श्रीनगर, नवीन नवाज : उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के हालिया नई दिल्ली दौरे के बाद जम्मू कश्मीर में शुरू हुई विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यधारा की सियासत से जुड़े सभी राजनीतिक दलों में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। पांच अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति की बहाली और जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाए बिना विधानसभा चुनावों से दूर रहने का संकेत देने वाले दल भी अपने-अपने कार्यकर्ताओं को लामबंद करने में जुटे हुए हैं। इसके लिए वीडिया और टेलीकांफ्रेंस का भी सहारा लिया जा रहा है। सभी दल अपनी विभिन्न इकाइयों के चुनिदां नेताओं की क्रमानुसार बैठकें बुला रहे हैं, ताकि भीड़ जमा न हो। स्थानीय सियासी हल्कों में दावा किया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव इसी साल दिसंबर या अगले साल की शुरुआत में ही संपन्न कराए जा सकते हैं।

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में विधानसभा का प्रावधान है। फिलहाल, जम्मू कश्मीर में प्रशासनिक बागडोर पूरी तरह से उपराज्यपाल के हाथ में है। केंद्र सरकार ने पहले इसी साल जून-जुलाई में विधानसभा चुनाव कराने की योजना तैयार की थी, जो परिसीमन प्रक्रिया के पूरा न होने और कोरोना से उपजे हालात के कारण सिरे नहीं चढ़ सकी थी। अलबत्ता, अब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की गत रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री के साथ नई दिल्ली में हुई मुलाकात ने जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनावों की अटकलों को फिर से जन्म दे दिया है। इन अटकलों को परिसीमन आयोग के जल्द ही जम्मू कश्मीर दौरे की खबर ने भी मजबूती दी है। कहा जा रहा है कि परिसीमन आयोग जल्द ही एक बैठक बुलाने जा रहा है। उसके चंद दिन बाद वह जम्मू कश्मीर का दौरा करेगा और अगले साल अपना कार्यकाल पूरा होने से पूर्व ही अपनी रिपोर्ट देगा।

फारूक और महबूबा सक्रिय : दो दिन पहले नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने अपनी पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ एक वीडियो कांफ्रेंस की। इसमें भी विधानसभा चुनाव और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा हुई है। इसके अलावा कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के नेता जिला और ब्लाक स्तर पर भी छोटी-छोटी बैठकें कर रहे हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी लगातार फोन पर पार्टी के सभी जिला और ब्लाक प्रधानों के साथ संपर्क कर जम्मू कश्मीर के सियासी हालात पर उनकी राय ले रही हैं।

मजबूत होना चाहिए लोकतंत्र : नेकां के जम्मू संभाग के प्रांतीय प्रधान देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि हम चाहते हैं कि जम्मू कश्मीर मे लोकतंत्र मजबूत हो। नौकरशाही आम जनता की सामाजिक, राजनीतिक, विकासात्मक और आॢथक आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकती। जम्मू कश्मीर में तीन साल से निर्वाचित सरकार नहीं है। हम चाहते हैं कि यहां लोकतंत्र मजबूत हो। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता सैयद ताहिर ने कहा कि यहां जम्हूरियत जल्द बहाल होनी चाहिए, लोगों को उनका हक मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि पीडीपी ने डीडीसी चुनावों में भी हिस्सा लिया है।

नहीं टाले जाने चाहिए चुनाव : पैंथर्स - पैंर्थस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह ने कहा कि यहां चुनाव कल क्या आज कराए जाएं। हम इसके लिए तैयार हैं। हम अपने कैडर के साथ लगातार संपर्क में हैं। चुनी हुई सरकार न होने की स्थिति में आम लोगों कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। परिसीमन की आड़ में विधानसभा चुनाव नहीं टाले जाने चाहिए।

हम विधानसभा चुनाव के लिए तैयार : भाजपा - भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुपता ने कहा कि हम किसी भी समय विधानसभा चुनावों के लिए तैयार हैं। सोमवार को कोर समूह की बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई है, उनमें एक चुनाव भी था। हम उम्मीद कर रहे हैं कि परिसीमन आयोग 2021 के समाप्त होने से पहले अपना काम पूरा करेगा और चुनाव का भी एलान होगा।

पीपुल्स एलायंस ने भी की है चुनाव पर चर्चा : इन सभी सियासी गतिविधियों के बीच सबसे अहम पीपुल्स एलायंस फार गुपकार एलांयस की बुधवार को महबूबा मुफ्ती के निवास पर हुई बैठक है। हालांकि पीएजीडी के नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर बैठक में विधानसभा चुनावपर चर्चा को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव को लेकर भी बातचीत हुई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में विभिन्न राजनीतिक दलों को दिसंबर या फिर अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव कराए जाने की संभावना का संकेत देते हुए अपनी तैयारियों के लिए कहा है। 

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