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'जम्मू-कश्मीर बनेगा देश का पहला...', उमर अब्दुल्ला ने की 'पर्वतीय विकास नीति' लाने की पहल; CM ने बताए इसके फायदे

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:10 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर अपनी स्वतंत्र पर्वतीय विकास नीति तैयार करने की पहल कर रहा है, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय संवेदनशीलता, आर्थिक जरूरतों और स्थानीय आजीविका में संतुलन स्थापित करना है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर स्वतंत्र पर्वतीय विकास नीति तैयार करने की पहल।

  2. पर्यावरणीय संवेदनशीलता, आर्थिक जरूरतों, स्थानीय आजीविका में संतुलन।

  3. कृषि, बागवानी जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर हिमालयी क्षेत्रों के सतत विकास के लिए अपनी पर्वतीय विकास नीति तैयार करने की दिशा में पहल करने जा रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई है कि जम्मू-कश्मीर स्वतंत्र पर्वतीय विकास नीति अपनाने वाला पहला हिमालयी क्षेत्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का उद्देश्य विकास गतिविधियों को रोकना नहीं, बल्कि क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, आर्थिक जरूरतों और स्थानीय आबादी की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करना है। मुख्यमंत्री सोमवार को शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर (स्कास्ट-के) में 13वें सतत पर्वतीय विकास सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

ड्राफ्ट की तैयारी तेज: उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के तहत आयोजित इस सम्मेलन में सतत हिमालयी परिदृश्य और समावेशी विकसित भारत के लिए पर्वतीय विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जा रही है। उमर ने कहा कि पर्वतीय विकास नीति का प्रारूप तैयार करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है।

इसमें स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आदर्शवादी विचारों पर आधारित नीति व्यावहारिक नहीं होगी। इसके बजाय ऐसी सिफारिशें तैयार करनी होंगी, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके और जिनसे स्थानीय समुदायों को नुकसान न पहुंचे।

विकास मॉडल तैयार करना नीति का लक्ष्य: उमर अब्दुल्ला

उन्होंने सम्मेलन से ठोस सुझाव सामने आने की उम्मीद जताई, ताकि चर्चाओं को प्रभावी नीतियों और व्यावहारिक कदमों में बदला जा सके। उमर के अनुसार नीति का लक्ष्य ऐसा विकास मॉडल तैयार करना है, जो स्थानीय लोगों की आर्थिक सुरक्षा और प्रदेश की प्राकृतिक विरासत, दोनों को महत्व दे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के लिए प्रकाशित पुस्तकों व अन्य प्रकाशनों का विमोचन किया।

उमर ने जम्मू-कश्मीर की आर्थिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अक्सर केवल पर्यटन से जोड़कर देखा जाता है, जबकि कृषि और बागवानी का योगदान अधिक महत्वपूर्ण है।

इसलिए विकास संबंधी नीतियां बनाते समय इन क्षेत्रों से जुड़े लोगों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की निरंतरता स्थानीय परिवारों की आजीविका से सीधे जुड़ी है। ऐसे में विकास की रणनीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे आर्थिक अवसर बढ़ें और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

अनियंत्रित निर्माण बड़ी चुनौती

उमर ने जम्मू-कश्मीर में बदलते मौसम और अवैज्ञानिक निर्माण से बढ़ते पर्यावरणीय खतरों पर चिंता जताई है। कहा, कि अनियमित बर्फबारी, भारी वर्षा, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं हिमालयी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान अवैज्ञानिक कटाई से ढलानों की स्थिरता प्रभावित हो रही है।

अर्थव्यवस्था में कृषि और बागवानी की अहम भूमिका

उमर ने जम्मू-कश्मीर की आर्थिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अक्सर केवल पर्यटन से जोड़कर देखा जाता है, जबकि कृषि और बागवानी का योगदान अधिक महत्वपूर्ण है।

इसलिए विकास संबंधी नीतियां बनाते समय इन क्षेत्रों से जुड़े लोगों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की निरंतरता स्थानीय परिवारों की आजीविका से सीधे जुड़ी है। ऐसे में विकास की रणनीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे आर्थिक अवसर बढ़े और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।