जम्मू, राज्य ब्यूरो । लद्दाख की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही सेना ने भारतीय सेना ने कारगिल के कुरबाथांग इलाके से पीछे हटने का फैसला कर कस्बे के विस्तार के लिए तैयारी कर ली है। सेना कारगिल के निचले पठार क्षेत्र काे छह महीनों के अंदर खाली कर देगी।

भारतीय सेना ने कारगिल कस्बे से सटे इलाके को वर्ष 1948 में लिया था। जिले में 1700 कनाल में फैले इस निचले पठार क्षेत्र को फायरिंग रेंज के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सेना इन क्षेत्र में अपना बुनियादी ढांचा व विकसित किया है। पिछले सात दशकों में कारगिल जिले में बहुत विकास हुआ है। अब प्रशासन ने निचले पठार इलाके से यह जमीन लेकर मराठा यूनिट के पास व क्षेत्र के मुलबैख इलाके में इतनी ही जमीन देने का फैसला किया है।

छह महीने में सेना प्रशासन को साैंप देगी फायरिंग रेंज की जमीन

इस संबंध में सेना की माउंटेन डिवीजन का कारगिल हिल डेवेलपमेंट काउंसिल से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होने के बाद अब सेना क्षेत्र अपने बुनियादी ढांचे को नई जगह पर स्थापित करने की तैयारी कर रही है। सहमित पत्र पर हस्ताक्षर के कार्यक्रम में लद्दाख के डिप्टी कमिश्नर बशीर उल हक व 8 डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल नवीन एयरी भी माैजूद थे। नई जगह पर फायरिंग रेंज बनते ही सेना वहां पर अपनी गतिविधियां शुरू कर देगी। कारगिल में सेना के यूनिटें समय समय पर फायरिंग रेंज में प्रशिक्षण लेती हैं।

कारगिल हिल काउंसिल के चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसिलर फिरोज खान ने जमीन वापस देने के फैसले को सराहनीय बताया है। उनका कहना है कि विस्तार के लिए इस जमीन की जरूरत महसूस की जा रही थी। कारगिल जिला प्रशासन सेना से जमीन लेने का मसला पिछले काफी से उठा रहा था। अब यह जमीन मिलने के बाद कारगिल का विस्तार करने के लिए वहां पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत योजनाबद्ध् तरीके से कालोनी बनाने की तैयारी की है। जमीन मिलते ही आगे की कार्रवाई भी शुरू हो जाएगी।

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