श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्तियों में हुई धांधली और विकास योजनाओं के ठेकों में नियमों की अवहेलना व हेराफेरी की शिकायतों पर राज्य प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया है। इसके लिए पांच जांच समितियां (फैक्ट फाइंडिग कमेटी) गठित की हैं, जो वास्तविक तथ्यों का पता लगाएंगी। वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में ये समितियां 14 जून तक रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी।

संबंधित अधिकारियों ने बताया कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक और राज्य प्रशासन को विभिन्न स्तरों से खेल एवं कौशल विकास विभाग में नियुक्तियों, नदी-नालों-नहरों में खोदाई व सड़कों पर मैकडम बिछाने के ठेकों और स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वैन) के कार्यान्वयन में धांधली की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। राज्यपाल ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया।

राज्य गृह विभाग के प्रधान सचिव होंगे समित के अध्यक्ष

समिति वर्ष 2010 से 2018 तक जम्मू कश्मीर खेल परिषद और युवा सेवा एवं खेल विभाग में अवैध नियुक्तियां (अगर हैं) की जांच कर जिम्मेदार तत्वों को चिन्हित करेगी। जांच समिति की अध्यक्षता राज्य गृह विभाग के प्रधान सचिव करेंगे। समिति में युवा सेवा एवं खेल विभाग के सचिव भी शामिल हैं। कौशल विकास विभाग में फर्जी और अवैध नियुक्तियों की जांच के लिए गठित समिति की अध्यक्षता वन विभाग के सचिवायुक्त करेंगे। समिति में सचिव डीएमआरआरआर व सचिव तकनीकी शिक्षा भी शामिल किए हैं। यह समिति कौशल विकास विभाग और इसके अधीनस्थत किसी भी स्वायत्त संस्था, निगम या संगठन में वर्ष 2010-2018 के दौरान हुई सभी अवैध नियुक्तियों (अगर हैं) की जांच करेंगी।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और लावडा में भी होगी जांच

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और लेक एंड वॉटरवेज डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा 2010-2018 के दौरान झेलम दरिया और किसी अन्य जगह पर खोदाई के लिए दिए ठेके में धांधलियों (अगर हैं) की जांच करते हुए उनके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित करने के लिए बनाई समिति का नेतृत्व एचएंडयूडीडी विभाग के प्रधान सचिव कर रहे हैं। समिति में राजस्व सचिवायुक्त और पीएचई एवं सिंचाई विभाग के सचिवायुक्त भी हैं। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि राज्य में सड़कों को पक्का करने और उन पर मैक्डम बिछाने के ठेकों में गड़बडिय़ों (अगर हैं) का पता लगाने के लिए समिति वर्ष 2010-2018 तक के सभी मामलों की जांच करेगी। समिति की अध्यक्षता वित्त विभाग के प्रधानसचिव करेंगे। इसमें योजना विभाग के प्रधान सचिव के अलावा प्रबंध निदेशक जेकेपीसीसी भी शामिल हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे स्वैन प्रोजेक्ट में हो रहे विलंब के कारणों और अनियमितताओं का पता लगाने का जिम्मा परिवहन सचिवायुक्त को सौंपा है। समिति में उद्योग विभाग के प्रधान सचिव और सचिव उच्च शिक्षा विभाग भी शामिल हैं। पांचों समितियां को समयबद्ध तरीके से 14 जून तक जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।

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Posted By: Rahul Sharma

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