श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) ने बुधवार को कश्मीर में सुरक्षाबलों पर मानवाधिकारों के हनन और नागरिक मौतों में बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए दो जून को कश्मीर बंद का आहवान किया है।

गौरतलब है कि आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस समेत कश्मीर के विभिन्न अलगाववादी संगठनों ने भारत विरोधी एजेंडे को मिलकर चलाने के लिए कटटरपंथी सईद अली शाह गिलानी, उदारवादी हुर्रियत प्रमुख मीरवाइज मौलवी उमर फारुक और जेकेएलएफ चेयरमैन मोहम्मद यासीन के संयुक्त नेतृत्व में जेआरएल बनाई है।जेआरएल ने बंद का आह्वान करने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव व संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से कश्मीर के हालात का जायजा लेने और कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा जारी मानवाधिकारों के हनन की जांच के लिए एक दल भी भेजने का आग्रह किया है।

बुधवार शाम जारी बयान में जेआरएल ने कहा है कि सुरक्षाबल लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जामिया मस्जिद में भी घुसकर लोगों से मारपीट करने लगे हैं। लोगों के बाग और फसलें उजाड़ रहे हैं। बंदूक उठाने वाले नौजवानों के घरों में घुसकर उनके परिजनों के साथ मारपीट कर रहे हैं।

हड़ताल का विकल्प तलाशने के अलगाववादियों ने बनाई समिति

हड़ताल और बंद की सियासत का विकल्प खोजने के लिए अलगाववादी संगठनों के साझा मंच ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) ने सोमवार को छह सदस्यीय समिति गठित कर दी है। हड़ताल से बच्चों की पढ़ाई और व्यापारी वर्ग को पहुंच रहे नुकसान के चलते स्थानीय लोग अलगाववादी खेमे की पर सवाल उठा रहे हैं।

लोगों में बढ़ रहे असंतोष को देखते हुए ही पिछले दिनों अलगाववादी यासीन मलिक और मीरवाइज ने कहा था कि हड़ताल और बंद मजबूरी है। कोई अन्य विकल्प मिलने तक हड़ताली सियासत को नहीं छोड़ा जा सकता। सैयद अली शाह गिलानी ने भी कहा कि मौजूदा हालात में बंद और हड़ताल की सियासत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

लिहाजा, बंद और हड़ताल के विकल्प को तय करने के लिए सभी संबंधित पक्षों से बातचीत होगी।सोमवार को जेआरएल ने कश्मीर में देश विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए हड़ताल और बंद की सियासत का विकल्प तय करने के लिए कश्मीर की सिविल सोसायटी, छात्र संगठनों, मजहबी और सामाजिक संगठनों के साथ व्यापारियों, डॉक्टर, इंजीनियर और बुद्धिजीवियों से विचार विमर्श के लिए छह सदस्यीय समिति बनाई है। समिति का नेतृत्व गुलाम नबी जकी करेंगे। इसमें उनके अलावा गुलाम नबी नजार, उमर आदिल डार, हकीम अब्दुल रशीद, शेख अब्दुल रशीद और मोहम्मद यासीन बट शामिल हैं। यह समिति सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट और रणनीति बनाकर जेआरएल नेतृत्व को सौंपेगी।

जेआरएल नेतृत्व इस पर विचार करते हुए अंतिम फैसला लेगा।विदित हो क कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी, उदारवादी हुíरयत प्रमुख मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और जेकेएलएफ चेयरमैन मोहम्मद यासीन मलिक के संयुक्त नेतृत्व में कश्मीर के सभी अलगाववादी संगठनों ने अपने देश विरोधी एजेंडे को गति देने के लिए जेआरएल नामक एक नया मंच बनाया है। जेआरएल के बैनर तले ही कश्मीरी अलगाववादी पिछले दो वर्षो से हड़ताल, बंद और देश विरोधी प्रदर्शनों का आयोजन कर रहे हैं।

