स्थल से अनुपस्थित रहना नियमों का उल्लंघन है।

सरकार ने जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज लीव रूल्स, 1979 के नियम 13 और सिविल सर्विस रेगुलेशन के अनुच्छेद 128 का हवाला देते हुए कहा कि अनधिकृत अनुपस्थिति कदाचार है।

सेवा रिकार्ड, नोटिस, डाक्टर के जवाब और कानूनी राय की समीक्षा के बाद उनका स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद सेवाएं छह जनवरी 2024 से प्रभावी रूप से समाप्त करने का आदेश जारी किया गया।