रोए, गिड़गिड़ाएं, खुदा का वास्ता दिया मगर नहीं मानी सरकार, जम्मू-कश्मीर विधायक वीरी का आरक्षण संबंधी बिल नामंजूर
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेकां विधायक बशीर अहमद वीरी का आरक्षण संबंधी निजी विधेयक खारिज हो गया।

कैप्शन: जम्मू-कश्मीर विधायक बशीर अहमद वीरी (File Photo)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आरक्षण नीति को लेकर आज बुधवार को भावुक दृश्य देखने को मिला। नेकां के विधायक बशीर अहमद वीरी रोए, गिड़गिड़ाए लेकिन उनके प्राइवेट मेम्बर बिल को पेश करने की अनुमित नहीं मिली।
समाज कल्याण मंत्री सकीना इट्ट् के आश्वासन के बाद भी वीरी ने बिल वापस नहीं लिया। बिल पर वोटिंग हुई। बिल पेश करने को नामंजूर कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर यह बिल पेश करते हैं तो करने दीजिए, हम इसके खिलाफ वोट डालेंगे।
विधानसभा में नेशनल कांफ्रेंस के विधायक बशीर अहमद वीरी अपनी आरक्षण संबंधी विधेयक को पेश करने की अनुमति न मिलने पर सदन में भावुक हो गए और रो पड़े।
उन्होंने सदन और सरकार से अपील करते हुए कहा कि खुदा के लिए मुझे अपना बिल पेश करने की अनुमति दें। उन्होंने बताया कि उनका बेटा लंदन भाग गया है और वापस आने को तैयार नहीं है क्योंकि यहां युवाओं के लिए अवसर नहीं हैं।
इंदिरा फैसला लागू करने की मांग की
वीरी ने कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र के युवाओं से वादा किया था कि वह आरक्षण नीति के खिलाफ उनकी आवाज उठाएंगे। उन्होंने खुले मेरिट (ओपन मेरिट) का हिस्सा 65 प्रतिशत करने, इंदिरा साहनी फैसला लागू करने और ईडब्लयूएस, एएलसी तथा आरबीए श्रेणियों में असमानताओं को दूर करने की मांग की।
कहा कि युवाओं के साथ भेदभाव हो रहा है। हम आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन इसमें हर एक को इंसाफ मिलना चाहिए। वीरी ने बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित अन्य प्रदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर सामान्य श्रेणी की आबादी कम होने के बावजूद आरक्षण पचास प्रतिशत से ऊपर नहीं है। जम्मू कश्मीर में आरक्षण 76 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
तीन दिन से सो नहीं पा रहे...
भाषण देते हुए वीरी ने रोना शुरु कर दिया। पानी पीते हुए भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि वह तीन दिन से सो नहीं पा रहे थे। उनका बिल पीछे चल रहा था। खुदा के वास्ते मेरा बिल पेश करने की अनुमित दे दीजिए। उन्होंने जम्मू व कश्मीर संभाग के आरक्षण को लेकर आंकडे पेश करते हुए कहा कि इनमें काफी असामनता है।
हालांकि, जब इस विधेयक को सदन में पेश करने की अनुमति के लिए मतदान हुआ तो इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। केवल चार विपक्षी विधायकों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने इसका विरोध किया।
सभी वर्ग के लोगों से की चर्चा फिर तय की रिपोर्ट
सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री सकीना इ्ट्टू ने कहा कि आरक्षण एक संवेदनशील मुद्दा है और इस पर सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के निर्देश पर गठित कैबिनेट सब-कमेटी ने सभी वर्ग के लोगों से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट तय समय में तैयार कर ली है।
मंत्री ने कहा कि इस रिपोर्ट को सरकार ने मंजूरी देकर अंतिम निर्णय के लिए उपराज्यपाल को भेज दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार सभी वर्गों के लिए न्यायसंगत और व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाएगा।
सकीना इट्टू ने कहा कि यह साझा मसला है। सरकार ने अपना काम किया है। अब हमारे हाथ में नहीं है। साल 2011 में जनगणना के ही आंकड़े है। उसके बाद के कोई आंकड़े नहीं है। हमने हर वर्ग के साथ इंसाफ किया है। जब उपराज्यपाल से रिपोर्ट आ जाती है तो सरकार ने सार्वजनिक करेगी। रिपोर्ट गोपनीय है। हम अभी बता नहीं सकते है लेकिन हर वर्ग के साथ इंसाफ किया गया है।
'मैं पार्टी का वफादार सिपाही हूं...'
मंत्री के जवाब के बाद वीरी ने कहा कि मैं पार्टी का वफादार सिपाही हूं। मेरी विश्वसनीयता पर सवाल न करें। मैंने आंदोलन में भाग नहीं लिया। खुदा के वास्ते मुझे बिल पेश करने की अनुमति दें। रिपोर्ट में देरी हो सकती है। आप बिल को पेश करने या सेलेक्ट कमेटी को भेजने पर विचार करें।
स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि क्या आप बिल पेश करना चाहते हैं या वापस लेना चाहते हैं। स्थिति को स्पष्ट करें। इस पर वीरी ने मतदान की मांग की। इस पर भाजपा के विधायक शाम लाल शर्मा ने कहा कि जब विधायक मतदान की मांग कर रहे हैं तो आप को क्या एतराज है। स्पीकर ने मतदान करवाते हुए सदस्यों से हाथ खड़े करने के लिए कहा। इस पर वीरी का बिल पेश करने को सदन ने नामंजूर कर दिया।
