पद खाली होने से नहीं मिलता पदोन्नति का अधिकार, कैट का अहम फैसला; जम्मू-कश्मीर सरकार 3 महीने में फिर करेगी विचार
कैट जम्मू बेंच ने सुभाष चंद्र शर्मा की पदोन्नति के मामले में जम्मू-कश्मीर सरकार को तीन महीने में पुनर्विचार करने ...और पढ़ें

वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी की पदोन्नति पर फिर होगा विचार। (फाइल फोटो)
HighLights
कैट ने पदोन्नति मामले में सरकार को पुनर्विचार का निर्देश दिया।
खाली पद होने से पदोन्नति का अधिकार स्वतः नहीं मिलता।
पात्र कर्मचारी के मामले पर नियमों से विचार करना जरूरी।
जागरण संवाददाता, जम्मू। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के जम्मू बेंच ने वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी सुभाष चंद्र शर्मा की पदोन्नति के दावे पर जम्मू-कश्मीर सरकार को तीन महीने के भीतर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। कैट ने स्पष्ट किया कि रिक्त पद होने मात्र से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलता, हालांकि पात्र कर्मचारी के मामले पर नियमों के अनुसार विचार करना जरूरी है।
शर्मा ने वर्ष 2015 से संयुक्त निदेशक अभियोजन और जुलाई 2022 से निदेशक अभियोजन के पद पर पिछली तारीख से पदोन्नति की मांग की थी।
उनका दावा था कि विभाग में संयुक्त निदेशक अभियोजन के छह और निदेशक अभियोजन के दो पद रिक्त थे जबकि उनके पास लंबी सेवा और डीजीपी पदक सहित उपलब्धियां थी।
2013 में कार्यवाहक व्यवस्था के तहत हुई थी तैनाती
सरकार ने दलील दी कि वर्ष 2013 में उपनिदेशक अभियोजन के पद पर उनकी तैनाती कार्यवाहक व्यवस्था थी और नियमित पदोन्नतियों में वरिष्ठता विवादों के कारण देरी हुई।
कैट ने नए सिरे से पात्रता तय करने के दिए निर्देश
उन्हें दिसंबर 2022 में नियमित पदोन्नति दी गई। कैट ने निर्देश दिया कि भर्ती नियमों, संशोधित वरिष्ठता, रिक्त पदों और कार्यवाहक सेवा की गणना के आधार पर पात्रता तय की जाए। पात्र पाए जाने पर उनका मामला विभागीय पदोन्नति समिति या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखा जाए।
