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जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन में खरीद घोटाला, CAG रिपोर्ट ने खोली पोल; अनियमितताएं आईं सामने

Published: Sat, 04 Apr 2026 07:29 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन में दवाओं और उपकरणों की खरीद में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सीएजी रिपोर्ट और विधानसभा ...और पढ़ें

कैप्शन: जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन में खरीद घोटाला (फाइल फोटो)

कैप्शन: जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन में खरीद घोटाला (फाइल फोटो)

HighLights

  1. दवाओं और उपकरणों की खरीद में गंभीर अनियमितताएं उजागर

  2. सीएजी रिपोर्ट ने 7.92 करोड़ रुपये के जुर्माने पर सवाल उठाए

  3. 102 एम्बुलेंस सेवाएं तीन साल से अधिक समय से ठप

राज्य ब्यूरो, जम्मू।स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड में दवाओं और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

यह मामला सीएजी की साल 2000-01 से 2020-21 की रिपोर्ट में सामने आया, जिस पर विधानसभा की कमेटी आन पब्लिक अंडरटेकिंग की साल 2025-26 की रिपोर्ट में आपत्ति जताई है। कमेटी के चेयरमैन अली मोहम्मद सागर थे जिसमें दस विधायक शामिल थे। कमेटी ने 30 सितंबर 2025 व 6 जनवरी 2026 को निरीक्षण किया।

सीएजी की रिपोर्ट (पैरा 5.1) के अनुसार, रेट कांट्रेक्ट को अंतिम रूप देने में देरी के कारण दवाओं, मशीनरी और उपकरणों की समय पर खरीद नहीं हो सकी, जिससे निगम के गठन का उद्देश्य ही प्रभावित हुआ। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि देरी से आपूर्ति करने वाले सप्लायरों पर 7.92 करोड़ रुपये का जुर्माना (लिक्विडेटेड डैमेज) नहीं लगाया गया।

करोड़ों खर्च होने के बाद भी नहीं जारी रह सकीं एम्बुलेंस सेवाएं

इसके अलावा सात कंपनियों की बोलियों को खारिज कर आठवीं कंपनी से 25.48 करोड़ रुपये में स्यूचर आइटम्स की खरीद को अनुचित लाभ देने का मामला बताया गया है। वहीं, 3.18 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद 102 एम्बुलेंस सेवाएं तीन वर्षों से अधिक समय तक चालू नहीं की जा सकीं।

रिपोर्ट में परीक्षण प्रयोगशालाओं के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने से 9.74 लाख रुपये के अतिरिक्त खर्च का भी उल्लेख किया गया है। समिति के चेयरमैन ने बैठक के दौरान उप महालेखा परीक्षक को पैरा 5.1 पर विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए। इसके बाद अधिकारियों ने रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं को प्रस्तुत किया, जिन पर समिति के सदस्यों ने गहन चर्चा की और संबंधित निगम से संतोषजनक जवाब मांगे।

समिति ने विशेष रूप से दस मुद्दों पर जवाब तलब किया है जिसमें चिकित्सा सामग्री की खरीद के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है, अन्य कंपनियों के टेंडर खारिज करने के पीछे क्या कारण थे और जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी को चिकित्सा आपूर्ति के लिए चुनने के पीछे क्या आधार था।

घटिया दवाओं की हो रही खरीद?

निगम के लिए वर्षवार बजट का विवरण, पिछले कुछ वर्षों से खातों के अंतिम रूप न दिए जाने के कारण, घटिया (सब-स्टैंडर्ड) दवाओं की खरीद के कारण, एक्सपायरी दवाओं के निपटारे के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिय, 40 प्रतिशत आपूर्ति जेकेएमएससीएल के माध्यम से और 60 प्रतिशत स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के माध्यम से किए जाने के कारण, चिकित्सा आपूर्ति की खरीद प्रक्रिया का पालन न करने के कारण, जवाबदेही की कमी के कारण, खरीदी गई आपूर्ति के निरीक्षण की विधि शामिल है।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रश्नों का उत्तर देते हुए बताया कि चिकित्सा आपूर्ति की खरीद संबंधित चिकित्सा संस्थानों के विभागाध्यक्षों द्वारा भेजी गई मांग के आधार पर की जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2014 में स्थापित कारर्पोरेशन विभिन्न विभागों के पेशेवरों के समेकन का परिणाम है और प्रारंभिक चरण में इसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से खरीद में कोई समझौता नहीं किया गया।

निरीक्षण की प्रक्रिया के संबंध में विभाग ने बताया कि खरीदी गई सामग्री का निरीक्षण कई स्तरों पर किया जाता है और विशेषज्ञों की टीम द्वारा संतुष्ट होने के बाद ही भुगतान किया जाता है। दवाओं की बड़ी मात्रा को नष्ट किए जाने से संबंधित वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए विभाग ने इसे क्षेत्र की छवि खराब करने का एक सुनियोजित प्रयास बताया।

25 फीसदी दवाएं खरीदने की अनुमति

काॅरर्पोशन के माध्यम से 100 प्रतिशत चिकित्सा आपूर्ति न किए जाने के संबंध में विभाग ने कहा कि शुरुआती दौर में निगम सभी वस्तुओं की पूर्ण खरीद करने में सक्षम नहीं था, इसलिए वित्तीय हानि से बचने के लिए आंशिक खरीद विभागों व विभागाध्यक्षों के माध्यम से भी की गई। विभाग ने समिति को यह भी बताया कि अस्पतालों को 25 प्रतिशत तक दवाएं स्वयं खरीदने की अनुमति दी गई है, ताकि उनकी कमी के कारण किसी मरीज की मृत्यु न हो।

समिति ने कैंसर जैसी घातक बीमारियों के लिए दवाओं व उपचार की उपलब्धता न होने और मरीजों को निजी क्लीनिकों व अस्पतालों की ओर भेजकर उनके शोषण किए जाने के मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कमेटी विभाग के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। कमेटी ने विभाग से कहा है कि वह एक संशोधित व व्यापक जवाब दे।