जमीन के रिकॉर्ड से लेकर राशन तक डिजिटल... जम्मू-कश्मीर डिजिटलीकरण में आई तेजी, 7.28 करोड़ राजस्व दस्तावेज स्कैन
जम्मू-कश्मीर में भूमि और राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर जोर दिया जा रहा है, जिससे डिजिटल गवर्नेंस और जनकल्याण योजनाओं की पहुंच बढ़ी है।

यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है।
HighLights
6,844 गांवों में 7.29 करोड़ राजस्व दस्तावेज स्कैन किए गए
99.4% जमाबंदी रिकॉर्ड डिजिटाइज, सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध
ई-ऑफिस लागू, डिजिलॉकर में 35.50 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में भूमि और राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के साथ डिजिटल गवर्नेंस और जनकल्याण योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा।
आंकड़ों के अनुसार, 6,844 गांवों में 7.29 करोड़ राजस्व दस्तावेज स्कैन किए जा चुके हैं। 99.4 प्रतिशत जमाबंदी रिकॉर्ड डिजिटाइज हो चुके हैं। साथ ही बड़ी संख्या में सरकारी सेवाओं को आनलाइन उपलब्ध कराया है।
खाद्य सुरक्षा तथा सामाजिक सहायता योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया है। आइटी सुधार कार्यक्रम के तहत सचिवालय, विभागीय प्रमुख कार्यालय और जिला स्तर पर ई-आफिस लागू किया है।
तहसील और ब्लॉक स्तर पर इसे शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। आंकड़ों के मुताबिक, 430 संगठनों में 45,953 से अधिक उपयोगकर्ता ई-आफिस से जुड़ चुके हैं, जबकि 1,710 सेवाएं आनलाइन उपलब्ध हैं। इस व्यवस्था कसे 70 लाख से अधिक डिजिटल दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
डिजिलाकर इकोसिस्टम में 188 सेवाएं और 35.50 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। 942 कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) टच पाइंट के माध्यम से रोजाना करीब पांच लाख डिजिटल लेनदेन दर्ज किए जा रहे हैं। 3के समाधान ऐप पर रोज 300 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों के निस्तारण की दर 94 प्रतिशत बताई है।
बीआइएसएजी-एन के सहयोग से 40 से अधिक आइटी पहल शुरू की हैं। भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण अभियान के तहत मानचित्रों का डिजिटलीकरण 94.23 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
6,850 चिन्हित शीट में से 6,544 का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। कुल 6,455 गांवों यानी 93.4 प्रतिशत गांवों की मैपिंग पूरी हो चुकी है, जबकि इनमें से 5,700 गांवों की ग्राउंड-ट्रुथिंग की जा चुकी है। 20 जिलों के 1,925 गांवों में सब-पार्सलाइजेशन का काम पूरा हो गया है।