 अलगाववादियों ने वार्ता से किया इन्कार

श्रीनगर केंद्र सरकार की कश्मीर समस्या के समाधान की कोशिशों को हुर्रियत समेत सभी अलगाववादी संगठनों का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) ने नकारते हुए फिलहाल कश्मीर मुद्दे पर केंद्र से बातचीत करने से इन्कार कर दिया है।

जेआरएल ने कहा है कि केंद्र की कश्मीर मुद्दे पर बातचीत की पेशकश गुमराह करने वाली है। इसलिए यह अस्वीकार्य है। हम लोग हक-ए-खुद इरादियत (आत्मनिर्णय का अधिकार) के लिए लड़ रहे हैं और उससे पीछे नहीं हट सकते। बातचीत त्रिपक्षीय हो। इससे पहले जरूरी है कि केंद्र बातचीत पर अपना एजेंडा स्पष्ट करे।

गौरतलब है कि जुलाई 2016 में आतंकी बुरहान की मौत के बाद कश्मीर में भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जेआएल का गठन किया था। इसमें न सिर्फ हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों गुट शामिल हैं बल्कि हुर्रियत के दायरे से बाहर के सभी अलगाववादी संगठन भी शामिल हैं।

जेआरएल की अगुवाई कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी, उदारवादी हुर्रियत प्रमुख मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और जेकेएलएफ के चेयरमैन यासीन मलिक कर रहे हैं।केंद्र सरकार की ओर से कश्मीर मुद्दे पर बातचीत की पेशकश के बाद जेआरएल की मंगलवार को पहली बैठक थी।

बैठक कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी के निवास पर हुई। उदारवादी हुíरयत कांफ्रेंस प्रमुख मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और जेकेएलएफ चेयरमैन मोहम्मद यासीन मलिक करीब पौने दो बजे गिलानी के घर पहुंचे। बैठक में जेआरएल नेताओं ने केंद्र की बातचीत की पेशकश को गुमराह करने वाला पाया।

अलगाववादी नेताओं के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीर और कश्मीरी दोनों ही हमारे हैं, जबकि सुषमा स्वराज कहती हैं कि आतंकवाद के पूर्ण खात्मे तक पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होगी। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि कश्मीर में रमजान के दौरान युद्धविराम आतंकियों के लिए नहीं बल्कि लोगों के लिए है। राज्य पुलिस महानिदेशक कहते हैं कि युद्धविराम इसलिए है ताकि बंदूक उठाने वाले युवक घर लौटें।

जेआरएल के मुताबिक, बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर में बयान दिया था कि कश्मीर समस्या का समाधान सिर्फ विकास है और इसके लिए शांति सबसे पहले होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने अपने बयान के जरिये कश्मीर में अमन बहाली का जिम्मा पूरी तरह स्थानीय लोगों पर थोपते हुए केंद्र सरकार को इस जिम्मेदारी से बाहर निकाला है। बैठक के बाद जेआरएल ने बयान जारी कर कहा कि हम जानना चाहते हैं कि केंद्रीय गृहमंत्री किस तरह की बातचीत का जिक्र कर रहे हैं। बातचीत का एजेंडा क्या है। क्या बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास के बारे में दी गई सलाह पर होगी। इन नेताओं के बयान बातचीत से लेकर परस्पर विरोधाभासी हैं। इसलिए हम पहले यह जानना चाहते हैं कि केंद्र सरकार कौन सी बातचीत चाहती है। उसके बाद ही हम जवाब देंगे।

जम्मू कश्मीर एक विभाजित क्षेत्र है, जिसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है। इस मामले के तीन प्रमुख पक्षकार भारत, पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर के लोग हैं। कश्मीर समस्या के समाधान की प्रक्रिया में एक भी पक्ष अगर अनुपस्थित रहे तो हल नहीं निकलेगा। हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन केंद्र सरकार बातचीत को लेकर पहले अपना रुख स्पष्ट करे।

Posted By: Preeti jha

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