जम्मू, नवीन नवाज। Jammu And Kashmir Terrorist. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने जम्मू-कश्मीर में पैसे की तंगी से कराह रहे आतंकियों के लिए वित्तीय ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए अब अफगानिस्तान, यूरोप, थाईलैंड और मलेशिया को चुना है। आइएसआइ अफगानिस्तान के आतंकियों और कारोबारियों से गठजोड़ में लगी है। जम्मू-कश्मीर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में नशीले पदार्थाें की तस्करी में लिप्त लोगों को भी अपने साथ जोड़ने के अलावा गुलाम कश्मीर में आतंकियों के वित्तीय नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को भी उसने बदल दिया है। आइएसआइ ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के लिए वित्तीय ऑक्सीजन के अपने तंत्र की ओवरहॉलिंग की है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी इस समय पैसे की तंगी से परेशान हैं। इससे न सिर्फ उन्हें अपने लिए नए ठिकानों को तैयार करने में बल्कि अन्य साजो सामान जुटाने में भी मुश्किल हो रही है। ओवरग्राउंड वर्कर भी पूरा सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस कारण वह अपनी विध्वंसकारी गतिविधियों को भी अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। पुराने हवाला कारोबारी और जम्मू-कश्मीर में उनके कई फाइनेंसर इस समय जेल में हैं।

सूत्रों ने बताया कि बीते दिनों कश्मीर में पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ के आधार पर स्वीकार किया है कि पैसा और हथियार दोनों की कमी हो चुकी है। उनकेे मुताबिक, क्रास एलओसी ट्रेड के बंद होने और एनआइए द्वारा कई बड़े अलगाववादी नेताओं और कुछ व्यापारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद पाकिस्तान से आने वाली उनकी वित्तीय मदद बीते एक साल के दौरान अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने बताया है कि अगस्त के बाद जो हालात रहे हैं, उसका असर स्थानीय स्तर पर जमा होने वाले पैसे पर भी पड़ा है। इसलिए जिहादी संगठन खुलकर अपनी कार्रवाई को अंजाम नहीं दे रहे हैं।

इन आतंकियों और खुफिया तंत्र द्वारा अपने नेटवर्क के आधार पर जुटाई गई सूचनाओं के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने अब अफगानिस्तान के कुछ कारोबारियों जिनका दिल्ली, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में संपर्क है, का इस्तेमाल करने लगी है। वह अफगानिस्तान में सक्रिय तालिबान व अन्य आतंकी संगठनों से भी मदद ले रही है। इनके जरिए वह कश्मीर में आतंकियों व अलगाववादियों के लिए पैसा पहुंचाने का वही तरीका इस्तेमाल करेगी, जो वह क्रास एलओसी ट्रेड में अपना रही थी। इसके अलावा वह मलेशिया, थाईलैंड और यूरोप में सक्रिय अपने नेटवर्क के जरिए भी कश्मीर के कई कारोबारियों व इन मुल्कों में रोजगार कमाने पहुंचे जम्मू-कश्मीर के कई लोगों के साथ संपर्क बना रही है। इनके जरिए वह कश्मीर में विभिन्न प्रकार के सामान के आयात-निर्यात के खेल में मुनाफे की आड़ में पैसा जम्मू कश्मीर में हालात बिगाड़ने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

उनकी मानें तो बीते पांच-छह सालों में अफगानिस्तान के साथ हिंदुस्तान के कई कारोबारियों का कारोबार बड़ा है। इस कारोबार में कुछ वह लोग भी शामिल हैं, जो पहले पाकस्तान में सक्रिय आइएसआइ और जिहादी संगठनों से जुड़े व्यापारियों से कारोबार करते थे।

आतंकियों के हवाला और वित्तीय नेटवर्क की निगरानी कर रही सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि गुलाम कश्मीर में बैठे आतंकी सरगनाओं ने पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी के जरिए नशीले पदार्थाें के कारोबार में भी सक्रिय भूमिका निभाना शुरू कर दी है। वह मुख्य रूप से हेराइन और ब्राउन शूगर की तस्करी में लिप्त हैं और जम्मू-कश्मीर विशेषकर कश्मीर घाटी के नियंत्रण रेखा के साथ सटे इलाकों में रहने वालों के साथ संपर्क कर, एलओसी पार से नशीले पदार्थाें को भेज रहे हैं।

नियंत्रण रेखा के साथ सटे इलाकों में रहने वाले उनके संपर्क सूत्र मात्र पांच से दस हजार रुपये की कमीशन पर नशीले पदार्थ को श्रीनगर या फिर देश के अन्य भागाें में पहुंचाने का काम भी कर रहे हैं। इससे होने वाली कमाई जिहादी सरगनाओं को सरहद पार नहीं पहुंचाई जाती, बल्कि वह हिंदुस्तान में उनके नेटवर्क के जरिए विभिन्न तरीकों से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय उनके कैडर तक पहुंच रही है। इसके अलावा आतंकी संगठन दक्षिण कश्मीर और उत्तरी कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में नशीले पदार्थाें की खेती और कारोबार में लिप्त तत्वों से प्रोटक्शन मनी भी प्राप्त कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सरहद पार से आनी वाली कुल हेरोइन और ब्राउन शूगर का अस्सी प्रतिशत अफगानिस्तान,पेशावर से ही आता है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर में सक्रिय जिहादी और अलगाववादी तत्वों के लिए पैसा पहुंचाने के अपने तंत्र में व्यापक बदलाव किया है। आइएसआइए और जिहादी संगठनों ने अधिकांश पुराने अलगाववादियों और कश्मीर में विभिन्न प्रकार के मजहबी संगठनों की आड़ में हवाला कारोबार चलाने वालाें को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। वह जम्मू-कश्मीर के उन व्यापारियों से भी सीधे संपर्क नहीं कर रही है, जो अतीत में कभी हवाला कनेक्शन क चलते सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर रहे हैं या उनका कोई निकट संबंधी हवाला कारोबार या अलगाववादी गतिविधियों में पकड़ा गया है।

उसने जम्मू-कश्मीर में सक्रिय जिहादी संगठन के वित्तीय कमांडरों को ही नहीं गुलाम कश्मीर में बैठे आतंकी नेटवर्क के वित्तीय कमांडरों को भी बदल दिया है। उसने गुलाम कश्मीर में कुछ पुराने जिहादी कमांडरों को जिनसे करीब एक दशक पहले वित्तीय नेटवर्क की कमान वापस ली गई थी, दोबारा सौंपी हैं। हिज्ब में बिलाल शेरा और शेर खान, लश्कर में तल्हा और वलीद को वित्तीय मामलों की देखरेख का जिम्मा दिया गया है।

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