जम्मू के कारोबार जगत में हड़कंप, नगर निगम के नोटिस से भड़के व्यापारी, अब जवाबी कार्रवाई की तैयारी
जम्मू नगर निगम द्वारा रिहायशी इलाकों में व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने से कारोबार जगत में हड़कंप मच गया ...और पढ़ें

व्यापारी बोले- पांच साल में सीएलयू नीति नहीं बना पाई सरकार, अब नोटिस थमा रही। (फाइल फोटो)
ललित कुमार, जम्मू। रिहायशी कालोनियों में बने व्यापारिक प्रतिष्ठानों को जम्मू नगर निगम की ओर से नोटिस भेजे जाने के बाद जम्मू के कारोबार जगत में हड़कंप मच गया है। नोटिस जारी करने की बात सार्वजनिक होने के बाद उन रिहायशी कालोनियों के व्यापारी भी परेशान हैं, जिनके क्षेत्रों में फिलहाल अभी तक नोटिस जारी नहीं हुए हैं। गुस्साए कारोबारियों का कहना है कि पांच साल में सरकार सीएलयू नीति नहीं बना पाई है और अब नगर निगम की ओर से नोटिस दिए जा रहे हैं, जोकि तानाशाही है।
उधर, कारोबारी आज बैठक कर आगामी रणनीति बनाएंगे। इसके साथ विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि निगम आयुक्त से मिल कर मामले पर बात करेंगे।
त्योहारी सीजन से ठीक पहले नगर निगम के इस कदम से कारोबार जगत में आक्रोश है। जम्मू-कश्मीर में रिहायशी इलाकों में व्यापारिक प्रतिष्ठान चलाने को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है, जिसका खामियाजा जम्मू का आम आदमी भुगत रहा है। चेंज आफ लैंड यूज (सीएलयू) को लेकर पांच सालों से सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई है और यही मुख्य कारण है कि रिहायशी इलाकों में समय की जरूरत के अनुसार बने व्यापारिक प्रतिष्ठान रेगुलर नहीं हो पाए हैं।
रिहायशी कालोनियों में व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर नोटिस
जम्मू के रूपनगर, लोअर रूपनगर, छन्नी हिम्मत, सैनिक कालोनी, गांधी नगर व त्रिकुटा नगर समेत आधा दर्जन से अधिक एप्रूवड रिहायशी कालोनियां हैं, जहां बने व्यापारिक प्रतिष्ठान रेगुलराइज्ड नहीं हो पाए हैं और इसी के चलते नगर निगम की ओर से नोटिस जारी हो रहे हैं। ऐसे में कारोबार जगत का यही कहना है कि जिसे लेकर वे सालों से संघर्ष कर रहे हैं, उसे ही लेकर आज उन्हें दोषी ठहराया जा रहा है।
आज रणनीति घोषित करेगा सीटीएफ
जम्मू के विभिन्न इलाकों में दुकानदारों को जारी किए नोटिस पर क्या जवाब दिया जाना है और आने वाले दिनों में व्यापारी किस राह पर चलेंगे, इसकी रणनीति तय करने के लिए चैंबर आफ ट्रेडर्स फेडरेशन (सीटीएफ) ने सोमवार सुबह विभिन्न बाजार संगठनों के साथ बैठक बुलाई है। इसके पश्चात सीटीएफ पत्रकार वार्ता कर अपनी रणनीति का खुलासा भी करेगा।
उधर, नरवाल फ्रूट मंडी के व्यापारी सोमवार को नगर निगम के आयुक्त से मुलाकात कर उनसे इस मसले पर चर्चा करेंगे। चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू भी सोमवार को इस मुद्दे पर प्रशासन से बात करेगा और अगर ये नोटिस तत्काल रद नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में व्यापारी आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
दशकों से न बनी कालोनियां, न मार्केट
जम्मू में दशकों से सरकार की ओर से न तो कोई नई कालोनी विकसित की गईं और न ही कोई नया बाजार। करीब तीन दशक पूर्व जेडीए की ओर से बाहू प्लाजा कांप्लेक्स बनाया गया था। इससे एक दशक पूर्व छन्नी हिम्मत की कालोनी बसी थी। इन तीन-चार दशकों में जम्मू की आबादी में कई गुणा वृद्धि हुई, लेकिन न कोई नई रिहायशी कालोनी बनी और न बाजार।
ऐसे में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गैर योजनाबद्ध तरीके से कालोनियों का विकास हुआ और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बनते गए। जम्मू-कश्मीर में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी का गठन भी वर्ष 2024 में हुआ। इसके गठन से पूर्व अनगिनत कालोनियां बनी और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी। अब अथारिटी के गठन से पूर्व विकसित हुए इलाकों के बारे में कोई स्पष्ट नहीं होने के कारण शहर में असमंजस की स्थिति बरकरार है।
रोजगार नहीं तो रोजी-रोटी का जुगाड़ कैसे करें?
छन्नी हिम्मत दुकानदार सचिन गुप्ता ने बताया कि लोग रोजी-रोटी चलाने के लिए क्या करेंगे। जब पढ़ाई के बाद बच्चों को नौकरी नहीं मिलेगी। बाजारों में महंगी दुकानें खरीदने के लिए पैसे नहीं होंगे तो ऐसे लोग अपने घर में कोई दुकान या दफ्तर बनाकर अपनी रोजी-रोटी का जुगाड़ करेंगे। इसमें गलत क्या है? सरकार को चाहिए कि स्पष्ट व पारदर्शी नीति बनाई जाए, ताकि ऐसे जरूरतमंद लोग निर्धारित फीस देकर अनुमति हासिल कर सकें और अपना व अपने परिवार का पोषण कर सकें।
कारोबारियों को डराने के बजाय सहयोग करे प्रशासन
महासचिव, छन्नी हिम्मत ट्रेडर्स एसोसिएशन महासचिव गुरजीव सिंह ने बताया कि प्रशासन को कारोबारियों का सहयोग करना चाहिए न कि कानूनी डंडा दिखाकर डराना चाहिए। अगर किसी ने अपने घर में दुकान या दफ्तर बनाया है तो उसमें किसी का क्या नुकसान हो सकता है। प्रशासन को चाहिए कि इसके लिए नियम स्पष्ट करें ताकि जिसे जरूरत हो, वो आवेदन कर आवश्यक अनुमति हासिल कर सके। किसी की दुकान या दफ्तर सील करना समस्या का समाधान नहीं।
नरवाल मंडी में नोटिस पर चैंबर का सवाल
चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू के वरिष्ठ उप प्रधान अनिल गुप्ता ने बताया कि जिस नरवाल मंडी में दुकानदारों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, वहां तो अधिकतर दुकानदारों की दुकानों की लीज डीड ही खत्म हो चुकी है। सरकार उनकी लीज डीड रिन्यू करने की बजाय, उनको नोटिस जारी कर रही है।
इससे बड़ा मजाक क्या हो सकता है? जिस समय नरवाल मंडी बनी, उस समय तो वो क्षेत्र नगरनिगम के अधीन भी नहीं आता था। यह सिर्फ व्यापारियों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है जिसका उचित जवाब दिया जाएगा।
