जम्मू, सुरेंद्र सिंह। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की आड़ में चल रहा नारको टेररिज्म को जड़ से उखाड़ फेंकने का खाका तैयार हो गया है। राज्य में जल्द स्पेशल नारकोटिक्स सेल बनने जा रहा है। इस प्रस्ताव को गृह मंत्रालय भेज दिया गया है जहां से मंजूरी के बाद विशेष सेल काम करना शुरू कर देगा।

पड़ोसी देश पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के साथ नारको टेररिज्म चला रहा है। इसका मकसद राज्य की युवा पीढ़ी को नशे में डुबा आतंकवाद को जीवित रखना है। सीमा पार पाकिस्तान से नशे की खेप को कश्मीर भेजा जा रहा है जहां से उसे आगे पूरे देश में मादक पदार्थों के तस्कर उसे सप्लाई कर रहे हैं। यह सेल पुलिस के अलग विंग की तरह काम करेगा। क्राइम ब्रांच, सीआईडी, ट्रैफिक की तरह स्पेशल नारकोटिक्स सेल भी एक अलग विंग बनेगा।

प्रत्येक जिले में खुलने वाले विंग का नेतृत्व कम से कम एसपी रैंक का अधिकारी करेगा जिसमें डीएसपी, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर व पुलिस कांस्टेबल तैनात किए जाएंगे। इस विंग को बनाए जाने के पीछे उद्देश्य थानों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करना है। मादक पदार्थों की तस्करी के कई मामले थानों में दर्ज हैं जिस कारण थानों में तैनात जांच अधिकारी दूसरे अपराधिक मामलों की जांच ठीक से नहीं कर पाते। नारकोटिक्स स्पेशल सेल के मादक पदार्थों की तस्करी के किसी भी थाने की जांच करेगा। तस्करों से पूछताछ कर उनके खिलाफ कार्रवाई भी करेगा।

लगातार कसा जा रहा शिकंजा :

जम्मू कश्मीर पुलिस ने वर्ष 2019 में नशा तस्करी के 1029 मामले दर्ज कर 1490 तस्करों को गिरफ्तार भी किया था। वर्ष 2018 में 1200 लोगों को नशा तस्करी के आरोप में पकड़ा था। मादक पदार्थों की तस्करी में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देख पंजाब की तरह जम्मू कश्मीर पुलिस ने विशेष सेल के गठन का फैसला किया। पंजाब में यह सेल 2017 से काम कर रहा है।

नशा तस्करी में आएगी कमी :

नशे के खिलाफ जम्मू कश्मीर पुलिस का अभियान जारी है। इस सेल के गठन के बाद नशा तस्करी के मामलों में कमी आएगी। जल्द ही सेल का गठन हो जाएगा। डीजीपी दिलबाग सिंह फलों की पेटियों की आड़ में तस्करी जम्मू में भी हेरोइन बरामदगी के मामले रोज सामने आ रहे हैं, जिसमें हजारों से लेकर लाखों रुपयों की खेप पुलिस के हाथ लग रही है। साथ ही फलों के सीजन में मादक पदार्थो की तस्करी के मामले भी बढ़ जाते हैं। फलों की पेटियों के नीचे छिपाकर तस्कर इसे राज्य से बाहर ले जाने में कामयाब हो जाते हैं। पुलिस के पास भी सभी ट्रकों की जांच करना संभव नहीं होता, जिस कारण कई बार तस्कर नशे की खेप ले जाने में कामयाब हो जाते हैं।

उत्तरी कश्मीर है नशे का अड्डा :

उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा पार गुलाम कश्मीर के रास्ते बड़े पैमाने पर हेरोइन, चरस, ब्राउन सुगर की तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा गुलाम कश्मीर से होते हुए नशे की खेप कश्मीर में भेजी जाती है। नशे की इस तस्करी से होने वाली कमाई से पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को हवा देता है। नशे से पीडि़त कश्मीर के युवा आतंकवाद में आसानी से शामिल हो जाते हैं। यही पाकिस्तान की साजिश है। स्थानीय लोग भी नशे से निजात पाने के लिए पुलिस, नागरिक प्रशासन और सेना के पास लगातार पहुंच रहे हैं। 

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Posted By: Preeti jha

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