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जम्मू-कश्मीर में बनेंगे एकता मॉल, 255 करोड़ रुपये होंगे खर्च; नवंबर में जारी होगा ठेका

Published: Thu, 22 Oct 2026 09:59 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में 255 करोड़ रुपये की लागत से जम्मू और श्रीनगर में पीएम एकता मॉल बनाए जाएंगे।

जम्मू-कश्मीर में बनेंगे एकता मॉल (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में बनेंगे एकता मॉल (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर में बनेंगे दो पीएम एकता मॉल

  2. कुल 255 करोड़ रुपये होंगे खर्च, नवंबर में ठेका

  3. स्थानीय हस्तशिल्प, उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा

राज्य ब्यूरो, जम्मू। प्रदेश की राजधानी जम्मू और श्रीनगर शहरों में पीएम एकता मॉल का निर्माण किया जाएगा। इसका निर्माण कार्य इस साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है और नवंबर के अंत तक निर्माण कार्य का आवंटन पत्र करने की योजना है।

प्रदेश की हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने तथा स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए दोनों शहरों में 255 करोड़ से पीएम एकता मॉल स्थापित किए जा रहे हैं।

मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने श्रीनगर में उच्चस्तरीय बैठक में दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। जम्मू में 125 करोड़ और श्रीनगर में 130 करोड़ से बनने वाले इन मॉल के लिए अनुबंध समिति 19 अक्टूबर को विचार कर चुकी है।

तीसरे सप्ताह में जारी होगा कॉन्ट्रैक्ट

दोनों परियोजनाओं के कार्य आवंटन पत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह तक जारी होने की उम्मीद है। इनके संचालन और रखरखाव के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल अपनाया जाएगा तथा निजी भागीदार का चयन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से होगा।

एकता मॉल कश्मीर के पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा, स्वदेशी उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के साथ देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उत्पादों के लिए भी साझा मंच उपलब्ध कराएंगे।

इन केंद्रों से स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों, उद्यमियों और उत्पादकों को बाजार से जोड़ने, पर्यटन को बढ़ावा देने तथा रोजगार और स्थायी आजीविका के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बढ़ेगी पहुंच

‘एक जिला एक उत्पाद’ पहल और भौगोलिक संकेतक टैग वाले उत्पादों को पहचान दिलाकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाना पहल का प्रमुख उद्देश्य है।

सरकार इन परियोजनाओं पर नीतिगत और रणनीतिक निगरानी बनाए रखेगी। दोनों मॉल वाणिज्य, संस्कृति और पर्यटन को एक मंच पर लाने के साथ स्थानीय उत्पादकों की बाजार पहुंच बढ़ाने तथा जम्मू-कश्मीर को देश के खुदरा व्यापार और सांस्कृतिक तंत्र से जोड़ने में सहायक होंगे।

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