सुरेंद्र सिंह, जम्मू

बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे प्राइवेट स्कूलों को शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि वे सिलेबस पूरा करवाने में जल्दबाजी न करें। यह निर्देश शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से मिल रही शिकायतों के बाद जारी किए हैं। अभिभावकों की शिकायत है कि कई स्कूल बच्चों को इतना काम दे देते हैं कि बच्चे दिन भर उसे पूरा करने में ही लगे रहते हैं।

लॉकडाउन के बीच इस समय मोबाइल इंटरनेट पर ही बच्चों को स्कूल पढ़ा रहे हैं। जूम एप, वाट्सएप ग्रुप आदि बनाकर स्कूल बच्चों को पढ़ा रहे हैं। दिन चढ़ते ही शिक्षक बारी-बारी मोबाइल पर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर देते हैं। हर शिक्षक की यही कोशिश रहती है कि उसका सिलेबस पूरा हो जाए और अपना सिलेबस पूरा करवाने के चक्कर में बच्चे काम के बोझ में दबे जा रहे हैं। वहीं, शिक्षा विभाग ने जो निर्देश जारी किए हैं, उसके मुताबिक स्कूल सीमित ऑडियो व वीडियो ही बच्चों को भेजें जो बच्चों की शंकाओं को दूर करने में मददगार हों। शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन कक्षाओं की समय अवधि तय करने में अभिभावकों व डॉक्टरों की सलाह लेने के भी निर्देश दिए हैं ताकि बच्चों की सेहत पर प्रभाव न पड़े। इसके अलावा स्कूलों को एनसीईआरटी, सीबीएसई व जेके बोर्ड के पाठ्यक्रम के मुताबिक ही बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा गया है।

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अपनी वेबसाइट पर पुस्तकों का ब्योरा दें सभी स्कूल

शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों को पढ़ाई जानी वाली पुस्तकों का ब्योरा अपनी वेबसाइट पर दें। निर्देश के मुताबिक स्कूल वही पुस्तकें बच्चों को पढ़ाएं जिन्हें बोर्ड ने मान्यता दी है। बोर्ड की मान्य के बिना कोई अतिरिक्त पुस्तक बच्चों को न पढ़ाई जाए। इसके अलावा स्कूलों को कहा गया है कि वे अभिभावकों पर अपनी मर्जी की दुकानों से पुस्तकें खरीदने का दबाव न बनाएं। इंटरनेट-टीवी पर छह घंटे से ज्यादा न बिताए बच्चे

शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को भी कुछ सलाह दी हैं। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे इस बात का ध्यान रखें कि उनका बच्चा इंटरनेट, टीवी पर पांच से छह घंटे से ज्यादा न बिताए। वीडियो देखने के बाद उसे पंद्रह से बीस मिनट उस विषय को समझने व लिखने के लिए दें। इसके अलावा बच्चों को अपनी शंकाओं को लिखने व उसे अपने शिक्षक के सामने रखने के लिए भी प्रेरित करें।

इसके अलावा अभिभावक अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन अस्थायी दाखिला भी करवा सकते हैं। जब स्कूल खुल जाते हैं तो अभिभावक उस दाखिले को जारी रख सकते हैं। अगर वे बच्चे को प्राइवेट स्कूल में दाखिल करवाना चाहते हैं तो स्कूल खुलने के बाद वे वहां उनका दाखिला करवा सकते हैं। कोई प्राइवेट स्कूल दाखिले से इन्कार नहीं कर सकता। कोई समस्या आने पर अभिभावक शिकायत सेल समाधान पर अपनी शिकायत ऑनलाइन भेज सकते हैं जिसका निपटारा किया जाएगा।

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हमारा यही प्रयास है कि बच्चे स्वस्थ रहकर पढ़ाई करें। बच्चों पर दबाव न पड़े, इसके लिए स्कूलों को सिलेबस को जल्द पूरा न करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई करने से बच्चों की आंखों पर भी असर पड़ सकता है। बच्चे काम के बोझ से तनाव में आ सकते हैं। अभिभावक भी बच्चों की पढ़ाई में मदद करें। उन पर ज्यादा पढ़ने का दबाव न बनाएं।

अनुराधा गुप्ता, डायरेक्टर, स्कूल एजुकेशन, जम्मू

Posted By: Jagran

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