राज्य ब्यूरो, जम्मू । अतीत की बात छोड़ें, वर्तमान की बात करें। आप खुद देखेंगे कि हमारे समुदाय की मतदान में भागीदारी पहले से कहीं ज्यादा होगी। कुछ परेशानियां जरूर हैं, पर इस बार सभी कश्मीर पंडित पहले से अधिक उत्साह के साथ मतदान के लिए एम फार्म और 12 सी फार्म भर रहे हैं। विस्थापित कश्मीरी पंडित पिंटू जैसे कई इस बार मतदान करने को लेकर उत्साहित हैं।

कश्मीर के विस्थापित पंडित मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं। पुरानी सूची से नाम तलाश कर नई सूची में उन्हें शामिल किया जा रहा है। इसका मकसद उन कश्मीरी नेताओं को आईना दिखाना है जो आतंकियों की भाषा बोल रहे हैं। राज्य में रजिस्टर्ड कश्मीरी पंडित मतदाताओं की तादाद लगभग एक लाख से ऊपर है। यह तादाद दो से तीन लाख होती, यदि इस समुदाय के लोगों ने वोट की अहमियत को समझा होता और विस्थापन वाली जगह वोट नहीं बनवाया होता।

मतदाता सूची में चलता रहा खेल

जम्मू के आनंद नगर में रहने वाले आर्यन रमेश ने कहा कि इस बार तो लोग एम फार्म और 12 सी को भरने के बाद इस बात को सुनिश्चित कर रहे हैं कि संबंधित मतदाता सूची में नाम, अभिभावक का नाम और गांव का नाम सही है कि नहीं। पिछली बार मैंने हब्बाकदल (श्रीनगर) और उसके साथ सटे इलाकों से विस्थापित पंडित मतदाताओं के लगभग नौ हजार एम फार्म और 12 सी फार्म भरवाए थे। जब डाटा फीडिंग शुरू हुई तो 4200 को डाटा फीडरों ने अपने स्तर पर ही खारिज कर दिया। उनके पास जो आंकड़े व जानकारी थी, वह एम फार्म से मेल नहीं खाती थी। सूची में नाम अगर रमेश कुमार था तो पिता का नाम इकबाल खान था। इसलिए, रमेश कुमार को मतदान से वंचित कर दिया गया।

अन्य राज्यों में वोट बनवा लिए

विश्व कश्मीरी समाज नामक संगठन के संयोजक किरण वात्तल ने कहा कि मेरा वोट जम्मू में बना है। मेरे समुदाय से कई लोग ऐसे हैं जो इस बार ऊधमपुर, जम्मू, दिल्ली, चंडीगढ़ और मुंबई जैसे शहरों की मतदाता सूचियों से नाम हटवाकर कश्मीर स्थित अपने शहर व मुहल्ले की सूचियों में दर्ज करा रहे हैं। विस्थापित पंडितों में से कइयों ने यह मान लिया है कि वे वापस नहीं जा सकेंगे। इसलिए, उन्होंने कश्मीर की मतदाता सूची से नाम हटवाते हए अन्य जगहों पर अपने वोट बनवाए हैं।

इस बार 10 हजार से अधिक फार्म जमा

बारामुला-कुपवाड़ा में पहले चरण में मतदान होना है। विस्थापित मतदाताओं के बारे में पूछने पर चुनाव अधिकारी ने कहा कि करीब 10 हजार मतदाता बारामुला और बांडीपोर में हैं। 4675 लोगों के एम फार्म जमा हो चुके हैं। इस फार्म के जरिए हम संबंधित मतदाता सूची में उनका नाम शामिल करते हैं। जम्मू में 4590, उधमुपर में 76 और दिल्ली में नौ विस्थापित पंडित मतदाताओं ने यह औपचारिकता पूरी कर ली है। ऑनलाइन आवेदन भी आए हैं। मैं अपने स्तर पर नहीं कह रहा हूं, यहां जो स्थानीय अधिकारी इस प्रक्रिया के साथ बीते कई सालों से जुड़े हैं, वे कह रहे हैं कि यह बहुत ज्यादा है। पहले हजार-बारह सौ फार्म ही आते थे।

श्रीनगर और अनंतनाग सीट पर अहम भूमिका में

कश्मीरी पंडित श्रीनगर और अनंतनाग सीट पर काफी प्रभावी भूमिका अदा कर सकते हैं। खासकर घाटी में कम मतदान की स्थिति में ये वोट काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इन दोनों सीटों पर ही सबसे ज्यादा करीब 80 हजार विस्थापित पंडित मतदाता हैं।

कैसे डालेंगे वोट

जम्मू, उधमपुर और दिल्ली के रिलीफ कैंप में रह रहे कश्मीरी विस्थापित मतदाताओं के लिए विशेष मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वे इन मतदान केंद्रों में आकर या पोस्टल बैलेट के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए कश्मीर के विस्थापित मतदाताओं को एम फार्म या 12-सी फार्म भरकर स्वयं उपस्थित होकर निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी को उपलब्ध कराना होगा। निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी इसकी जांच करेंगे। संबंधित मतदाता के आवेदन को कश्मीर की संबंधित मतदाता सूची, जहां उसका नाम दर्ज है से मिलान किया जाएगा। इस बार एम फार्म और 12-सी फार्म वे ऑनलाइन जमा करा सकेंगे। इससे उनका काफी समय बचेगा। क्या चुनाव आयोग कश्मीरी पंडितों को मतदान के लिए प्रेरित कर पाएगा, यह सबसे बड़ी चुनौती है।

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