जम्मू-कश्मीर की बदलेगी तस्वीर, 25 शहरों के मास्टर प्लान पर सरकार की नजर; पर्यटन क्षेत्रों के लिए बनेगी अलग योजना
सरकार ने जम्मू-कश्मीर के 25 शहरों और कस्बों के मास्टर प्लान को चालू वित्त वर्ष के अंत तक अंतिम रूप ...और पढ़ें
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जम्मू-कश्मीर की बदलेगी तस्वीर। फाइल फोटो
HighLights
जम्मू-कश्मीर के 25 शहरों के मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने का लक्ष्य।
जम्मू मास्टर प्लान-2032 की समीक्षा अंतिम चरण में है।
कई योजनाओं के शुरुआती चरण में, समय पर पूरा करना बड़ी चुनौती।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में शहरी विकास को व्यवस्थित करने के लिए सरकार ने जम्मू संभाग सहित प्रदेश के 25 शहरों और कस्बों के मास्टर प्लान चालू वित्त वर्ष के अंत तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है। जम्मू मास्टर प्लान-2032 की समीक्षा अंतिम चरण में पहुंच गई है, लेकिन कटरा और उधमपुर की योजनाएं अभी शुरुआती दौर में हैं।
कश्मीर में भी अधिकांश शहरों की योजनाओं पर काम जारी है। ऐसे में निर्धारित समयसीमा तक सभी मास्टर प्लान तैयार करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। इन योजनाओं से शहरों के विस्तार, भूमि उपयोग, आवास, सड़क नेटवर्क और बुनियादी सुविधाओं के भावी विकास की दिशा तय होनी है।
आवास एवं शहरी विकास विभाग अमृत 2.0 के तहत जीआइएस आधारित मास्टर प्लान तैयार करवा रहा है। इसका उद्देश्य बढ़ती आबादी और शहरीकरण के दबाव को देखते हुए विकास की जरूरतों का आकलन करना और बेतरतीब विस्तार पर अंकुश लगाना है।
जम्मू संभाग में अलग-अलग चरणों में काम
जम्मू मास्टर प्लान-2032 की समीक्षा अंतिम चरण में है। वहीं, कटरा मास्टर प्लान-2031 और उधमपुर मास्टर प्लान-2031 की समीक्षा अभी शुरुआती स्तर पर है। अखनूर, रियासी, रामबन, बनिहाल, कठुआ, सांबा, आरएस पुरा और डोडा की प्रारंभिक रिपोर्टों को मंजूरी मिल चुकी है।
प्रदेश में श्रीनगर मास्टर प्लान-2035, जम्मू मास्टर प्लान-2032, उधमपुर मास्टर प्लान-2032 और कटरा मास्टर प्लान-2031 पहले ही अधिसूचित किए जा चुके हैं। इन्हें क्रमशः वर्ष 2019 के एसआरओ-160, वर्ष 2017 के एसआरओ-90, वर्ष 2017 के एसआरओ-91 और वर्ष 2016 के एसआरओ-125 के तहत अधिसूचित किया गया था।
कश्मीर में अनंतनाग सबसे आगे
कश्मीर में अनंतनाग-बिजबिहेड़ा-मट्टन का मास्टर प्लान-2044 ड्राफ्ट चरण में पहुंच चुका है। प्रारंभिक रिपोर्ट, आधार मानचित्र, आंकड़ा विश्लेषण और शुरुआती प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद ड्राफ्ट सार्वजनिक किया गया। अब लोगों की आपत्तियों और सुझावों की जांच हो रही है।
बांडीपोरा मास्टर प्लान-2046 की प्रारंभिक ड्राफ्ट रिपोर्ट जमा है, लेकिन उसकी जांच जारी है। पुलवामा और कुपवाड़ा में आधार मानचित्र तथा मौजूदा भूमि उपयोग योजनाओं की समीक्षा के बाद दस्तावेज टिप्पणियों के साथ सलाहकारों को लौटाए गए हैं।
कुलगाम, बारामुला, सोपोर और पट्टन के मास्टर प्लान-2047 के लिए आंकड़ा विश्लेषण और विकास संबंधी प्रस्ताव मंजूर हुए हैं। बडगाम में प्रारंभिक रिपोर्ट और आधार मानचित्र स्वीकृत हैं। गांदरबल और अवंतिपोरा की रिपोर्टों पर टिप्पणियां भेजी गई हैं, जबकि शोपियां में भी प्रारंभिक रिपोर्ट और आधार मानचित्र को मंजूरी मिली है।
पर्यटन क्षेत्रों के लिए अलग प्रक्रिया
राजौरी, पुंछ और किश्तवाड़ के मास्टर प्लान अलग से तैयार किए जा रहे हैं, क्योंकि संबंधित विकास प्राधिकरण पर्यटन विभाग के अधीन हैं। इनके लिए जल्द निविदाएं जारी होने की उम्मीद है। एक जुलाई 2026 के आदेश के तहत सरकार ने पहले चरण में 10 पर्यटन विकास प्राधिकरणों के मास्टर प्लान की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समितियां गठित की थीं।
समयसीमा में पूरा करना चुनौती
विभिन्न योजनाओं के लिए कंवर सुरजीत सिंह इंस्टीट्यूट फार स्पेशियल प्लानिंग एंड एनवायरनमेंट रिसर्च, स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के भोपाल और दिल्ली परिसरों तथा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर को सलाहकार के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।
पूर्व चीफ टाउन प्लानर इफ्तिखार अहमद हकीम के अनुसार, कई योजनाओं के शुरुआती चरण में होने के कारण वित्त वर्ष के अंत तक उन्हें अंतिम रूप देना चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए विभागीय समीक्षा, आपत्तियों का निस्तारण और अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया तेज करनी होगी।
मास्टर प्लान शहरों के भविष्य, भूमि उपयोग, आवासीय विस्तार और बुनियादी सुविधाओं के विकास की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।
